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Indore News: ताई के पत्र ने दिखा दिए तेवर, तुरंत आए महापौर, बोले आपके मार्गदर्शन में ही कर रहे काम
Tue, 06 May 2025 08:29 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 06 May 2025 08:29 PM IST
सार
Indore News: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा महापौर पुष्यमित्र भार्गव को भेजे गए पत्र के बाद शहर की राजनीति में हलचल मच गई है। ताई ने मेट्रो रूट और 'भारत वन' परियोजना पर सलाह दी।
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पत्र और ताई महापौर की मुलाकात
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) के पत्र के बाद मंगलवार को इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव उनसे मिलने उनके निवास पहुंचे। ताई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह चिट्ठी बहुत सहज भाव से लिखी थी और इसमें किसी तरह की कटुता नहीं थी। बैठक के दौरान दोनों के बीच 'भारत वन' परियोजना और शहर के अन्य विकास संबंधी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। महापौर भार्गव ने ताई को आश्वस्त किया कि वे उन्हीं के मार्गदर्शन में कार्य कर रहे हैं और मेट्रो परियोजना को लेकर ताई के सुझावों का पालन किया जा रहा है।
ताई के पत्र के बाद हुई मुलाकात की पृष्ठभूमि
सोमवार को सुमित्रा महाजन ने महापौर को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे शहर के विकास पर चर्चा करना चाहती हैं। उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि यदि महापौर के पास समय नहीं हो, तो वे स्वयं मिलने आ जाएंगी। ताई ने विशेष रूप से 'भारत वन' परियोजना पर चर्चा कर निर्णय लेने की बात कही थी। उन्होंने लिखा कि पेड़ लगाना और वन बनाना सराहनीय है, लेकिन इस विषय पर पर्यावरण विशेषज्ञों और अनुभवी नागरिकों की राय लेकर ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।
मेट्रो परियोजना को लेकर पहले भी दे चुकीं हैं सुझाव
ताई इससे पहले भी मेट्रो प्रोजेक्ट के संदर्भ में कई बार अपने विचार जाहिर कर चुकी हैं। पिछले महीने उन्होंने महापौर को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि एमजी रोड के बजाय सुभाष मार्ग से अंडरग्राउंड मेट्रो रूट निकाला जाए। उनका तर्क था कि एमजी रोड पर घनी आबादी और पुरातत्व महत्व की इमारतें हैं, जिन्हें नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया था कि मेट्रो रूट को पत्रकार कॉलोनी, पलासिया, 56 दुकान, रेसकोर्स रोड, राजकुमार ब्रिज होते हुए वीआईपी रोड और एरोड्रम तक ले जाया जा सकता है।
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राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में ताई के पत्र की चर्चा
तीन साल पहले भी सुमित्रा महाजन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर राजवाड़ा के पास प्रस्तावित भूमिगत स्टेशन पर आपत्ति जताई थी। इसके चलते स्टेशन को सदरबाजार स्थित पुराने एसपी कार्यालय की ओर स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में जब मेट्रो के भूमिगत रूट को लेकर फिर से सियासी हलचल है, ताई का यह पत्र एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे यह साफ होता है कि आज भी शहर की बड़ी योजनाओं में वरिष्ठ नेताओं और विशेषज्ञों की सलाह की अनदेखी की जा रही है।
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ताई के पत्र के बाद हुई मुलाकात की पृष्ठभूमि
सोमवार को सुमित्रा महाजन ने महापौर को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे शहर के विकास पर चर्चा करना चाहती हैं। उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि यदि महापौर के पास समय नहीं हो, तो वे स्वयं मिलने आ जाएंगी। ताई ने विशेष रूप से 'भारत वन' परियोजना पर चर्चा कर निर्णय लेने की बात कही थी। उन्होंने लिखा कि पेड़ लगाना और वन बनाना सराहनीय है, लेकिन इस विषय पर पर्यावरण विशेषज्ञों और अनुभवी नागरिकों की राय लेकर ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।
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मेट्रो परियोजना को लेकर पहले भी दे चुकीं हैं सुझाव
ताई इससे पहले भी मेट्रो प्रोजेक्ट के संदर्भ में कई बार अपने विचार जाहिर कर चुकी हैं। पिछले महीने उन्होंने महापौर को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि एमजी रोड के बजाय सुभाष मार्ग से अंडरग्राउंड मेट्रो रूट निकाला जाए। उनका तर्क था कि एमजी रोड पर घनी आबादी और पुरातत्व महत्व की इमारतें हैं, जिन्हें नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया था कि मेट्रो रूट को पत्रकार कॉलोनी, पलासिया, 56 दुकान, रेसकोर्स रोड, राजकुमार ब्रिज होते हुए वीआईपी रोड और एरोड्रम तक ले जाया जा सकता है।
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राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में ताई के पत्र की चर्चा
तीन साल पहले भी सुमित्रा महाजन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर राजवाड़ा के पास प्रस्तावित भूमिगत स्टेशन पर आपत्ति जताई थी। इसके चलते स्टेशन को सदरबाजार स्थित पुराने एसपी कार्यालय की ओर स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में जब मेट्रो के भूमिगत रूट को लेकर फिर से सियासी हलचल है, ताई का यह पत्र एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे यह साफ होता है कि आज भी शहर की बड़ी योजनाओं में वरिष्ठ नेताओं और विशेषज्ञों की सलाह की अनदेखी की जा रही है।
