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MP: बैंक अधिकारियों से लेकर सब्जी वाला भी ठगी में शामिल, किराए पर खाते, तीन माह में करोड़ों निकाले; मामला क्या

Mon, 21 Apr 2025 09:41 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: उदित दीक्षित Updated Mon, 21 Apr 2025 09:41 PM IST
सार

बीते साल में डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के हजारों मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन, ग्वालियर में ठगी के मामले में जो बात सामने आई उससे पुलिस भी हैरान है। जांच में पता चला कि ठगों के रैकेट में निजी बैंक के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।

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Gwalior Digital Arrest Case Update bank officials  and vegetable vendors involved in fraud
पुलिस कर रही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ। (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

Gwalior Digital Arrest Case: ग्वालियर में रामकृष्ण मिशन के सचिव के साथ हुई मप्र की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। घटना के एक हफ्ते के भीतर ही ग्वालियर पुलिस की एसआईटी ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें ज्यादातर निजी बैंक के कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने खुलासा किया है कि ठगों के तार एक निजी बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों से जुड़े हुए हैं, जो खाते से पैसे निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर करते थे।

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दअरसल, पिछले लंबे समय से डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के हजारों मामले देशभर में सामने आ चुके हैं। लेकिन, ग्वालियर में ठगी के मामले में जो बात सामने आई उससे पुलिस भी हैरान है कि ठगों के इस रैकेट में निजी बैंक के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।

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बता दें कि पिछले हफ्ते ग्वालियर में रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव सुप्रियदीपतानंद को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने के नाम पर 26 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर दो करोड़ 52 लाख की ठगी की गई थी। शिकायत के बाद ग्वालियर पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया। सबसे पहले टीम ने यह पता लगाया कि पैसा कहां और किसके खाते में ट्रांसफर किया गया है। इस दौरान सामने आया कि उज्जैन जिले के बंधन बैंक में 10 लाख रुपए ट्रांसफर हुए हैं। इसके बाद एसआईटी ने उज्जैन में बड़ा एक्शन लिया है और बैंक से जुड़े 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड उदयराज है, जिसने पूरी योजना बनाई थी। 

सबसे पहले जानिए पुलिस ने किसे क्यों गिरफ्तार किया? 

  • विश्वजीत बर्मन- बंधन बैंक का शाखा प्रबंधक, ठगों के कहने पर बैंक में खाता खुलवाता था।
  • शुभम राठौड़- बैंक के ऑफिस बॉय हिमांशु से मिलकर ठगों के लिए फर्जी खाता खोलता था।
  • काजल जैसवाल- बैंक का कैशियर, ठगों के खातों से रुपए निकालने और ट्रांसफर करने का काम करती थी।
  • तुषार गोमे- ठगी का मास्टरमाइंड उदयराज का साथी है। 3 महीने में बैंक के खातों से तीन करोड़ रुपए निकाले। 
  • राहुल कहार- सब्जी विक्रेता है, इसके खाते में ही स्वामी से ठगे गए लगभग 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए।
  • किशोर विनाज्ञा- ठगों के खातों से रुपए निकालने और ट्रांसफर करने का काम करता था।

 

किराए पर ले रखे थे खाते, बैंक कर्मचारी ठगों को देते थे पुलिस की सूचना 
जानकारी के अनुसार, गिरफ्त में आए बैंक कर्मचारी पुलिस की सूचना ठगों तक पहुंचाने का काम भी करते थे। डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले ये साइबर क्रिमिनल बैंक अधिकारियों से मिलकर खाता खुलवाने के लिए 5000 देते थे और हर ट्रांजैक्शन पर खातेदार को भी रकम पहुंचाते थे, यानी किराए पर खाते लेते थे। खाते से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज– पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के अधिकार अपने पास ही रखते थे। सभी बैंक कर्मचारी पुलिस की रिमांड पर हैं, उनसे  पूछताछ की जा रही है। 

एक कंपनी के खाते में भेजे 1.30 करोड़ 
पुलिस के अनुसार, उज्जैन के अलावा लगभग एक करोड़ 30 लाख रुपए की राशि इलाहाबाद के इंडसइंड बैंक में एक कंपनी के खाते में भी ट्रांसफर की गई है। यह खाता एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर है, एसआईटी कंपनी को लेकर भी जांच कर रह है।  

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