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indore: पैरों से पास की पटवारी की परीक्षा, पैरों से ही कम्प्यूटर पर काम करता है आमीन

Fri, 07 Jul 2023 04:26 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Fri, 07 Jul 2023 04:26 PM IST
सार

कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त करने की जिंदादिल कहानी, देवास के आमीन बने युवाओं के लिए आदर्श
 

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ameen monsuri patwari exam selection story
आमीन मंसूरी - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

कहते हैं हौसले बुलंद हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। इस पंक्ति को चरितार्थ किया है देवास के 30 वर्षीय आमीन ने। आमीन ने हाल ही में आए पटवारी परीक्षा परिणाम में सफलता प्राप्त की। इसमें कई लोग सफल हुए लेकिन आमीन एक ऐसा अभ्यर्थी है जिसने हाथों से नहीं, पैरों से परीक्षा दी और सफलता पाई। देवास जिले के पीपलरावां का निवासी आमीन दोनों हाथों से दिव्यांग है। आमीन के पिता इकबाल मंसूरी टेलरिंग का काम करते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। जन्म से ही आमीन के दोनों हाथ नहीं हैं लेकिन उसने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं माना। आमीन बचपन से पढ़ने में होशियार था और पटवारी परीक्षा में भी उसने यह साबित कर दिखाया। उसने दिव्यांग श्रेणी की मेरिट सूची में जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। आमीन ने अपनी सफलता का श्रेय पिता और परिवार को दिया। उसके चयन पर परिवार के साथ ही गांववालों ने भी खुशी जताई। रविवार रात को विधायक सज्जनसिंह वर्मा के पुत्र पवन वर्मा, विधायक प्रतिनिधि भूपेंद्र नागर आदि ने आमीन के घर पहुंचकर बधाई दी।
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पैरों से कम्प्यूटर भी चला लेता है आमीन 
आमीन ने पैरों से लिखना सीखा और परीक्षा देना शुरू की जैसे जैसे वह आगे बढ़ता गया नई चीजें भी सीखता गया। इसके बाद आमीन ने पैरों से कम्प्यूटर चलाना भी सीखा। आमीन बचपन से स्कूल और कालेज लेवल पर अन्य गतिविधियों में भी भाग लेता था। उसने 2012 में कक्षा 11वीं में अध्य्यन के दौरान सोलर कुकर का प्रोजेक्ट बनाया था, जो राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुआ। आमीन को इसके लिए पुरस्कृत किया गया। 12वीं तक की पढ़ाई शासकीय स्कूल से की और इंदौर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पटवारी की परीक्षा का फार्म भरा। उसने पैरों से परीक्षा दी और दिव्यांग श्रेणी की मेरिट सूची में जिले में पहला स्थान प्राप्त किया।
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रोज करीब 12 घंटे पढ़ाई की
पटवारी परीक्षा में चयनित होने के लिए आमीन ने रोज करीब 12 घंटे तक पढ़ाई की। इस दौरान वह सोशल मीडिया और अन्य गैर जरूरी बातों से भी बहुत दूर रहा। आमीन का मानना है कि यदि जीवन में कोई लक्ष्य बना लो तो फिर उसके प्रति पूर्ण समर्पण के साथ जुट जाना चाहिए। सभी सफलता मिल पाएगी।  
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