मध्यप्रदेश: मेडिकल विश्वविद्यालय में हुए अंक घोटाले और अनियमितताओं पर हाईकोर्ट का रुख सख्त
मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में अंक घोटाले और अन्य अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
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निर्धारित शुल्क लेने के बावजूद भी स्पॉट वैल्यूएशन नहीं करवाए जाने के खिलाफ आठ मेडिकल छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि इस संबंध में दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस शील नागू और पुरुषेंद्र कौरव की पीठ ने निष्पक्ष जांच के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में अवगत करवाने के निर्देश जारी किए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।
निजी डेंटल मेडिकल कॉलेज के बीडीएस फाइनल ईयर के स्टूडेंट राजेंद्र कैथवास व अन्य सात की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी ने उनका रिजल्ट एक जून 2021 को जारी किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने चार जून 2021 को नोटिफिकेशन जारी किया था कि छात्र स्पॉट वैल्यूएशन के लिए दो हजार रुपये शुल्क जमा कर आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने शुल्क जमा कर 14 जून 2021 को आवेदन किया था। आवेदन किए तीन माह से अधिक समय गुजर गया लेकिन अब तक स्पॉट वैल्यूएशन नहीं कराया गया है।
याचिका की सुनवाई के बाद पीठ ने उक्त निर्देश जारी किए। याचिका में कहा गया था कि मेडिकल विश्वविद्यालय में व्यापमं से बड़ा घोटाला चल रहा है। विश्वविद्यालय ने एक ऐसी कंपनी को परीक्षा के आयोजन व रिजल्ट बनाने का ठेका दिया था, जिसके खिलाफ आगरा मेडिकल विश्वविद्यालय ने अंकों की गड़बड़ी करवाने के मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है। यूनिवर्सिटी के पास याचिकाकर्ता छात्रों का डाटा ही नहीं है। जिसके कारण वह स्पॉट वैल्यूएशन नहीं करवा नहीं है। ब्लैक लिस्ट कंपनी को अंक घोटाले और अनियमिकताओं के निलंबित कर दिया गया है।
