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Honeytrap Case: हाईकोर्ट ने कहा जब्त सीडी कोर्ट में चलाई जा सकती है, आरोपी के वकील ने आपत्ति लेकर कहा-सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
Thu, 02 Jun 2022 05:20 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Thu, 02 Jun 2022 05:20 PM IST
सार
मप्र के बहुचर्चित हनीट्रैप केस में हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि जब्त सीडी को कोर्ट में दिखाया जा सकता है। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने आपत्ति ली है। कहा है कि यह आदेश मंजूर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट की विशेष न्यायालय को आदेश दिए हैं कि जिस इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को पुलिस ने जब्त किया है उसे कोर्ट के सामने सभी आरोपियों व अधिवक्ताओं की उपस्थिति में दिखाया जा सकता है। हालांकि आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति ली है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।
दरअसल बुधवार को हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया है। इस पर अधिवक्ता यावर खान ने आपत्ति ली। यावर खान ने कहा कि इस फैसले से हम असंतुष्ट हैं। हमें सभी आरोपियों को सभी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज जैसे पैन ड्राइव, सीडी, देने की बात कही थी। लेकिन इस आदेश को लेकर हम जल्द सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हनी ट्रैप प्रकरण में एसआईटी द्वारा जो सीडी, पैनड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए गए थे उनकी एफएसएल जांच कराई गई थी। एफएसएल जांच होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के वकीलों को इसकी जांच की सीडी देने से इनकार किया था। जिला न्यायधीश एट्रोसिटी एक्ट रेणुका कंचन की कोर्ट ने यह आदेश दिए थे कि जब्त सीडी व जांच रिपोर्ट की एक प्रति आरोपी के वकीलों को दी जाए। शासन ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने पुलिस और आरोपी के वकीलों के तर्क सुनकर आदेश सुरक्षित रखा था। बुधवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने आदेश दिए है कि जब्त सीडी, पेनड्राइव और समस्त इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जिला न्यायाधीश एट्रोसिटी कोर्ट इंदौर के समक्ष सीडी चलाकर आरोपी के अधिवक्ता उसका अवलोकन कर सकते हैं। इस पर अधिवक्ता खान ने कहा कि हम इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
यह है हनीट्रैप केस
17 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में हरभजन सिंह ने बताया था कि उन्हें 29 साल की आरती दयाल और उसकी साथी महिलाएं ब्लैकमेल कर रही हैं। इंजीनियर हरभजन सिंह की 3 करोड़ रुपये मांगने की शिकायत के बाद भोपाल और इंदौर पुलिस ने कार्रवाई कर ब्लैकमेलिंग करने वाली पांच महिलाओं श्वेता स्वप्निल जैन, श्वेता विजय जैन, आरती दयाल, बरखा सोनी और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था। इस मामले की जांच में एसआईटी ने आरोपी महिलाओं से सीडी, मोबाइल, पैन ड्राइव सहित काफी सामान जब्त किया था। इनकी जांच पुलिस ने अपनी ही लैब में करवाई है। इसे कोर्ट ने अनुचित मानते हुए जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को हैदराबाद स्थित लैब में जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए थे।
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दरअसल बुधवार को हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया है। इस पर अधिवक्ता यावर खान ने आपत्ति ली। यावर खान ने कहा कि इस फैसले से हम असंतुष्ट हैं। हमें सभी आरोपियों को सभी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज जैसे पैन ड्राइव, सीडी, देने की बात कही थी। लेकिन इस आदेश को लेकर हम जल्द सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हनी ट्रैप प्रकरण में एसआईटी द्वारा जो सीडी, पैनड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए गए थे उनकी एफएसएल जांच कराई गई थी। एफएसएल जांच होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के वकीलों को इसकी जांच की सीडी देने से इनकार किया था। जिला न्यायधीश एट्रोसिटी एक्ट रेणुका कंचन की कोर्ट ने यह आदेश दिए थे कि जब्त सीडी व जांच रिपोर्ट की एक प्रति आरोपी के वकीलों को दी जाए। शासन ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने पुलिस और आरोपी के वकीलों के तर्क सुनकर आदेश सुरक्षित रखा था। बुधवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने आदेश दिए है कि जब्त सीडी, पेनड्राइव और समस्त इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जिला न्यायाधीश एट्रोसिटी कोर्ट इंदौर के समक्ष सीडी चलाकर आरोपी के अधिवक्ता उसका अवलोकन कर सकते हैं। इस पर अधिवक्ता खान ने कहा कि हम इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
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यह है हनीट्रैप केस
17 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में हरभजन सिंह ने बताया था कि उन्हें 29 साल की आरती दयाल और उसकी साथी महिलाएं ब्लैकमेल कर रही हैं। इंजीनियर हरभजन सिंह की 3 करोड़ रुपये मांगने की शिकायत के बाद भोपाल और इंदौर पुलिस ने कार्रवाई कर ब्लैकमेलिंग करने वाली पांच महिलाओं श्वेता स्वप्निल जैन, श्वेता विजय जैन, आरती दयाल, बरखा सोनी और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था। इस मामले की जांच में एसआईटी ने आरोपी महिलाओं से सीडी, मोबाइल, पैन ड्राइव सहित काफी सामान जब्त किया था। इनकी जांच पुलिस ने अपनी ही लैब में करवाई है। इसे कोर्ट ने अनुचित मानते हुए जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को हैदराबाद स्थित लैब में जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए थे।
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