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Indore News: महाकाल मंदिर की तर्ज पर खजराना गणेश में भी लागू होगा ड्रेस कोड, गर्भगृह के लिए बनेंगे नियम
Sun, 23 Aug 2026 06:26 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 23 Aug 2026 06:26 AM IST
सार
Indore News: इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अभिषेक के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। मंदिर प्रबंध समिति श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए पारंपरिक पहनावा तय करेगी।
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खजराना गणेश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की तर्ज पर अब इंदौर के विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भी श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत तय पहनावा पहनने के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने और पूजा-अभिषेक करने की अनुमति दी जाएगी। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह में प्रवेश के लिए पुरुषों के लिए सोला-धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। इसी व्यवस्था को आधार बनाते हुए खजराना मंदिर में भी मर्यादित पहनावे की मांग लगातार उठ रही थी, जिसे देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
महाकाल मंदिर की तर्ज पर बनेगी व्यवस्था
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में इस प्रकार का नियम पहले से प्रभावी है। इससे धार्मिक स्थलों पर सादगी बनी रहती है और पूजा-अर्चना के दौरान पुजारी व श्रद्धालुओं का परिधान शास्त्र सम्मत नजर आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर खजराना गणेश मंदिर में भी इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए विद्वान पुजारियों का 1 पैनल बनाया जा रहा है, जो विभिन्न मंदिरों की परंपराओं और शास्त्रों का अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। समिति की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।
रंग नहीं, केवल वस्त्रों का प्रकार होगा तय
मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि प्रबंध समिति की बैठक में यह विषय प्रमुखता से सामने आया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष रंग या डिजाइन को अनिवार्य नहीं किया जाएगा, बल्कि पुरुषों और महिलाओं के लिए शालीन व पारंपरिक परिधान तय किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भगृह के भीतर अनुशासन और पवित्रता बनाए रखना है, ताकि पूजा-अर्चना सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
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श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में मिलेगी सुविधा
मुख्य पुजारी के अनुसार नियम लागू होने के बाद जो श्रद्धालु अचानक दर्शन के लिए पहुंचते हैं, उनके लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे। मंदिर समिति परिसर में ही परिधान उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार कर रही है। गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति विशेष मौकों पर ही मिलती है। इन विशेष अवसरों पर यजमान और श्रद्धालुओं को मंदिर की समिति के माध्यम से परिधान प्राप्त कर गर्भगृह में प्रवेश का मौका मिलेगा। ड्रेस कोड का अंतिम प्रारूप तैयार होने के बाद इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
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महाकाल मंदिर की तर्ज पर बनेगी व्यवस्था
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में इस प्रकार का नियम पहले से प्रभावी है। इससे धार्मिक स्थलों पर सादगी बनी रहती है और पूजा-अर्चना के दौरान पुजारी व श्रद्धालुओं का परिधान शास्त्र सम्मत नजर आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर खजराना गणेश मंदिर में भी इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए विद्वान पुजारियों का 1 पैनल बनाया जा रहा है, जो विभिन्न मंदिरों की परंपराओं और शास्त्रों का अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। समिति की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।
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रंग नहीं, केवल वस्त्रों का प्रकार होगा तय
मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि प्रबंध समिति की बैठक में यह विषय प्रमुखता से सामने आया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष रंग या डिजाइन को अनिवार्य नहीं किया जाएगा, बल्कि पुरुषों और महिलाओं के लिए शालीन व पारंपरिक परिधान तय किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भगृह के भीतर अनुशासन और पवित्रता बनाए रखना है, ताकि पूजा-अर्चना सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
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श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में मिलेगी सुविधा
मुख्य पुजारी के अनुसार नियम लागू होने के बाद जो श्रद्धालु अचानक दर्शन के लिए पहुंचते हैं, उनके लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे। मंदिर समिति परिसर में ही परिधान उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार कर रही है। गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति विशेष मौकों पर ही मिलती है। इन विशेष अवसरों पर यजमान और श्रद्धालुओं को मंदिर की समिति के माध्यम से परिधान प्राप्त कर गर्भगृह में प्रवेश का मौका मिलेगा। ड्रेस कोड का अंतिम प्रारूप तैयार होने के बाद इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
