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Indore News: कम बारिश और वाटर हार्वेस्टिंग में लेटलतीफी पड़ेगी भारी, भूजल स्तर की भरपाई दिख रही मुश्किल
Tue, 11 Aug 2026 06:10 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 11 Aug 2026 06:10 PM IST
सार
Indore News: इस साल इंदौर में बारिश कम हुई है और भूजल स्तर के सुधरने की उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले 15 हजार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम पूरा होने में भी अभी समय बाकि है।
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इंदौर शहर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर में इस साल कम बारिश की वजह चिंता बढ़ती जा रही है। इस साल मार्च से लेकर जून तक शहर के अधिकांश बोरिंग सूख गए थे और कई जगह पानी की किल्लत की वजह से जनता को सड़कों पर प्रदर्शन के लिए उतरना पड़ा। उम्मीद थी कि अच्छी बारिश से भूजल स्तर सुधर जाएगा और बोरिंग चालू हो जाएंगे लेकिन कम बारिश ने अब इस परेशानी को दोगुना कर दिया है। अभी भी शहर के कई क्षेत्रों में बोरिंग में पानी नहीं आ रहा है। इन सबके बीच नगर निगम ने कहा था कि जुलाई तक शहर के 15 हजार से अधिक घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया जाएगा ताकि भूजल स्तर में सुधार हो लेकिन वह कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। अभी तक 10 से 12 हजार घरों में ही इसकी व्यवस्था हो पाई है। हालांकि नगर निगम की टीम लगातार प्रयास कर रही है कि अधिक से अधिक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इन्हें लगवाया जा सके लेकिन इस कार्य में बहुत समय लगता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि, इंदौर में वर्ष 2012 में भूमिगत जल स्तर 150 मीटर पर था, जो वर्ष 2023 तक गिरकर 160 मीटर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा अंचल के लिए जल स्तर का यह आंकड़ा अत्यंत चिंताजनक है।
बह जाता है बारिश का पानी
शहर में बारिश का अधिकांश पानी ड्रेनेज, नालों और सड़कों के माध्यम से बहकर बेकार चला जाता है। यदि इस पानी को छतों से सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जाए, तो भीषण गर्मी के दौरान भी बोरिंग सूखने की समस्या नहीं होगी। भूजल विशेषज्ञों के वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, यदि शहर के 15000 भवनों (प्रत्येक 2000 स्क्वायर फीट छत का क्षेत्रफल) से वर्षा जल को भूमिगत किया जाए, तो केवल 4 इंच (100 मिमी) वर्षा में ही लगभग 24.06 करोड़ लीटर यानी 2.41 लाख घनमीटर जल संरक्षित किया जा सकता है। इससे सबसे पहले उथले एक्विफर (Aquifer-1) का जल स्तर मजबूत होगा और निरंतर रीचार्ज होने पर इसका सीधा लाभ गहरे एक्विफर तक पहुंचेगा, जिससे ग्रीष्मकाल में जल संकट से बड़ी राहत मिलेगी।
वर्षा चक्र पर निर्भर है इंदौर का भूजल
केन्द्रीय भूजल बोर्ड की विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर शहर डेक्कन ट्रैप बेसाल्ट चट्टानी क्षेत्र में बसा हुआ है। इस प्रकार की भौगोलिक संरचना के कारण भूजल का संचयन केवल चट्टानों की दरारों और वेदरिंग जोन में सीमित मात्रा में ही संभव होता है। इसी वजह से शहर की जल उपलब्धता लगभग पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मानसून पूर्व शहर का औसतन भूजल स्तर 12.35 मीटर दर्ज किया गया था, जो मानसून की बारिश के बाद सुधरकर 6.67 मीटर पर आ गया। इस प्रकार केवल 1 मानसून में भूजल स्तर में औसतन 5.7 मीटर का बड़ा सुधार देखा गया। यह आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि यदि बारिश के पानी को व्यवस्थित तरीके से जमीन के भीतर पहुंचाया जाए, तो भूजल स्तर में तेजी से सुधार संभव है।
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रखरखाव के अभाव में खराब हो गए रिचार्ज पिट
इससे पूर्व भी शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तथा रिचार्ज पिट बनाने का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। इसके बावजूद उचित देखभाल, नियमित रखरखाव और सतत निगरानी के अभाव में इनमें से अधिकांश संरचनाएं कुछ ही वर्षों के भीतर पूरी तरह निष्प्रभावी हो गईं। इस अव्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रभाव इस वर्ष की गर्मी में देखने को मिला, जब कई क्षेत्रों के बोरवेल पूरी तरह सूख गए और नागरिकों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ा। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों को पूरी कार्यक्षमता के साथ संचालित रखा जाए, तो हर अच्छी बारिश इंदौर के भूजल को बढ़ाने का स्वर्णिम अवसर बन सकती है।
15 प्रतिशत जल बहने पर भी बड़ा फायदा
भूजल वैज्ञानिक डॉ. सुधींद्र मोहन शर्मा बताते हैं कि यदि इंदौर के 15 हजार भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग उपकरण क्रियाशील हों और प्रत्येक भवन का औसतन छत क्षेत्रफल दो हजार वर्गफीट माना जाए, तो 4 इंच की बारिश में एक ही छत पर लगभग 18870 लीटर पानी गिरता है। यदि इस कुल जलराशि में से 15 प्रतिशत पानी बह भी जाए और केवल 85 प्रतिशत हिस्सा ही जमीन में रीचार्ज हो, तो भी प्रति भवन लगभग 16000 लीटर पानी जमीन के अंदर पहुंचेगा। इस गणना के अनुसार, 15,000 भवनों के माध्यम से मात्र 1 बारिश में 24.06 करोड़ लीटर यानी 2.41 लाख घनमीटर पानी सीधे भूजल भंडार में जमा किया जा सकता है।
बड़े प्रतिष्ठानों को दिए नोटिस
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार इंदौर में जल स्तर में लगातार सुधार लाने के उद्देश्य से नगर निगम ने बड़े पैमाने पर वॉटर रीचार्ज सिस्टम लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। नगर निगम प्रशासन लगातार बारिश के पानी को संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है और नागरिकों से अपने मकानों में वॉटर रीचार्ज सिस्टम स्थापित करने का आग्रह कर रहा है। इसके अतिरिक्त, शहर के सभी बड़े शैक्षणिक केंद्रों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में वॉटर रीचार्ज सिस्टम लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। कई प्रतिष्ठानों को समय सीमा में कार्य न करने पर नोटिस भी दिए गए हैं।
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बह जाता है बारिश का पानी
शहर में बारिश का अधिकांश पानी ड्रेनेज, नालों और सड़कों के माध्यम से बहकर बेकार चला जाता है। यदि इस पानी को छतों से सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जाए, तो भीषण गर्मी के दौरान भी बोरिंग सूखने की समस्या नहीं होगी। भूजल विशेषज्ञों के वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, यदि शहर के 15000 भवनों (प्रत्येक 2000 स्क्वायर फीट छत का क्षेत्रफल) से वर्षा जल को भूमिगत किया जाए, तो केवल 4 इंच (100 मिमी) वर्षा में ही लगभग 24.06 करोड़ लीटर यानी 2.41 लाख घनमीटर जल संरक्षित किया जा सकता है। इससे सबसे पहले उथले एक्विफर (Aquifer-1) का जल स्तर मजबूत होगा और निरंतर रीचार्ज होने पर इसका सीधा लाभ गहरे एक्विफर तक पहुंचेगा, जिससे ग्रीष्मकाल में जल संकट से बड़ी राहत मिलेगी।
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वर्षा चक्र पर निर्भर है इंदौर का भूजल
केन्द्रीय भूजल बोर्ड की विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर शहर डेक्कन ट्रैप बेसाल्ट चट्टानी क्षेत्र में बसा हुआ है। इस प्रकार की भौगोलिक संरचना के कारण भूजल का संचयन केवल चट्टानों की दरारों और वेदरिंग जोन में सीमित मात्रा में ही संभव होता है। इसी वजह से शहर की जल उपलब्धता लगभग पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मानसून पूर्व शहर का औसतन भूजल स्तर 12.35 मीटर दर्ज किया गया था, जो मानसून की बारिश के बाद सुधरकर 6.67 मीटर पर आ गया। इस प्रकार केवल 1 मानसून में भूजल स्तर में औसतन 5.7 मीटर का बड़ा सुधार देखा गया। यह आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि यदि बारिश के पानी को व्यवस्थित तरीके से जमीन के भीतर पहुंचाया जाए, तो भूजल स्तर में तेजी से सुधार संभव है।
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रखरखाव के अभाव में खराब हो गए रिचार्ज पिट
इससे पूर्व भी शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तथा रिचार्ज पिट बनाने का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। इसके बावजूद उचित देखभाल, नियमित रखरखाव और सतत निगरानी के अभाव में इनमें से अधिकांश संरचनाएं कुछ ही वर्षों के भीतर पूरी तरह निष्प्रभावी हो गईं। इस अव्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रभाव इस वर्ष की गर्मी में देखने को मिला, जब कई क्षेत्रों के बोरवेल पूरी तरह सूख गए और नागरिकों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ा। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों को पूरी कार्यक्षमता के साथ संचालित रखा जाए, तो हर अच्छी बारिश इंदौर के भूजल को बढ़ाने का स्वर्णिम अवसर बन सकती है।
15 प्रतिशत जल बहने पर भी बड़ा फायदा
भूजल वैज्ञानिक डॉ. सुधींद्र मोहन शर्मा बताते हैं कि यदि इंदौर के 15 हजार भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग उपकरण क्रियाशील हों और प्रत्येक भवन का औसतन छत क्षेत्रफल दो हजार वर्गफीट माना जाए, तो 4 इंच की बारिश में एक ही छत पर लगभग 18870 लीटर पानी गिरता है। यदि इस कुल जलराशि में से 15 प्रतिशत पानी बह भी जाए और केवल 85 प्रतिशत हिस्सा ही जमीन में रीचार्ज हो, तो भी प्रति भवन लगभग 16000 लीटर पानी जमीन के अंदर पहुंचेगा। इस गणना के अनुसार, 15,000 भवनों के माध्यम से मात्र 1 बारिश में 24.06 करोड़ लीटर यानी 2.41 लाख घनमीटर पानी सीधे भूजल भंडार में जमा किया जा सकता है।
बड़े प्रतिष्ठानों को दिए नोटिस
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार इंदौर में जल स्तर में लगातार सुधार लाने के उद्देश्य से नगर निगम ने बड़े पैमाने पर वॉटर रीचार्ज सिस्टम लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। नगर निगम प्रशासन लगातार बारिश के पानी को संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है और नागरिकों से अपने मकानों में वॉटर रीचार्ज सिस्टम स्थापित करने का आग्रह कर रहा है। इसके अतिरिक्त, शहर के सभी बड़े शैक्षणिक केंद्रों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में वॉटर रीचार्ज सिस्टम लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। कई प्रतिष्ठानों को समय सीमा में कार्य न करने पर नोटिस भी दिए गए हैं।
