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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   11th ticket of Joshi family in 51 years, Mahesh contested 3 elections from Indore-3, Ashwin 5 and now Pintu

MP Election: 51 साल में जोशी परिवार का 11वां टिकट, इंदौर-3 से तीन चुनाव महेश लड़े, पांच अश्विन और अब पिंटू

Fri, 20 Oct 2023 07:04 PM IST
Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Fri, 20 Oct 2023 07:04 PM IST
सार

इंदौर की कांग्रेस राजनीति में 51 साल में जोशी परिवार का यह 11वां टिकट है। युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए महेश जोशी ने पहला चुनाव 1972 में इंदौर 1 से जीता था। 1977 में वे इसी विधानसभा क्षेत्र से ओमप्रकाश रावल से हार गए थे। 

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11th ticket of Joshi family in 51 years, Mahesh contested 3 elections from Indore-3, Ashwin 5 and now Pintu
महेश जोशी, अश्विन जोशी, पिंटू जोशी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आखिरकार इंदौर-3 से कांग्रेस का टिकट जोशी परिवार के खाते में ही गया। 1980 में सबसे पहले महेश जोशी यहां से चुनाव लड़कर विधायक बने थे। 43 साल पहले शुरू हुए इस सिलसिले में सिर्फ 1993 में जोशी परिवार का कोई सदस्य मैदान में नहीं था। इसके पहले महेश जोशी और बाद में अश्विन जोशी हर चुनावी समर में मैदान में दिखे। इस बार कांग्रेस ने महेश जोशी के बेटे पिंटू को मौका दिया है। इंदौर की कांग्रेस राजनीति में 51 साल में जोशी परिवार का यह 11वां टिकट है। 
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1972 में इंदौर-1 से विधायक बने थे महेश जोशी
युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए महेश जोशी ने पहला चुनाव 1972 में इंदौर 1 से जीता था। 1977 में वे इसी विधानसभा क्षेत्र से ओमप्रकाश रावल से हार गए थे। 1980 में पहले उन्हें इसी क्षेत्र से टिकट दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें इंदौर-3 भेजते हुए इंदौर 1 से चंद्रशेखर व्यास को टिकट दिया गया था। 
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1980 में इंदौर 3 में हुई जोशी परिवार की इंट्री
1980 में महेश जोशी ने इंदौर 3 से चुनाव लड़ा और राजेंद्र धारकर को हराकर विधानसभा में पहुंचे। 1985 में वे फिर इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और सुमित्रा महाजन को हराकर विधायक बने। 1985 से 90 के दौर में वे मंत्री भी रहे। 1990 में इसी विधानसभा क्षेत्र में गोपी नेमा के हाथों उन्हें शिकस्त खाना पड़ी। 1993 में जोशी चुनाव नहीं लड़े और अपने कट्टर समर्थक अनवर खान को टिकट दिलवाया, लेकिन वे जीत नहीं पाए। 
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1998 में अश्विन जोशी को मौका मिला
1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौर में महेश जोशी की स्थिति इंदौर में बेताज बादशाह जैसी थी और अपने राजनीतिक दबदबे का उपयोग जोशी ने भतीजे अश्विन को इंदौर 3 से ही टिकट दिलवाया और जितवाया भी। अश्विन छात्र राजनीति की उपज थे और होल्कर कॉलेज एवं इंदौर विश्वविद्यालय की राजनीति में इनका अच्छा प्रभाव था। वे इसी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक बने। 

चाचा की हार का बदला भतीजे ने लिया था
1993 में महेश जोशी को गोपी नेमा ने चुनाव हराया था। इस चुनाव में निर्दलीय बाला बेग जोशी की हार का कारण बने थे। 1998 में अश्विन जोशी और गोपी नेमा ही आमने-सामने थे, लेकिन अपने चाचा की रणनीति के चलते अश्विन ने नेमा को शिकस्त देकर चाचा की हार का बदला ले लिया था। 

उमा लहर में भी अपराजित रहे
2003 की उमा लहर में भी कांग्रेस ने अश्विन जोशी को टिकट दिया था। उनका मुकाबला विष्णुप्रसाद शुक्ला के बड़े बेटे राजेन्द्र शुक्ला से हुआ था। बाजी जोशी के पक्ष में रही थी और वे दूसरी बार यहीं से विधायक बने। 2008 में फिर जोशी और नेमा आमने सामने थे और जीत जोशी को ही मिली। वे इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक बनने वाले पहले नेता थे। 

2013-18 में हार गए अश्विन
2013 में फिर कांग्रेस ने यहां से अश्विन जोशी को मौका दिया, मुकाबले में उषा ठाकुर थीं, उनका यहां से पहला चुनाव था और जोशी को शिकस्त देकर वे यहां से विधायक बनीं। 2018 में अश्विन जोशी और आकाश विजयवर्गीय आमने-सामने रहे और जीत विजयवर्गीय की हुई। 

अब कांग्रेस का भरोसा पिंटू पर 
2018 में यहां से कांग्रेस के टिकट के लिए अश्विन जोशी और पिंटू जोशी में प्रतिस्पर्धा थी, तब भी पिंटू का दावा अश्विन से ज्यादा मजबूत था, लेकिन अंतिम समय में दिग्विजय सिंह की मध्यस्थता के चलते महेश जोशी ने बेटे की बजाय भतीजे को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। तब अश्विन ने कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा और अगली बार वे खुद को उम्मीदवारी की दौड़ से बाहर कर लेंगे। इस बार पिंटू शुरू से ही यह स्पष्ट कर चुके थे कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। अश्विन भी मैदान में आ गए। इन दोनों भाइयों के अलावा प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री अरविंद बागड़ी भी उम्मीदवारी की दौड़ में थे। आखिरी दौर में पिंटू और बागड़ी के बीच फैसला होना था और गुरुवार देर रात जब सूची जारी हुई, उसके पहले तक दोनों नामों को लेकर अटकलबाजी चलती रही। 


गेहलोत, अंबिका सोनी मददगार बने, कमलनाथ सर्वे पर चले, दिग्विजय का वीटो था
इंदौर 3 से पिंटू जोशी की उम्मीदवारी तय करवाने में अंबिका सोनी और अशोक गेहलोत की भी अहम भूमिका रही। महेश जोशी जिस समय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव थे, तब अंबिका सोनी अध्यक्ष थीं। चुनाव समिति में सोनी की मौजूदगी का फायदा पिंटू को मिला। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत महेश जोशी को बहुत सम्मान देते थे। उन्होंने भी पिंटू की मदद की। दिग्विजय सिंह शुरू से ही पिंटू के पक्ष में थे और कमलनाथ ने सर्वे को तवज्जो दी जिसमें पिंटू सबसे ऊपर थे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरग़े से महेश जोशी के खास समर्थक अजय चौरड़िया की नजदीकी भी पिंटू के काम आई।
 
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