फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Dhar Bhojshala hearing - Petitioner said that ASI's survey report also provides evidence of the existe

Indore: धार भोजशाला सुनवाई-याचिकाकर्ता ने कहा कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में भी मंदिर होने के प्रमाण

Fri, 10 Apr 2026 07:07 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Fri, 10 Apr 2026 07:07 AM IST
सार

धार की भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें हिंदू पक्ष ने अपने तर्क पूरे करते हुए एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इसे मंदिर होने का दावा दोहराया। अब मामले में अन्य पक्ष शुक्रवार को अपनी दलीलें पेश करेंगे।

विज्ञापन
Indore: Dhar Bhojshala hearing - Petitioner said that ASI's survey report also provides evidence of the existe
धार भोजशाला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार की भोजशाला मामले में गुरुवार को हिंदू पक्ष की सुनवाई पूरी हुई। अब अन्य पक्षों को अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर शुक्रवार को मिलेगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट में भी मंदिर होने के प्रमाण मिलते हैं। भोजशाला में पूजा का पूर्ण अधिकार हिंदू समाज को दिया जाना चाहिए।

विज्ञापन

 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई द्वारा 98 दिनों तक किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट पर विशेष जोर दिया। कोर्ट को बताया गया कि लगभग 2100 पृष्ठों की यह रिपोर्ट वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन पर आधारित है, जिसे कोर्ट के निर्देश पर तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट में स्मारक के मंदिर होने के कई प्रमाण और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।

विज्ञापन

 

वकील ने यह भी बताया कि वर्ष 1904 में लॉर्ड कर्जन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी इस स्थल के मंदिर होने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।कोर्ट के समक्ष राम जन्मभूमि निर्णय के पैराग्राफ 675 से 679 का हवाला देते हुए कहा गया कि एएसआई की रिपोर्ट को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के रूप में विधिक मान्यता दी जानी चाहिए। धार भोजशाला में जीपीएस, जीपीआर और कार्बन डेटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से 50 मीटर की परिधि में, दोनों पक्षों की उपस्थिति में सर्वेक्षण किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

एएसआई की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यह स्मारक 11वीं–12वीं शताब्दी का परमार कालीन संरचना है। यह भी कहा गया कि मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर इसे मस्जिद में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया। संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेखों को मिटाकर पुनर्निर्माण में उपयोग किया गया, तथा मनुष्य और पशुओं की आकृतियों को भी नष्ट कर दिया गया, जबकि ऐसी आकृतियाँ मस्जिदों में नहीं पाई जातीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed