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Indore Law College: सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर बेग को अग्रिम जमानत दी, राज्य सरकार से जवाब मांगा

Sat, 04 Feb 2023 12:05 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 04 Feb 2023 12:05 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में इंदौर लॉ कॉलेज मामले में सहायक प्रोफेसर डॉ मिर्जा मोजिज बेग को अग्रिम जमानत दे दी है। मामले में अदालत ने तीन सप्ताह के भीतर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
 

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Indore Law College Supreme Court grants anticipatory bail to Professor Baig seeks response from state governme
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में सहायक प्रोफेसर डॉ मिर्जा मोजिज बेग को कथित रूप से बढ़ावा देने के लिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में अग्रिम जमानत दे दी है। पुस्तकालय में एक कथित 'हिंदूफोबिक' किताब मिलने के बाद ये मामला बढ़ गया था। जस्टिस एएस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने डॉ बेग की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर मध्यप्रदेश राज्य को नोटिस जारी किया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने तीन सप्ताह के भीतर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, नोटिस जारी करें। इस बीच, याचिकाकर्ता के खिलाफ अंतरिम संरक्षण होगा, यदि आवश्यक हो तो वह पूरी लगन से जांच में भाग ले सकता है। डॉ. बेग के वकील एडवोकेट अल्जो के जोसेफ ने पीठ को बताया कि किताब खुद पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है। आश्चर्यजनक रूप से यह एलएलएम पाठ्यक्रम में है, जिसे अकादमिक परिषद और चांसलर विश्वविद्यालय की ओर से अनुमोदित किया गया है।
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डॉ बेग ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें अग्रिम जमानत के लिए उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है। यह कहते हुए कि पुस्तक को साल 2014 में कॉलेज में खरीदा गया था। इससे पहले कि वह अनुबंध के आधार पर कॉलेज में शामिल हुए या जब वह संकाय के स्थाई सदस्य के रूप में लगे थे।
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स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाई जाती है किताब...
उन्होंने अपनी दलील में कहा कि यह पुस्तक 18 से अधिक साल से मास्टर पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है और मध्यप्रदेश राज्य में आपराधिक कानून में विशेषज्ञता रखने वाले सभी स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाया जाता है। डॉ. बेग ने तर्क दिया, अकादमिक स्वतंत्रता और 2014 में किसी के द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक प्राथमिकी का आधार नहीं हो सकती है। जब याचिकाकर्ता के पास पुस्तक का कोई संबंध या दूरस्थ ज्ञान नहीं है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में इसी मामले में इंदौर के राजकीय न्यू लॉ कॉलेज के प्राचार्य और प्रोफेसर डॉ इनामुर रहमान को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था।

भवरकुआं पुलिस ने डॉ. बेग और डॉ. फरहत खान पर सामूहिक हिंसा और आपराधिक न्याय प्रणाली पुस्तक के लेखक और इसके प्रकाशक के साथ दो दिसंबर 2022 को कथित आपत्तिजनक सामग्री की शिकायत के आधार पर डॉ. रहमान के साथ मामला दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया है कि डॉ. फरहत खान की ओर से लिखित और अमर लॉ पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित 'सामूहिक हिंसा और आपराधिक न्याय प्रणाली' नामक पुस्तक की सामग्री झूठे और निराधार तथ्यों पर आधारित है, जो राष्ट्र-विरोधी है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचाना है।

परिसर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद डॉ रहमान, डॉ बेग और तीन अन्य को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। डॉ रहमान को प्राचार्य पद से इस्तीफा देना पड़ा। डॉ. रहमान और डॉ. बेग को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था और मामले में शामिल तीन अन्य संकाय सदस्यों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं। इससे पहले, जब मध्यप्रदेश सरकार के वकील ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि राज्य उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देना चाहता है, तो मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने आश्चर्य व्यक्त किया था।


CJI ने तब राज्य के वकील से कहा था, राज्य को कुछ और गंभीर चीजें करनी चाहिए। वह एक कॉलेज प्रिंसिपल हैं। आप उन्हें गिरफ्तार क्यों कर रहे हैं? पुस्तकालय में एक किताब मिली है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसमें कुछ सांप्रदायिक संकेत हैं। इसलिए उनसे पूछताछ की गई है। किताब 2014 में खरीदी गई थी, क्या आप गंभीर हैं? 

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