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Indore News: क्रिसमस पर जगमग हुए चर्च, शांति और स्वास्थ्य के लिए हुई विशेष प्रार्थनाएं
Tue, 24 Dec 2024 10:28 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 24 Dec 2024 10:28 PM IST
सार
Indore News: 24 दिसंबर की मध्यरात्रि को शहर के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गई। प्रभु ईसा मसीह के जन्म के प्रसंगों को नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया।
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इंदौर में क्रिसमस सेलिब्रेशन।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
क्रिसमस के अवसर पर 24 दिसंबर की मध्यरात्रि को शहर के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गई। बिशप थॉमस के मार्गदर्शन में फादर ने पवित्र मिस्सा करवाई और प्रभु ईसा मसीह के जन्म की खुशी में कैरोल गीत गाए गए। इस दौरान बच्चों ने प्रभु ईसा मसीह के जन्म के प्रसंगों को नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया। इंदौर के चर्चों में शांति, स्वास्थ्य और आशा के लिए विशेष प्रार्थनाएं हुई।
सभी गिरजाघरों में भव्य सजावट की गई, जिनमें बालक यीशु, माता मरियम और क्रिसमस ट्री शामिल थे। ईसाई कैथोलिक समाज ने शहर के सभी चर्चों में क्रिसमस समारोह की व्यापक तैयारियां की, वहीं परिवारों ने भी अपने घरों में झांकियां, क्रिसमस ट्री और सजावट की। 24 दिसंबर की मध्यरात्रि को विशेष प्रार्थना और कैरोल गीतों के बाद 25 दिसंबर को सुबह 7 बजे पहली मिस्सा और दो घंटे बाद दूसरी मिस्सा अर्पित की गई। इन आयोजनों में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट सहित सभी ईसाई समुदाय के लोगों ने प्रभु यीशु की महिमा का गान किया। इस दौरान गिरजाघरों की घंटियां गूंज उठी और पवित्र वेदी के सामने बनी चरनी में बालक यीशु की प्रतिमा का अनावरण किया गया। ये प्रस्तुतियां ईसाई समुदाय के विश्वासियों के मन और दिल में जीवंतता का अहसास कराती दिखी।
इंदौर में लगभग 9 कैथोलिक चर्च हैं, जिनमें कैथेड्रल, पुष्पनगर, पिपल्याकुमार, सुखलिया, नंदानगर, नंदबाग, और बेटमा शामिल हैं। इनके अलावा प्रोटेस्टेंट समुदाय का छावनी स्थित मसीही मंदिर भी क्रिसमस के लिए सजाया गया है। सभी चर्चों में मध्यरात्रि की विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन हो रहा है। 31 दिसंबर की रात नववर्ष की पूर्व संध्या पर सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाएगा, जो एक जनवरी 2025 तक चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा होगा।
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इस वर्ष क्रिसमस का शीर्षक "आशा के तीर्थयात्री" रखा गया है, जो समस्त ईसाई समाज के लिए प्रेरणादायक है। जनसंपर्क अधिकारी फादर सुमित ताहिर ने बताया कि यह विषय हमें यह याद दिलाता है कि हम इस धरा पर तीर्थयात्री हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस पर्व की खुशी में आशा और उम्मीद को बनाए रखना चाहिए और आशा के दीप बनना चाहिए। इस वर्ष का प्रतीक चिह्न 'नाव' है, जो इस संदेश को व्यक्त करता है।
क्रिसमस के दौरान गिरजाघरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पास व्यवस्था की गई है। 24 दिसंबर की रात होने वाली प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए टोकन पास जारी किए गए ताकि सीमित संख्या में लोग प्रार्थना सभा में शामिल होकर शांति से प्रार्थना कर सकें। इसके साथ ही, चर्च में कैरोल गायकों की टीमों ने गीत गाए जिससे पर्व की गरिमा और आनंद और बढ़ गए।
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सभी गिरजाघरों में भव्य सजावट की गई, जिनमें बालक यीशु, माता मरियम और क्रिसमस ट्री शामिल थे। ईसाई कैथोलिक समाज ने शहर के सभी चर्चों में क्रिसमस समारोह की व्यापक तैयारियां की, वहीं परिवारों ने भी अपने घरों में झांकियां, क्रिसमस ट्री और सजावट की। 24 दिसंबर की मध्यरात्रि को विशेष प्रार्थना और कैरोल गीतों के बाद 25 दिसंबर को सुबह 7 बजे पहली मिस्सा और दो घंटे बाद दूसरी मिस्सा अर्पित की गई। इन आयोजनों में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट सहित सभी ईसाई समुदाय के लोगों ने प्रभु यीशु की महिमा का गान किया। इस दौरान गिरजाघरों की घंटियां गूंज उठी और पवित्र वेदी के सामने बनी चरनी में बालक यीशु की प्रतिमा का अनावरण किया गया। ये प्रस्तुतियां ईसाई समुदाय के विश्वासियों के मन और दिल में जीवंतता का अहसास कराती दिखी।
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इंदौर में लगभग 9 कैथोलिक चर्च हैं, जिनमें कैथेड्रल, पुष्पनगर, पिपल्याकुमार, सुखलिया, नंदानगर, नंदबाग, और बेटमा शामिल हैं। इनके अलावा प्रोटेस्टेंट समुदाय का छावनी स्थित मसीही मंदिर भी क्रिसमस के लिए सजाया गया है। सभी चर्चों में मध्यरात्रि की विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन हो रहा है। 31 दिसंबर की रात नववर्ष की पूर्व संध्या पर सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाएगा, जो एक जनवरी 2025 तक चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा होगा।
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इस वर्ष क्रिसमस का शीर्षक "आशा के तीर्थयात्री" रखा गया है, जो समस्त ईसाई समाज के लिए प्रेरणादायक है। जनसंपर्क अधिकारी फादर सुमित ताहिर ने बताया कि यह विषय हमें यह याद दिलाता है कि हम इस धरा पर तीर्थयात्री हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस पर्व की खुशी में आशा और उम्मीद को बनाए रखना चाहिए और आशा के दीप बनना चाहिए। इस वर्ष का प्रतीक चिह्न 'नाव' है, जो इस संदेश को व्यक्त करता है।
क्रिसमस के दौरान गिरजाघरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पास व्यवस्था की गई है। 24 दिसंबर की रात होने वाली प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए टोकन पास जारी किए गए ताकि सीमित संख्या में लोग प्रार्थना सभा में शामिल होकर शांति से प्रार्थना कर सकें। इसके साथ ही, चर्च में कैरोल गायकों की टीमों ने गीत गाए जिससे पर्व की गरिमा और आनंद और बढ़ गए।
