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Indore: जहरीले यूका कचरे का मिट गया नामोनिशान, चार माह में 337 टन कचरा जलाया

Mon, 30 Jun 2025 11:25 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 30 Jun 2025 11:25 AM IST
सार

337 टन कचरा जलाने के बाद 750 टन राख बची है। जिसे विशेष बैग में भरा गया है। उसे लीक प्रफू स्टोरेज शेड में रखा गया है। उसके लिए जमीन से डेढ़ मीटर ऊंचाई पर एक प्लेटफार्म तैयार किया गया है। राख को चार माह बाद लैडफील किया जाएगा। 

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Indore: No trace of toxic UC waste has been erased, 337 tons of waste was burnt in four months
यहां दफनाई जाएगी जहरीले कचरे की राख। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल से लाए गए यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का इंदौर के समीप पीथमपुर में निपटान हो गया है। करीब चार माह में 337 टन कचरे को भस्मक में जलाया जा चुका है। अब जो राख बची है, उसे भी वैज्ञानिक विधि से दफनाया जाएगा।

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कचरे को जलाने के दौरान किसी भी तरह की हानिकारक गैसें तय मानकों से ज्यादा मात्रा में वातावरण में नहीं फैलीं। अब प्रदूषण विभाग इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करेगा। जहरीले कचरे को चूने के साथ जलाया गया।
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750 टन राख बची
337 टन कचरा जलाने के बाद 750 टन राख बची है। इसे विशेष बैग में भरा गया है। उसे लीक प्रफू स्टोरेज शेड में रखा गया है। उसके लिए जमीन से डेढ़ मीटर ऊंचाई पर एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। अभी बारिश का समय है। राख को चार माह बाद लैंडफील किया जाएगा। लैंडफील भी कंपनी परिसर में ही बनाया गया है। इस प्लांट में 10 साल पहले भी 10 टन कचरे को लैंडफील किया जा चुका है। उसके कारण तारापुर गांव के नाले और कुएं का पानी काला पड़ गया था।
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70 दिन का वक्त दिया था, 55 दिन में जलाया
भोपाल से पीथमपुर तक इसी साल 2 जनवरी को 12 कंटेनरों  में भरकर यह कचरा लाया गया था। 3 जनवरी को पीथमपुर में इसका भारी विरोध हुआ था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले 30 टन कचरा जलाने का ट्रायल रन करने को कहा था। 30 टन कचरा जलाने के बाद रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इसके बाद 5 मई से बचा 307 टन कचरा जलाने का काम शुरू किया गया। इसके लिए कोर्ट ने 70 दिन का समय दिया था, लेकिन 55 दिन में ही कंपनी ने जहरीले कचरे का नामो-निशान मिटा दिया। रामकी कंपनी को भोपाल की भयंकर गैस त्रासदी की जिम्मेदार यूनियन काबाईड के इस जहरीले कचरा के निपटान के लिए केंद्र सरकार ने 126 करोड़ रुपये दिए हैं।

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