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Indore: 100 साल पहले इंदौर को देश के आधुनिक शहरों की कतार में खड़ा कर दिया था होलकर राजवंश ने

Tue, 30 May 2023 01:36 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 30 May 2023 01:36 PM IST
सार

सर गिडिज ने राजवाड़ा के पीछे के हिस्से में बाजारों के क्लस्टर तैयार किए। सराफा को बाजारों के मध्य मेें रखा। उसके पास बर्तन बाजार, फिर क्लाथ मार्केट, फिर किराना बाजार की प्लानिंग की गई।

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100 years ago, the Holkar dynasty had made Indore stand in the line of modern cities of the country.
राजवाड़ा के आसपास पहले काफी खुली जगह थी। - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

31 मई को इंदौर का गौरव दिवस मनाया जाएगा। इस शहर में समय के साथ खुद में बदलाव किए और अपनी सीमाएं फैलाई। इंदौर बीते छह सालों से स्वच्छता के मामले देेशभर में नाम कमा रहा है, लेकिन इंदौर को आधुनिक बनाने के प्रयास सौ साल पहले होलकर राजवंश के समय से शुरू हो गए थे। तब शहर में आग बुझाने के लिए विदेशों की तरह इंतजाम किए गए थे। यशवंत सागर तालाब से शहर में आग बुझाने के लिए विशेष लाइनें बिछाई गई थी। शहर के बाजार, उद्योग, बसाहट के लिए 1918 में इंदौर का पहला मास्टर प्लान बनाने के लिए स्काॅटलैंड से सर पेट्रिक गिडिज को बुलाया गया। 10 वीं सदी के तीसरे दशक में मास्टर प्लान के हिसाब से काम हुए। तब शहर की आबादी दो से तीन लाख थी।

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बाजारों की सुरक्षा को कवर करने के लिए सैनिकों के मकान बनाए

सर गिडिज ने राजवाड़ा के पीछे के हिस्से में बाजारों के क्लस्टर तैयार किए। सराफा को बाजारों के मध्य मेें रखा। उसके पास बर्तन बाजार, फिर क्लाथ मार्केट, फिर किराना बाजार की प्लानिंग की गई। इन बाजारों को कवर करने केे लिए अहिल्या पल्टन, मल्हार पलटन जैसी सैनिकों की काॅलोनियां प्लान की गई।

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नदी को जोड़ा था हरियाली से

पद्म श्री भालू मोढ़े बताते है कि मशहूर आर्किटेक्ट पेट्रिक गिडिज ने इंदौर के मास्टर प्लान में शहर के बीच से बहने वाली नदी को हरियाली को जोड़ा गया था, ताकि शहर में हरियाली के साथ नदी भी प्रवाहित होती रहे। उन्होंने कान्ह नदी के दोनों तरफ घने पेड़ लगाने की सलाह दी, लेकिन उस बात का ध्यान नहीं रखा गया और किनारों पर बस्तियां बस गई।

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1918 के मास्टर प्लान में शहर की सीमा कम थी। छावनी से शुरू होकर स्नेहलतागंज और रीगल से अंतिम चौराहे के बीच शहर खत्म हो जाता था। तब उन्होंने शहर के 25 फीसदी हिस्से में हरियाली रखी थी। उस समय उन्होंने महूनाका और नेहरू सर्कल चौराहा प्लान किया था। इन चौराहों भी 100 वर्षों बाद भी ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं रहती है।

दूर बसाया मिलों का शहर

इंदौर के औद्योगिक विकास के लिए भी मास्टर प्लान में जगह तय की गई। हुकमंचद सेठ चाहते थे कि नवलखा की तरफ काॅटन मिलों के लिए जमीन दी जाए, लेकिन वहां काफी हरियाली थी, इसलिए मिलों के लिए रेलवे पटरी पार के हिस्से को रखा गया। सबसे पहले मालवा मिल बनी। मिलों को तब राजवाड़ा से दूर जगह दी गई अौर मिलों के परिसरों को भी हरा भरा रखने के लिए मिल मालिकों को कहा गया था। आजादी के बाद मिलों के आसपास नए शहर की बसाहट होने लगी।

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