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Gwalior News: फर्जी सर्टिफिकेट देकर 12 साल नौकरी करता रहा मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर, अब हाईकोर्ट ने हटाया

Tue, 01 Apr 2025 05:24 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: ग्वालियर ब्यूरो Updated Tue, 01 Apr 2025 05:24 PM IST
सार

फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में आने के बाद 12 साल से नौकरी कर रहे गौरव भार्गव नामक एक मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर को हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है।

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Gwalior News Malaria technical supervisor worked for 12 years by giving fake certificate removed by High Court
एमपी हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में आने के बाद 12 साल से नौकरी कर रहे गौरव भार्गव नामक एक मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर को हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है। नितिन गौतम और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये खुलासा हुआ कि गौरव ने जिस प्रमाण पत्र को पेश कर चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त अंक प्राप्त किए, वह फर्जी था। मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर के पद पर गौरव भार्गव की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने दूषित बताते हुए पद रिक्त घोषित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के चलते अब गौरव के पद पर नए सिरे से भर्ती हो सकती है।

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यह मामला 2013 में मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर के पद पर हुई भर्ती की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इस प्रक्रिया को दूषित बताते हुए अभ्यर्थी नितिन गौतम और अन्य ने याचिका दायर करते हुए मुकेश, विनोद कुमार शर्मा दाउदयाल, गौरव भार्गव और कृष्ण कुमार शर्मा के चयन को चुनौती दी थी। याचिका में कोर्ट को बताया गया था कि लिखित परीक्षा में ज्यादा अंक प्राप्त करने के बाद भी उनका चयन केवल इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि साक्षात्कार में उन्हें जानबूझकर कम अंक दिए गए। कोर्ट को बताया गया कि नियुक्ति के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें स्थानीय कलेक्टर, सीएमएचओ व स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी बतौर सदस्य शामिल थे।
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विशेषकर गौरव की नियुक्ति के मामले में ये खुलासा हुआ कि उसने जिला अस्पताल शिवपुरी में 24 जनवरी से लेकर 24 अप्रैल 2006 तक बतौर ड्रेसर सेवाएं दीं। इसके संबंध में तत्कालीन सीएमएचओ ने 25 अप्रैल 2006 को प्रमाण पत्र जारी किया। हालांकि, आरटीआई से प्राप्त जानकारी में तथ्य झूठा निकला। इस पर हाईकोर्ट को बताया गया कि गौरव ने बतौर वॉलंटियर सेवाएं दी थीं। यह तथ्य प्रकाश में आते ही हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ड्रेसर जैसे महत्वपूर्ण पद पर कोई वॉलंटियर के रूप में कैसे सेवाएं दे सकता है? 

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