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Indore: आदिवासियों के आराध्य टंट्या मामा पर विवाद, प्रतिमा लगाई तो वन विभाग ने ली आपत्ति, कहा- यह जमीन हमारी

Wed, 02 Aug 2023 10:05 AM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Wed, 02 Aug 2023 10:05 AM IST
सार

गंधवानी विधानसभा के तिरला क्षेत्र का मामला, बड़ी संख्या में आदिवासी समाज विरोध के लिए वन विभाग के कार्यालय पहुंचा
 

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Controversy over the Tantya Mama statue aadivasi protest
टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

आदिवासियों के आराध्य टंट्या मामा Tantya Mama की प्रतिमा लगाने पर वन विभाग ने आपत्ति ले ली है। प्रतिमा गंधवानी विधानसभा के तिरला क्षेत्र में स्थापित की गई है। जननायक टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने पर आई इस आपत्ति से आदिवासी भड़के हुए हैं। एक ओर जहां वन विभाग ने ग्रामीणों से कहा है कि जहां प्रतिमा लगी है वह जमीन वन विभाग की है वहीं दूसरी ओर आदिवासी इस मामले में बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। 
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क्या है मामला
तिरला ब्लॉक के ग्राम सेमलीपुरा की मिया पहाड़ी पर 30 जुलाई को जननायक क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापित की गई थी। प्रतिमा का लोकार्पण गंधवानी से कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने किया था। इसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस आयोजन के दो दिन बाद वन विभाग ने इस मामले में समाजजनों और आयोजनकर्ताओं को तलब कर आपत्ति दर्ज करवा दी। विभाग का कहना था कि प्रतिमा लगाने के लिए विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई। ऐसे में वन विभाग की आपत्ति के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण धार वन विभाग के जिला कार्यालय पर पहुंचे। यहां पर डीएफओ से मुलाकात की। डीएफओ मयंक गुर्जर ने इस मामले में जांच करवाने की बात कही है। 
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ग्राम सभा में पास किया था प्रस्ताव
वहीं आदिवासियों का कहना है कि यहां पर पहले से मंदिर है। जननायक टंट्या मामा आदिवासी वर्ग के लिए आराध्य हैं। इसलिए वहां पर उनकी प्रतिमा लगाई है। प्रतिमा लगाने से पहले ठहराव प्रस्ताव भी ग्राम सभा में पास किया गया है। इस आयोजन की तैयारियां एक पखवाड़े से चल रही थी लेकिन प्रतिमा लगने के बाद वन विभाग अब जमीन को लेकर पूछ रहा है। विभाग अब जांच करवाने की बात कह रहा है। साथ ही अतिक्रमण के भी नजरिए से देखा जा रहा है।
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टंट्या मामा को इंडियन राबिनहुड कहा जाता है
टंट्या मामा ने अंग्रेजों से लोहा लिया और वे गरीबों और आदिवासियों के शुभचिंतक थे। वे अंग्रेजों के खजाने को लूटकर उसे गरीबों में बांट दिया करते थे। एक करीबी ने उन्हें धोखा दिया और उन्हें अंग्रेजों ने फांसी दे दी। जल-जंगल और जमीन के लिए भी उनके संघर्ष को याद किया जाता है। उनकी वजह से अंग्रेज आदिवासी क्षेत्रों में आने से खौफ खाते थे। 
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