मध्यप्रदेश उपचुनाव: सचिन पायलट ने निभाया राजधर्म, सिंधिया संग दोस्ती को पार्टी के 'मास्टर स्ट्रोक' से रखा दूर
राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने खंडवा संसदीय क्षेत्र के छैगांवमाखन के बाद सनावद और मुंडी में भी जनसभाओं को सम्बोधित किया। इस दौरान सचिन पायलट सिंधिया पर व्यक्तिगत हमला करने से बचते नजर आए। लेकिन उन्होंने भाजपा और सीएम शिवराज सिंह चौहान पर जमकर निशाना साधा। सभा को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि शिवराज अब रहने वाले नहीं हैं। इसलिए गली-गली, मारे-मारे फिर रहे हैं...
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मध्यप्रदेश में जैसे जैसे उपचुनाव के मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं। वैसे-वैसे सूबे की राजनीतिक भी गरमाती जा रही है। 30 अक्तूबर को उपचुनाव होने हैं। ऐसे में नेताओं के एक दूसरे पर हमले तेज होते जा रहे हैं। इस बीच एमपी के उपचुनावों में राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस ने एक मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के बचपन के मित्र सचिन पायलट को स्टार प्रचारक के तौर पर उपचुनाव में प्रचार के लिए उतारा दिया है। प्रचार के दौरान खास बात यह रही कि, पायलट अपनी तीनों चुनावी सभाओं में दोस्त सिंधिया पर सीधा हमला करने से बचते हुए नजर आए।
बुधवार को सचिन पायलट ने खंडवा संसदीय क्षेत्र के छैगांवमाखन के बाद सनावद और मुंडी में भी जनसभाओं को सम्बोधित किया। इस दौरान सचिन पायलट सिंधिया पर व्यक्तिगत हमला करने से बचते नजर आए। लेकिन उन्होंने भाजपा और सीएम शिवराज सिंह चौहान पर जमकर निशाना साधा। सभा को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि शिवराज अब रहने वाले नहीं हैं। इसलिए गली-गली, मारे-मारे फिर रहे हैं। अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं लेकिन वह यह जान लें कि चारों सीटें कांग्रेस जीतेगी, उनकी उलटी गिनती प्रदेश में चालू हो चुकी है। साढ़े 24 माह बाद प्रदेश में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनेगी। उसकी शुरुआत 30 अक्तूबर से होगी। आज किसान-नौजवान मन बना ले तो कोई उसे हरा नहीं सकता है।
गुर्जर वोटरों पर कांग्रेस की नजर
खंडवा लोकसभा सीट पर इस बार कांग्रेस पूरा जोर लगाती हुई नजर आ रही है। इस सीट पर करीब 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें से ढाई लाख से ज्यादा गुर्जर वोटर हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाले इन वोटर्स पर कांग्रेस ने सेंधमारी की थी। जिससे बड़वाह और मांधाता सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। ऐसे में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट के तीन चुनावी सभाओं के जरिए ढाई लाख गुर्जर वोटरों को साधने की कोशिश में जुट गई है।
सामान्य सीट पर कांग्रेस ने राजपूत समाज से आने वाले जनारायण सिंह पुरनी को अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि भाजपा ने ओबीसी कार्ड खेलते हुए ज्ञानेश्वर पाटिल को मैदान में उतारा है। लेकिन कांग्रेस ने भाजपा की काट के लिए ओबीसी वर्ग में आने वाले गुर्जर समाज को साधने के लिए सचिन पायलट का चुनावी दौरा करवाया है, जो भाजपा पर भारी पड़ सकता है। जबकि भाजपा ने इसके जवाब में बडवाह से कांग्रेस विधायक सचिन बिरला को अपने पाले में लाकर गुर्जर वोटर्स की जंग को दिलचस्प कर दिया है।
सिंधिया और सचिन का पुराना है याराना
मध्यप्रदेश के राजनीतिक विशलेषकों के अनुसार, सचिन पायलट सीधे तौर पर सिंधिया के खिलाफ नहीं बोल रहे हैं। इसके पीछे ज्यादा तो कुछ नहीं केवल दोनों की गहरी दोस्ती है। लिहाजा दोनों ही दिग्गज एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमला न करते हुए राजनीतिक दलों पर हमला करते हुए नजर आ रहे हैं। आज इन दोनों युवा नेताओं की दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। दोनों लंबे समय से एक ही पार्टी के सदस्य रहे और यूपीए सरकार में मंत्री भी बने थे। दोनों को ही विरासत में एक मजबूत राजनीति का आधार मिला। कांग्रेस में राहुल गांधी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट युवा चेहरों के तौर पर पहचाने जाते थे। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही सचिन के भी कांग्रेस पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन राजस्थान में फिल्हाल सीएम अशोक गहलोत और पायलट के बीच सामान्य ही चल रहा है।
पायलट ने पहले भी एमपी उपचुनाव में निभाई अहम भूमिका
यह पहला मौका नहीं जब सचिन पायलट मध्यप्रदेश में प्रचार करने आए हों। इसके पहले जब प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। तब भी सचिन पायलट प्रचार के लिए मध्य प्रदेश पहुंचे थे। उस वक्त पायलट ने सिंधिया के गढ़ ग्वालियर चंबल में कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार किया था। जानकारों के अनुसार, नवंबर 2015 में कांग्रेस ने मालवा-निमाड़ में रतलाम उपचुनाव लोकसभा हुआ था। तब भी पायलट कांतिलाल भूरिया के लिए प्रचार के लिए पहुंचे थे। क्योंकि रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर गुर्जर वोटर अहम थे, जिन्हें साधने में सचिन पायलट ने अहम भूमिका निभाई थी। इस बार खंडवा सीट पर चुनाव हो रहा है जहां कांग्रेस 2015 की कहानी दौहारने की कोशिश में लगी है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने सचिन पायलट को प्रचार के लिए उतारा हैं।
