Indore News: इंदौर में घर घर टैक्स सर्वे पर गरमाई राजनीति, मेयर बोले- जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया
रेसीडेंसी कोठी पर आयोजित बैठक में शामिल जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अफसरों को कामों को लेकर मनमानी नहीं करना चाहिए। उन्हें अभियान शुरू करने से पहले उसकी जानकारी क्षेत्रीय पार्षद व विधायक को देना चाहिए थी। उनका सहयोग भी लिया जाना चाहिए था।
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इंदौर में टैक्स सर्वे को लेकर हुए विवाद के बाद राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस इस मामले में मुखर हो गई है। मामले का पटाक्षेप करने के लिए रेसीडेंसी कोठी पर मंत्रियों की बैठक भी हुई। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने इसे लेकर कहा कि टैक्स को लेकर सर्वे होना चाहिए, लेकिन तरीका ठीक नहीं था। अफसरों को जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर सर्वे करना चाहिए था। यह उन्होंने नहीं किया। उन्होंने कहा कि मेरे रहते अराजकता नहीं होगी।
उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि दिलीप यादव जब से इंदौर के नगर निगम आयुक्त बने है। बीजेपी पार्षद ही सबसे ज्यादा विरोध कर रहे है। कमीशन, भ्रष्टाचार के लिए बदनाम नगर निगम यदि वसूली के लिए नागरिकों को प्रताडि़त करेगा तो विरोध जायज है। उधर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने कहा कि जिन इलाके में सबसे ज्यादा होस्टल होटल है। वहां यदि सर्वे कर टैक्स का पता लगाजा जा रहा है तो इसमें भाजपा पार्षद इतना विरोध क्यों कर रहे है। टैक्स को लेकर शहर में समानता होना चाहिए।
बैठक में तय हुआ, अफसरों को बता कर चलाए अभियान
रेसीडेंसी कोठी पर आयोजित बैठक में शामिल जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अफसरों को कामों को लेकर मनमानी नहीं करना चाहिए। उन्हें अभियान शुरू करने से पहले उसकी जानकारी क्षेत्रीय पार्षद व विधायक को देना चाहिए थी। उनका सहयोग भी लिया जाना चाहिए था।
पहले भी हो चुके है जनप्रतिनिधि- अफसर आमने सामने
इंदौर के गणेशगंज में एक रहवासी ने नगर निगम के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई थी तो नाराज अफसरों ने रहवासी के नक्शे की जांच शुरू कर दी थी। मौके पर पहुंच कर मकान मालिक को नोटिस भी थमा दिया था। यह मुद्दा भी खूब उछला था और खुद मेयर को रहवासी के घर जाकर खेद प्रकट करना पड़ा था। इसके बाद अफसरों के खिलाफ एक्शन भी हुआ था। कृष्णमुरारी मोघे के कार्यकाल में भी व्यापारिक लाइसेंस फीस को लेकर खूब विरोध हुआ था और निगम को फैसला वापस लेना पड़ा था।
