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इंदौर: जीते जी किया खुद का पिंड दान, मृत्युभोज में परोसा भोजन; निधन के बाद किया नेत्रदान और देहदान
Wed, 15 Dec 2021 11:44 AM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Wed, 15 Dec 2021 11:44 AM IST
सार
कुछ लोग होते हैं जो जीते जी तो औरों के काम आते ही हैं लेकिन मरने के बाद भीदूसरों की मदद करते हैं। ऐसी ही महिला है इंदौर की मनोरमा देवी घोलप। उनके निधन के बाद अंतिम इच्छानुसार परिजनों ने उनका नेत्रदान और देहदान किया।
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मनोरमा देवी घोलप।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कुछ लोग होते हैं जो जीते जी तो औरों के काम आते ही हैं लेकिन मृत्योपरांत भी दूसरों की मदद करते हैं। ऐसी ही एक महिला है इंदौर की मनोरमा देवी घोलप। उनकी आखिरी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनकी देह और नेत्र दान किए जाएं। मंगलवार को उनका निधन हुआ और अंतिम इच्छानुसार परिजनों ने नेत्रदान और देहदान किया।
दरअसल सुदामा नगर निवासी मनोरमा देवी घोलप ऐसी शख्सियत थीं जिन्होंने अपने निधन से पहले ही वे सारी प्रक्रियाएं पूरी कर दी थीं जो मृत्योपरांत की जाती है। उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था और फॉर्म भरकर मुस्कान ग्रुप को जमा किया था। इसके बाद उन्होंने अपना पिंडदान करवाया था और दसवां और तेरहवां भी करवाया। मृत्युभोज दिया और अपने हाथों से सभी को भोजन करवाया। कुटुंब के सभी लोगों से मिलने की इच्छा जताकर सबसे मुलाकात की। मनोरमा देवी पेशे से नर्स रहीं हैं। करीब 36 सालों तक रतलाम में नौकरी थी। परिवार के दायित्व निभाए और बच्चों की शिक्षा करवाई। उनके पति नारायण घोलप का कुछ साल पहले निधन हो गया था। मनोरमा देवी ने नौकरी के दौरान ही सोच लिया था कि मृत्योपरांत ये देह किसी के काम आए तो अच्छा है और तभी से उन्होंने देहदान का संकल्प लिया।
निधन के बाद किया नेत्रदान और देहदान
मंगलवार को मनोरमा देवी का निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छानुसार एमके इंटरनेशनल आई बैंक में उनके नेत्र दान किए गए और शुभदीप आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय में देहदान किया गया। मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य ने बताया कि मनोरमा देवी ने यह कहा था कि मेरे शरीर पर शोध कर चिकित्सक विद्यार्थी काबिल डाक्टर बनें। वह जटिल से जटिल बीमारियों का हल निकाल सकें। उन्होंने देहदान का संकल्प मुस्कान ग्रुप इंदौर में करीब 3 वर्ष पूर्व पंजीयन कराया था। संदीपन ने बताया कि अब बारी आम नागरिकों की है कि इस तथ्य को समझें और नेत्रदान, देहदान, अंगदान के प्रति भ्रांतियां मिथक व झूठी मान्यताओं को दरकिनार कर नेत्रदान, देहदान अंगदान के लिए आगे आएं और मानवता के हाथ में हाथ देकर मानवता के सजग कार्यों में आगे बढ़ें। हमारे देश में कॉर्निया की जरूरत की बात करें तो भारत में हर साल करीब दो लाख कॉर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत है। प्रत्येक साल 20 हजार मामले जुड़ जाते हैं।
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इंदौर में बढ़ रही नेत्रदान-देहदान करने वालों की संख्या
इंदौर में नेत्रदान, देहदान और अंगदान को लेकर जागरूकता आ रही है। मुस्कान ग्रुप के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो सालों में यह प्रक्रिया थम-सी गई थी, लेकिन अब कोरोना संक्रमण कम होने के बाद फिर शहर में नेत्रदान, देहदान व अंगदान करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते 15 दिनों में शहर व आसपास के क्षेत्रों के 20 से अधिक महिला-पुरुषों ने अंगदान किया है। संदीपन ने बताया कि शहर में कोरोना के पहले बड़ी संख्या में लोग नेत्रदान किया करते थे, लेकिन कोरोना के कारण यह प्रक्रिया लगभग बंद-सी हो गई थी। अब एक बार फिर शहर में लोग नेत्रदान कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में 20 से ज्यादा बुजुर्गों ने अपने नेत्र मृत्यु के बाद दान किए, जिनमें अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। मृत्यु उपरांत इन बुजुर्गों का कॉर्निया निकालकर जरूरतमंद लोगों को लगाया गया।
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दरअसल सुदामा नगर निवासी मनोरमा देवी घोलप ऐसी शख्सियत थीं जिन्होंने अपने निधन से पहले ही वे सारी प्रक्रियाएं पूरी कर दी थीं जो मृत्योपरांत की जाती है। उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था और फॉर्म भरकर मुस्कान ग्रुप को जमा किया था। इसके बाद उन्होंने अपना पिंडदान करवाया था और दसवां और तेरहवां भी करवाया। मृत्युभोज दिया और अपने हाथों से सभी को भोजन करवाया। कुटुंब के सभी लोगों से मिलने की इच्छा जताकर सबसे मुलाकात की। मनोरमा देवी पेशे से नर्स रहीं हैं। करीब 36 सालों तक रतलाम में नौकरी थी। परिवार के दायित्व निभाए और बच्चों की शिक्षा करवाई। उनके पति नारायण घोलप का कुछ साल पहले निधन हो गया था। मनोरमा देवी ने नौकरी के दौरान ही सोच लिया था कि मृत्योपरांत ये देह किसी के काम आए तो अच्छा है और तभी से उन्होंने देहदान का संकल्प लिया।
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निधन के बाद किया नेत्रदान और देहदान
मंगलवार को मनोरमा देवी का निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छानुसार एमके इंटरनेशनल आई बैंक में उनके नेत्र दान किए गए और शुभदीप आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय में देहदान किया गया। मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य ने बताया कि मनोरमा देवी ने यह कहा था कि मेरे शरीर पर शोध कर चिकित्सक विद्यार्थी काबिल डाक्टर बनें। वह जटिल से जटिल बीमारियों का हल निकाल सकें। उन्होंने देहदान का संकल्प मुस्कान ग्रुप इंदौर में करीब 3 वर्ष पूर्व पंजीयन कराया था। संदीपन ने बताया कि अब बारी आम नागरिकों की है कि इस तथ्य को समझें और नेत्रदान, देहदान, अंगदान के प्रति भ्रांतियां मिथक व झूठी मान्यताओं को दरकिनार कर नेत्रदान, देहदान अंगदान के लिए आगे आएं और मानवता के हाथ में हाथ देकर मानवता के सजग कार्यों में आगे बढ़ें। हमारे देश में कॉर्निया की जरूरत की बात करें तो भारत में हर साल करीब दो लाख कॉर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत है। प्रत्येक साल 20 हजार मामले जुड़ जाते हैं।
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इंदौर में बढ़ रही नेत्रदान-देहदान करने वालों की संख्या
इंदौर में नेत्रदान, देहदान और अंगदान को लेकर जागरूकता आ रही है। मुस्कान ग्रुप के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो सालों में यह प्रक्रिया थम-सी गई थी, लेकिन अब कोरोना संक्रमण कम होने के बाद फिर शहर में नेत्रदान, देहदान व अंगदान करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते 15 दिनों में शहर व आसपास के क्षेत्रों के 20 से अधिक महिला-पुरुषों ने अंगदान किया है। संदीपन ने बताया कि शहर में कोरोना के पहले बड़ी संख्या में लोग नेत्रदान किया करते थे, लेकिन कोरोना के कारण यह प्रक्रिया लगभग बंद-सी हो गई थी। अब एक बार फिर शहर में लोग नेत्रदान कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में 20 से ज्यादा बुजुर्गों ने अपने नेत्र मृत्यु के बाद दान किए, जिनमें अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। मृत्यु उपरांत इन बुजुर्गों का कॉर्निया निकालकर जरूरतमंद लोगों को लगाया गया।
