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Indore News: तीन सौ करोड़ के BRTS का नामोनिशान मिटना शुरू, शिवाजी वाटिका वाले हिस्से में रेलिंग उखाड़े

Sat, 01 Nov 2025 04:23 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sat, 01 Nov 2025 04:23 PM IST
सार

अफसरों का कहना है कि पहले बाॅटलनेक वाले हिस्से में बस लेन के रेलिंग हटाए जाएंगे। इसके बाद नवलखा से भंवरकुआ के बीच और एलआईजी से विजय नगर के बीच की बस रेलिंग हटाई जाएगी। चार माह पहले सांकेतिक रुप से कुछ हिस्सों के रेलिंग हटाए गए थे। 

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Indore News: The 300 crore BRTS project has begun to disappear, with railings uprooted in the Shivaji Vatika a
इंदौर बीआरटीएस - फोटो : amar ujala

विस्तार

देश के पहले बीआरटीएस प्रोजेक्ट को आखिरकार तोड़ने का काम शुरू हो गया है। आने वाले तीन-चार माह में बीआरटीएस का नामोनिशान मिट जाएगा। शनिवार को शिवाजी वाटिका से इंदिरा प्रतिमा के बीच के हिस्से को जेसीबी से तोड़ा गया। साढ़े 11 किलोमीटर के बीआरटीएस को तोड़ने में चार माह का समय लगेगा।

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इसके लिए तीन करोड़ रुपये खर्च हो रहे है। बीआरटीएस तोड़ने की वजह नगर निगम ने चौराहों पर ब्रिज बनाने की बताई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद छह माह पहले इंदौर में इसे तोड़ने की घोषणा की थी। मामला कोर्ट में था। इस कारण नगर निगम ने कोर्ट में आवेदन दिया था।  यह लगभग 11.47 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर था, जो निरंजनपुर से राजीव गांधी चौराहा तक बना था।

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अफसरों का कहना है कि पहले बाॅटलनेक वाले हिस्से में बस लेन के रेलिंग हटाए जाएंगे। इसके बाद नवलखा से भंवरकुआ के बीच और एलआईजी से विजय नगर के बीच की बस रेलिंग हटाई जाएगी। चार माह पहले सांकेतिक रुप से कुछ हिस्सों के रेलिंग हटाए गए थे। बाद में बीआरटीएस तोड़ने का काम ठेके पर दिया गया।

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70 हजार से ज्यादा यात्री करते थे सफर

इंदौर की आई बस लेन में 50 से ज्यादा बसों का संचालन दिनभर होता था। इनके लिए विशेष बस स्टेशन बनाए गए थे। दिनभर में 70 हजार से ज्यादा यात्री बस में सफर करते है। इनमें ज्यादा विद्यार्थी होते है, लेकिन अब यह बसें मिक्स ट्रैफिक में चलेगी। बसों के लिए अलग से बस लेन होने के कारण 11 किलोमीटर का सफर 30 मिनट में हो जाता था। यह इंदौर का पहला बीआरटीएस प्रोजेक्ट था।




इसके बाद अहमदाबाद, दिल्ली, पुणे, भोपाल में भी प्रोजेक्ट केंद्र सरकार ने स्वीकृत किए। इंदौर के इस प्रोजेक्ट को काफी सराहा भी गया था। बीआरटीएस बनाने में 300 से ज्यादा निर्माण तोड़े गए थे और दो हजार से ज्यादा पेड़ों को काटा गया। बस लेन हटने के बाद डिवाइडर बनाए जाएंगे। सात चौराहों पर आने वाले वर्षों में ब्रिज भी बनाए जाएंगे। इसके लिए सर्वे भी हो चुका है।

 

 

 

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