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Indore:जलवायु परिवर्तन का असर आमों की मिठास पर, रंग और स्वाद हुआ फीका

Sat, 09 May 2026 06:53 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Sat, 09 May 2026 06:53 PM IST
सार

इंदौर के ढक्कनवाला कुआं क्षेत्र में इस बार कोकर्ण के मशहूर हापूस आमों का आनंद लेने के लिए लोग पहुंचे हैं। जलवायु परिवर्तन के असर के बावजूद, कोकर्ण के तटों से आए किसान अपने ताजे और पारंपरिक तरीकों से पके आमों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

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Indore: Climate change has affected the sweetness of mangoes, their colour and taste have faded.
मेंगों जत्रा में हापूस आमों का लुत्फ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के ढक्कनवाला कुआं क्षेत्र में लगे मैंगों जत्रा में लोग कोकर्ण के मशहूर हापूस आमों का लुफ्त उठाने आ रहे हैं। कोकर्ण के तटों की मिट्टी में पके आमों को लेकर 25 किसान बीते दिनों से इंदौर में हैं। जलवायु परिवर्तन का असर इस बार देश के कई शहरों में आमों के उत्पादन पर पड़ा है। इस बार आमों की मिठास कम है और रंग भी फीका है। हापूस आम भी जलवायु परिवर्तन से अछूता नहीं रहा।

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कोकर्ण के किसान महेश सुरवे ने बताया कि इस साल में बारिश कोकर्ण के तटों पर ज्यादा हुई। इस कारण आम का उत्पादन कम हुआ। आमों के लिए जैसी गर्मी चाहिए थी ताकि वे प्राकृतिक तरीके से पक सकें, वो भी नहीं पड़ी।


बारिश के कारण पेड़ों पर आम के मोर झड़ गए। इस कारण आम कम आए। इसका असर मार्केट पर भी है। हापूस आमों की कीमत पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। दो साल पहले भी इसी तरह की स्थिति बनी थी। किसान प्रसन्न पाटले बताते हैं कि मौसम का असर हापूस आम पर पड़ता है। पिछले साल छह माह तक बारिश थी। इस बार 60 प्रतिशत फसल कम है। हापूस आम 800 रुपये से 1,500 रुपये दर्जन होते हैं। बारिश पेड़ों पर आई बहार को खत्म कर देती है।

रसायन से पका आम
किसानों ने बताया कि कार्बाइड और केमिकल से पका आम बाहर से पूरा पीला दिखता है, लेकिन अंदर से खट्टा रहता है। उसका छिलका भी मोटा रहता है, जबकि परंपरागत तरीके से पकाया गया आम ऊपर से भले ही थोड़ा कच्चा दिखे, लेकिन भीतर से मीठा और पीला रहता है।
 

गुठली लेगा हार्टिकल्चर विभाग
मैंगों जत्रा के आयोजक राजेश शाह ने बताया कि जत्रा में जो आम लोग खरीदकर खा रहे हैं, उसकी गुठलियां भी संभाल कर रखी जा रही हैं, क्योंकि यह ऑरिजनल हापूस है। उस गुठली को हार्टिकल्चर विभाग संभाल कर रहा है और उससे रोपे तैयार किए जा रहे हैं।

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