फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   August Revolution: Satyagraha was held in Indore Sarafa under the leadership of Purushottam Vijay

'भारत छोड़ो आंदोलन': इंदौर ने भरी थी हुंकार, पुरुषोत्तम विजय के नेतृत्व में सराफा बना अगस्त क्रांति का केंद्र

Sat, 09 Aug 2025 07:41 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 09 Aug 2025 07:41 AM IST
सार

अगस्त क्रांति: 1942 में इंदौर का सराफा आंदोलन का प्रमुख स्थल था। पुरुषोत्तम विजय नानेरिया के नेतृत्व में यहां सत्याग्रह का एलान हुआ। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और गोलीबारी की। गोली लगने से मोरसली गली निवासी मगनलाल हीरालाल शहीद हो गए। पढ़ें क्रांति की दास्तान

विज्ञापन
August Revolution: Satyagraha was held in Indore Sarafa under the leadership of Purushottam Vijay
पुरुषोत्तम विजय नानेरिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आजादी के आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1942 को तत्कालीन बंबई (मुंबई) के गोवालिया टैंक मैदान में हुए कांग्रेस अधिवेशन में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था। उस समय दूसरा विश्व युद्ध जारी था और अंग्रेजी हुकूमत भारी दबाव में थी। गांधीजी के आह्वान पर देशभर में आजादी के दीवाने सड़कों पर उतर आए। इंदौर ने भी इस आंदोलन में जोरदार हुंकार भरी और सराफा बाजार सत्याग्रह का केंद्र बना। कुछ अंग्रेज अधिकारियों के अनुसार 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन सबसे बड़ा जनांदोलन था। इंदौर के आंदोलनकारियों ने मध्यभारत के अंग्रेज एजेंट, जो रेजीडेंसी कोठी में रहते थे, उनका खुलकर विरोध किया।

विज्ञापन

अमेरिका गए थे यशवंतराव होल्कर
अगस्त 1942 में आंदोलन के समय इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर अंग्रेज एजेंट की अनुमति से अमेरिका यात्रा पर थे। उनके अनुपस्थित रहने के दौरान रियासत का संचालन देवास नरेश महाराजा विक्रमसिंह राव तुकोजीराव पवार को सौंपा गया। कार्यवाहक नरेश ने प्रजामंडल नेताओं से मुलाकात तो की, लेकिन महाराजा की वापसी तक किसी बड़े निर्णय में असमर्थता जताई।

विज्ञापन

सराफा में गोलीकांड, मगनलाल हीरालाल शहीद
तत्कालीन सराफा बाजार, जो आज इंदौर का सबसे व्यस्त इलाका है, 1942 में आंदोलन का प्रमुख स्थल था। पुरुषोत्तम विजय नानेरिया के नेतृत्व में यहां सत्याग्रह का एलान हुआ। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और गोलीबारी की। गोली लगने से मोरसली गली निवासी मगनलाल हीरालाल शहीद हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें: रिटायर्ड आईएएस के बेटे ने फांसी लगाकर दी जान, 15 साल पहले छोड़ गई थी पत्नी; जानें

शहर के अन्य हिस्सों में भी विरोध
मिल क्षेत्र में श्रमिकों ने जुलूस निकाला, जिसे चिमनबाग में रोक दिया गया। जूनी इंदौर में महिलाओं ने जुलूस निकालकर आंदोलन में हिस्सा लिया। राजबाड़ा और माणिक चौक (सुभाष चौक) में भी प्रजामंडल कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। आंदोलनकारियों ने विरोध दर्ज कराने का एक अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने कृष्णपुरा से बैल, सांड और गधों को इकट्ठा कर ‘गदर्भ सेना’ के नाम से जुलूस निकाला। पुलिस इसकी मंशा समझ नहीं पाई और राजबाड़ा क्षेत्र में इन पशुओं की भगदड़ से अफरा-तफरी मच गई।

इंदौर के पहले गैर-कांग्रेसी महापौर
1958 में कॉमरेड होमी दाजी के नेतृत्व में कांग्रेस विरोधी नागरिक मोर्चा बना, जिसने नगर परिषद चुनाव में जीत हासिल की। पुरुषोत्तम विजय नानेरिया इंदौर के पहले गैर-कांग्रेसी महापौर बने। वे पत्रकार भी रहे और शहर के एक अखबार के मालिक थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed