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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Independence Day Special: When Sardar Patel Upset with Maharaja Yashwantrao Holkar of Indore

स्वतंत्रता दिवस विशेष: आजादी के पूर्व इंदौर के महाराजा होल्कर से नाराज हो गए थे सरदार पटेल, क्या थी इसकी वजह?

Thu, 14 Aug 2025 12:49 PM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:49 PM IST
सार

Independence Day Special: आजादी के बाद रियासतों के विलय की जिम्मेदारी सरदार पटेल पर थी। इस दौरान इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर से मतभेद हो गए और पटेल उनसे नाराज हो गए थे। यह घटना स्वतंत्र भारत के गठन में इंदौर की अहम भूमिका को दर्शाती है।

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Independence Day Special: When Sardar Patel Upset with Maharaja Yashwantrao Holkar of Indore
महाराजा यशवंतराव होल्कर और सरदार पटेल के बीच क्या मतभेद थे? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Independence Day: पंद्रह अगस्त को हम देश की आजादी की 78 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। आज से 78 वर्ष पूर्व इंदौर में होल्कर रियासत थी। उस वक्त इंदौर रियासत के प्रमुख यशवंत राव होल्कर द्वितीय थे। आजादी के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में विलय का जिम्मा तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को सौंपा गया था। इंदौर रियासत को भी भारतीय संघ में शामिल करना था, इसे लेकर सरदार पटेल और यशवंतराव होल्कर के बीच मतभेद उभर आए थे। इतना ही नहीं सरदार पटेल इंदौर के महाराजा से नाराज भी हो गए थे। 

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दरअसल, अंग्रेजों ने दूसरे विश्व युद्ध और भारत छोड़ो आंदोलन के व्यापक असर के कारण भारत को आजाद करने का मन बना लिया था। भारत की आजादी के साथ ही देशी रियासतों के भारतीय संघ में विलय की प्रक्रिया आरंभ हो गई थी। सरदार पटेल को रियासतों के विलीनीकरण का दायित्व सौंपा गया था। कई रियासतों को विलय में आपत्ति थी। अप्रैल 1948 को मध्यभारत राज्य बनाए जाने के लिए राजाओं ने केंद्र के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए और मई 1948 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने मध्यभारत राज्य के गठन का एलान किया था।

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यशवंतराव के तौर तरीकों से खुश नहीं थे पटेल
देशी रियासतों के भारत में विलीनीकरण को लेकर इंदौर राज्य में जो घटित हो रहा था उससे और मध्य भारत संघ के गठन को लेकर महाराजा यशवंत राव होल्कर के तौर-तरीकों से सरदार पटेल खुश नहीं थे। इस कारण 9 जनवरी 1948 को होल्कर राज्य के प्रधानमंत्री एम. बी. भिड़े को केंद्र सरकार के तत्कालीन सचिव वी.पी. मेनन ने एक पत्र लिखा था। उसमें मेनन ने उल्लेख किया था कि सरदार पटेल दिसंबर 1947 के पत्र का होल्कर सरकार द्वारा जवाब नहीं देने को उचित नहीं मानते हैं और आपको (यशवंत राव होल्कर को) यह साफ कर देना चाहते हैं कि सरदार पटेल महाराजा होल्कर के साथ कोई भी बातचीत नहीं करेंगे। बता दें, देशी रियासतों के विलय में सरदार पटेल के साथ ही वी. पी. मेनन की भी अहम भूमिका रही थी। 

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सिरेमल बापना ने सरदार पटेल को लिखा पत्र 
सरदार पटेल की यशवंतराव होल्कर से नाराजगी सामने आने के बाद इंदौर राज्य के तत्कालीन प्रधानमंत्री सिरेमल बापना, जो कि स्वास्थ ठीक नहीं होने की वजह से राजस्थान के उदयपुर में परिवार के साथ रह रहे थे, ने 10 जनवरी 1948 को सरदार पटेल को निजी पत्र लिखा था। बापना ने पत्र में  उल्लेख किया था कि इंदौर राज्य में मैंने 32 वर्ष कार्य किया है। इंदौर को लेकर में चिंतित हूं, इंदौर के महाराजा राजनीतिक दृष्टि से रोष के शिकार हैं। कुछ सरकारी कार्यों की वजह से राज्य की प्रजा और उनमें गलतफहमी निर्मित हो गई है। हम स्थिति को सामान्य करने के उत्सुक हैं। बापना साहब के पत्र के जवाब में वी.पी.मेनन ने उल्लेख किया कि इंदौर के महाराजा से बीकानेर में हुए समझौते में वे सहमत थे, परंतु इंदौर पहुंच कर उन्होंने अपना विचार ही बदल दिया।

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यह थी यशवंत राव होल्कर और पटेल के बीच विवाद की वजह
ऐतिहासिक दस्तावेजों की पड़ताल से पता चलता है कि इंदौर रियासत के मंत्रिमंडल में नियुक्ति को लेकर महाराजा यशवंत राव होल्कर और सरदार पटेल में विवाद पैदा हो गया था। प्रधानमंत्री पद पर एम.बी.भिड़े की नियुक्ति से पटेल सहमत थे, लेकिन मंत्रिमंडल में एन.सी. मेहता की सेवाएं समझौते के अनुसार समाप्त होनी थीं, जो नहीं हुई थीं। विलय के बाद होल्कर राज्य से ढंढा, निडु, जनरल विलियम्स, मसूद अली खान और दो अमेरिकी अधिकारियों को पद से हटाना था, पर उन्हें नहीं हटाया गया था। मेहता को पद से नहीं हटाने को सरदार पटेल अपने आदेश का हनन मान रहे थे। सरदार पटेल का यह सोचना था कि विलय के बाद हुए समझौते के अनुसार परिवर्तन नहीं करना एक गंभीर त्रुटि है, इसीलिए वे यशवंत राव से नाराज हो गए थे। कुछ ऐतिहासिक पत्रों से पटेल की नाराजगी जाहिर होती है। हालांकि, बाद में इंदौर राज्य भी भारतीय संघ में शामिल हो गया था और उक्त विवाद सरलता से हल हो गया था।

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