Indore: भारतीय इंजीनियरों ने बढ़ाई मिग-21 विमान की उम्र, 62 साल बाद अब हो रहा सेवानिवृत
मसंद बताते है कि मिग-21 विमान में समय-समय पर बदलाव किए गए। एक विमान को अपग्रेड करने में ढाई मिलियन डाॅलर से ज्यादा खर्च किए गए। इस राशि में हथियार खरीद कर उसमें लगाए भी गए। कई बार इस विमान ने दुश्मनों को लोहे के चने चबवाए।
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कारगिल युद्ध और बालकोट हमले में देश के दुश्मनों के हौसले पस्त करने वाला मिग-21 विमान 26 सितंबर से विदा होने वाला है। भारतीय सेना का शेर कहे जाने वाले इस विमान की विदाई चंडीगढ़ स्टेशन पर फ्लाईपास्ट के साथ होगी। अब यह विमान भारतीय सेना के बेड़े में शामिल नहीं रहेगा। शुक्रवार के बाद यह इतिहास में तब्दील हो जाएगा, लेकिन इससे जुड़े किस्से हमेशा जिंदा रहेंगे। 62 साल की सेवाएं देने के बाद मिग-21 अब ‘सेवानिवृत’ होने जा रहा है।
महू निवासी भारतीय सेना के पूर्व एयर मार्शल हरीश मसंद करते हैं कि मिग-21 विमान जब भारतीय सेना में शामिल हुआ था तो समय-समय पर उसकी कार्यक्षमता सेना के इंजीनियरों द्वारा बढ़ाई गई। यह लडाकू विमान 2400 घंटे की उड़ान और 40 वर्ष की अवधि के हिसाब से डिजाइन हुआ था, लेकिन हमारे इंजीनियरों के कारण इस विमान ने चार हजार घंटे की उड़ान भरी।
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इसकी उम्र भी 20 साल और बढ़ी। जब यह विमान खरीदे गए तो उसमें कुछ कमियां थीं। उसमें मिसाइल तो थी, लेकिन गन नहीं थी। हमारे इंजीनियरों ने गोंडेला गन उसमें लगाई। उसके वार भी ज्यादा स्पष्ट और अचूक बनाए।
समय-समय पर किए बदलाव
मसंद बताते है कि विमानों को अपग्रेड करने में कई मिलियन डाॅलर से ज्यादा खर्च हुए। इस राशि में हथियार खरीद कर उसमें लगाए भी गए। इस लागत ने विमान की उम्र भी बढ़ा दी। कई बार इस विमान ने दुश्मनों को लोहे के चने चबवाए। भारतीय इंजीनियरों के कारण कम लागत में ये विमान ज्यादा उपयोगी बने।
