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IIM INDORE: देश को बेहतर शिक्षा व्यवस्था देने के लिए एक मंच पर जुटाए शिक्षाविद् और उद्योग जगत के लीडर
Sun, 28 Jan 2024 10:07 AM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 28 Jan 2024 10:07 AM IST
सार
देशभर से आई प्रमुख हस्तियों ने मंच से अपने विचार साझा किए, पैनल डिस्कशन में शिक्षा व्यवस्था में कमियों और समाधान पर चर्चा की गई।
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पैनल डिस्कशन के मुख्य अतिथि।
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
आईआईएम इंदौर (iim indore) में 27 जनवरी को उद्योग जगत के लीडरों और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाली पैनल चर्चा मीमांसा का आयोजन हुआ। मानव संसाधन प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग और शिक्षा, दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक साथ आए। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीजीपीएचआरएम के चेयर प्रो. निशित सिन्हा भी उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन भाषण में प्रो. हिमांशु राय ने आधुनिक संगठनों के सामने आने वाली बहुमुखी चुनौतियों का वर्णन किया। इसमें टेक्नोलॉजी की समझ से लेकर कार्यबल विविधता और कर्मचारियों का संगठन से जुड़ाव तक शामिल थे। तकनीकी प्रगति को अपनाने के सर्वोपरि महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "असली चुनौती एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा कर्मचारियों के विस्थापन में नहीं है, बल्कि व्यक्तियों को उभरते परिदृश्य को समझने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने में है"।
अपने स्वागत भाषण में प्रो. निशित सिन्हा ने आईआईएम इंदौर के मिशन के अनुरूप, ‘मीमांसा’ को सामाजिक रूप से जागरूक और प्रासंगिक संवाद के लिए एक माध्यम बताया। उन्होंने कहा, हमें आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता को समझने और ‘मीमांसा’ को भविष्य समझने के लिए एक चिंतनशील यात्रा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने भविष्य के मानव संसाधन प्रबंधकों की उभरती जिम्मेदारियों पर चर्चा की, जो शैक्षिक और कॉर्पोरेट क्षेत्रों में एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के कौशल से लैस होंगे।
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प्रो. अमिताभ देव कोडवानी ने पहला पैनल डिस्कशन संचालित किया। इसका विषय था मानव संसाधन आधारित निर्णय लेने का विकसित परिदृश्य- एआई की शक्ति को उजागर करना। रुचि शर्मा, वीपी और हेड एचआर, इंटरग्लोब एविएशन, नम्रता गिल त्यागी डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज में वीपी एचआर और जेपी मॉर्गन के कार्यकारी निदेशक सुमित रंजन इसमें पैनल सदस्य थे।
दूसरा पैनल डिस्कशन वीयूसीए वर्ल्ड में प्रदर्शन प्रबंधन- सफलता मेट्रिक्स को फिर से परिभाषित करना पर केन्द्रित था। इसमें टेक महिंद्रा के वरिष्ठ वीपी एचआर अभिषेक तिवारी, सुमित नियोगी और अनिंद्य कुमार शी, आरआईएल में वीपी एचआर शामिल थे।
प्रो. निशित सिन्हा द्वारा संचालित तीसरी पैनल चर्चा, शिक्षा का आगे का सफर- समकालीन शिक्षा नीतियों का अन्वेषण पर केंद्रित था। पैनलिस्टों ने सामूहिक रूप से शिक्षा के उभरते परिदृश्य पर विचार साझा किए। इनमें अहमदाबाद एजुकेशन सोसाइटी के शिक्षा निदेशक डॉ. श्रीराम नेर्लेकर, प्रो. सिमरित कौर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रिंसिपल, प्रो. जॉन वर्गीस, सेंट स्टीफन कॉलेज के प्राचार्य एवं आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा शामिल थे।
प्रो. प्रकृति सोरल द्वारा संचालित चौथी पैनल चर्चा, शिक्षा में नवाचार- संज्ञानात्मक क्षितिज को आकार देना पर आधारित थी। राम कृष्ण मिशन विवेकानन्द सेंटेनरी कॉलेज, कोलकाता के प्राचार्य स्वामी कमलास्थानंद ने आध्यात्मिक और दार्शनिक अंतर्दृष्टि प्रदान की और एक अनुकूली मानसिकता और सामान्य लक्ष्य निर्धारित करने पर चर्चा की। शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज नई दिल्ली की प्रिंसिपल प्रो. पूनम वर्मा ने शिक्षा के बहुमुखी उद्देश्य पर जोर दिया - जिसमें पारस्परिक कौशल भी शामिल है, जबकि एआई नियमित कार्यों को संभालता है। सेंट जेवियर्स कॉलेज, अहमदाबाद के वरिष्ठ संकाय डॉ. राजेश अय्यर ने उद्योग-शिक्षा अंतराल को पाटने, अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देने और कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान करने में एआई की भूमिका के बारे में बताया। गार्गी कॉलेज नई दिल्ली की वरिष्ठ संकाय डॉ. नीरा पंत ने डेटा निर्माण में नैतिक जागरूकता, एआई साक्षरता के महत्व और डेटा लूप में मानवीय हस्तक्षेप पर बात की। उन्होंने शिक्षा के भविष्य को आकार देने वाले नवीन दृष्टिकोणों पर भी चर्चा की।
प्रत्येक पैनल ने अपने संबंधित विषयों की जटिलताओं पर चर्चा की। उपस्थित विद्यार्थियों और संस्थान के सभी सदस्यों को भरपूर ज्ञान प्राप्त हुआ। इससे उन्हें शिक्षा और मानव संसाधन प्रबंधन के उभरते परिदृश्यों के प्रति नई समझ मिली।
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अपने उद्घाटन भाषण में प्रो. हिमांशु राय ने आधुनिक संगठनों के सामने आने वाली बहुमुखी चुनौतियों का वर्णन किया। इसमें टेक्नोलॉजी की समझ से लेकर कार्यबल विविधता और कर्मचारियों का संगठन से जुड़ाव तक शामिल थे। तकनीकी प्रगति को अपनाने के सर्वोपरि महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "असली चुनौती एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा कर्मचारियों के विस्थापन में नहीं है, बल्कि व्यक्तियों को उभरते परिदृश्य को समझने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने में है"।
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अपने स्वागत भाषण में प्रो. निशित सिन्हा ने आईआईएम इंदौर के मिशन के अनुरूप, ‘मीमांसा’ को सामाजिक रूप से जागरूक और प्रासंगिक संवाद के लिए एक माध्यम बताया। उन्होंने कहा, हमें आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता को समझने और ‘मीमांसा’ को भविष्य समझने के लिए एक चिंतनशील यात्रा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने भविष्य के मानव संसाधन प्रबंधकों की उभरती जिम्मेदारियों पर चर्चा की, जो शैक्षिक और कॉर्पोरेट क्षेत्रों में एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के कौशल से लैस होंगे।
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प्रो. अमिताभ देव कोडवानी ने पहला पैनल डिस्कशन संचालित किया। इसका विषय था मानव संसाधन आधारित निर्णय लेने का विकसित परिदृश्य- एआई की शक्ति को उजागर करना। रुचि शर्मा, वीपी और हेड एचआर, इंटरग्लोब एविएशन, नम्रता गिल त्यागी डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज में वीपी एचआर और जेपी मॉर्गन के कार्यकारी निदेशक सुमित रंजन इसमें पैनल सदस्य थे।
दूसरा पैनल डिस्कशन वीयूसीए वर्ल्ड में प्रदर्शन प्रबंधन- सफलता मेट्रिक्स को फिर से परिभाषित करना पर केन्द्रित था। इसमें टेक महिंद्रा के वरिष्ठ वीपी एचआर अभिषेक तिवारी, सुमित नियोगी और अनिंद्य कुमार शी, आरआईएल में वीपी एचआर शामिल थे।
प्रो. निशित सिन्हा द्वारा संचालित तीसरी पैनल चर्चा, शिक्षा का आगे का सफर- समकालीन शिक्षा नीतियों का अन्वेषण पर केंद्रित था। पैनलिस्टों ने सामूहिक रूप से शिक्षा के उभरते परिदृश्य पर विचार साझा किए। इनमें अहमदाबाद एजुकेशन सोसाइटी के शिक्षा निदेशक डॉ. श्रीराम नेर्लेकर, प्रो. सिमरित कौर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रिंसिपल, प्रो. जॉन वर्गीस, सेंट स्टीफन कॉलेज के प्राचार्य एवं आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा शामिल थे।
प्रो. प्रकृति सोरल द्वारा संचालित चौथी पैनल चर्चा, शिक्षा में नवाचार- संज्ञानात्मक क्षितिज को आकार देना पर आधारित थी। राम कृष्ण मिशन विवेकानन्द सेंटेनरी कॉलेज, कोलकाता के प्राचार्य स्वामी कमलास्थानंद ने आध्यात्मिक और दार्शनिक अंतर्दृष्टि प्रदान की और एक अनुकूली मानसिकता और सामान्य लक्ष्य निर्धारित करने पर चर्चा की। शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज नई दिल्ली की प्रिंसिपल प्रो. पूनम वर्मा ने शिक्षा के बहुमुखी उद्देश्य पर जोर दिया - जिसमें पारस्परिक कौशल भी शामिल है, जबकि एआई नियमित कार्यों को संभालता है। सेंट जेवियर्स कॉलेज, अहमदाबाद के वरिष्ठ संकाय डॉ. राजेश अय्यर ने उद्योग-शिक्षा अंतराल को पाटने, अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देने और कार्यान्वयन चुनौतियों का समाधान करने में एआई की भूमिका के बारे में बताया। गार्गी कॉलेज नई दिल्ली की वरिष्ठ संकाय डॉ. नीरा पंत ने डेटा निर्माण में नैतिक जागरूकता, एआई साक्षरता के महत्व और डेटा लूप में मानवीय हस्तक्षेप पर बात की। उन्होंने शिक्षा के भविष्य को आकार देने वाले नवीन दृष्टिकोणों पर भी चर्चा की।
प्रत्येक पैनल ने अपने संबंधित विषयों की जटिलताओं पर चर्चा की। उपस्थित विद्यार्थियों और संस्थान के सभी सदस्यों को भरपूर ज्ञान प्राप्त हुआ। इससे उन्हें शिक्षा और मानव संसाधन प्रबंधन के उभरते परिदृश्यों के प्रति नई समझ मिली।
