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Indore: महाकाल लोक सुनवाई मेें याचिकाकर्ता ने कहा कि अफसरों का आपत्ति लेने का अधिकार नहीं
Fri, 23 Jun 2023 02:11 PM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Fri, 23 Jun 2023 02:11 PM IST
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jaipur serial blast case all accused acquitted Rajasthan High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
350करोड़ की लागत से बनेे महाकाल लोक की मूर्तियां खंडित होने के मामले में हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में सुनवाई शुरू हो गई है। याचिकाकर्ता केके मिश्रा ने सरकार द्वारा याचिका निरस्त करने की मांग पर आपत्ति ली है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन स्मार्ट सिटी सीईओ ने नगरीय प्रशासन विभाग प्रमुख सचिव, उज्जैन जिला कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और महाकाल थाना प्रभारी की तरफ से आपत्ति प्रस्तुत की लेकिन उन्हें इसके लिए किसी ने अधिकृत नहीं किया है। याचिका पर आपत्ति लेने का उनका अधिकार ही नहीं है। अब इस मामले में 14 जुलाई को कोर्ट बहस सुनेगी। हम आपको बता दे कि पिछली सुनवाई में सरकार की तरफ से याचिका को राजनीति से प्रेरित बताकर उसे निरस्त करने की मांग गई थी। सरकार की आपत्ति याचिकाकर्ता ने जवाब पेश किया हैै।
तेज हवा में टूट गई थी मूर्तियां
महाकाल लोक की छह मूर्तियां 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा के दौरान उड़ गई और जमीन पर गिरकर टूट गई थी। कांग्रेस ने महाकाल लोक में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच के लिए एक समिति को मौके पर भेजा था। इसके बाद कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी और कहा था कि निविदा शर्तों के अनुसार मूर्तियों को लगाने में लापरवाही बरती गई। निर्माण की गुणवत्ता अफसरों ने नहीं जांची। मूर्तियां भीतर से खोखली थी और वह हवा का दबाव नहीं सह पाई। मिश्रा ने कहा कि मूर्तियां खंडित होने से भक्तों की भावनाएं आहत हुई है। महाकाल लोक निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज से कराए जाने की मांग याचिकाकर्ता ने की है।
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उन्होंने कहा कि उज्जैन स्मार्ट सिटी सीईओ ने नगरीय प्रशासन विभाग प्रमुख सचिव, उज्जैन जिला कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और महाकाल थाना प्रभारी की तरफ से आपत्ति प्रस्तुत की लेकिन उन्हें इसके लिए किसी ने अधिकृत नहीं किया है। याचिका पर आपत्ति लेने का उनका अधिकार ही नहीं है। अब इस मामले में 14 जुलाई को कोर्ट बहस सुनेगी। हम आपको बता दे कि पिछली सुनवाई में सरकार की तरफ से याचिका को राजनीति से प्रेरित बताकर उसे निरस्त करने की मांग गई थी। सरकार की आपत्ति याचिकाकर्ता ने जवाब पेश किया हैै।
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तेज हवा में टूट गई थी मूर्तियां
महाकाल लोक की छह मूर्तियां 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा के दौरान उड़ गई और जमीन पर गिरकर टूट गई थी। कांग्रेस ने महाकाल लोक में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच के लिए एक समिति को मौके पर भेजा था। इसके बाद कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी और कहा था कि निविदा शर्तों के अनुसार मूर्तियों को लगाने में लापरवाही बरती गई। निर्माण की गुणवत्ता अफसरों ने नहीं जांची। मूर्तियां भीतर से खोखली थी और वह हवा का दबाव नहीं सह पाई। मिश्रा ने कहा कि मूर्तियां खंडित होने से भक्तों की भावनाएं आहत हुई है। महाकाल लोक निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज से कराए जाने की मांग याचिकाकर्ता ने की है।
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