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Gwalior: ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, करोड़ों की जमीन बेचने पर लगाई रोक

Mon, 11 Dec 2023 08:56 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 11 Dec 2023 08:56 PM IST
सार

संपत्ति को लेकर चल रहे एक पुराने मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सिंधिया परिवार को झटका दिया है। करोड़ों की जमीन को अपनी बताकर बचे रहे सिंधिया पर कोर्ट ने रोक लगाई है।

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Gwalior: Court refuses to sell land to Jyotiraditya Scindia family
ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार को कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है।  सिंधिया परिवार एक संपत्ति को अपनी बताकरबिक्री कर रहा था, जिस पर कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
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ग्वालियर का सिंधिया परिवार कई प्रकार के प्रॉपर्टी डिस्प्यूट में उलझा हुआ है। ऐसी ही एक संपत्ति विवाद में न्यायालय का फैसला सुनाया है। न्यायालय में निर्णय हुआ है कि महल गांव में यशवंत राव राणे की जमीन को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी माताजी माधवी राजे सिंधिया, उनकी बहन चित्रांगदा राजे और नारायणन बिल्डर्स एवं डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, अपनी संपत्ति बताकर बेच रहे हैं। न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी है।
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ग्वालियर में रियासत काल में सिंधिया परिवार के शाही महल जयविलास पैलेस का परिसर बहुत विशाल था। इसमें शिकारगाह, हैलीपेड, कृषिभूमि आदि भी थी, लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात सिंधिया परिवार ने इसके आसपास की भूमि में पॉश कॉलोनियां विकसित कर जगह बेच दी, जो सिंध विहार, चेतकपुरी, वसंत विहार, चेतकपुरी आदि कॉलोनियां के नाम से जानी जाती हैं।
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सिंधिया परिवार ने ग्वालियर में चेतकपुरी के सामने महल गांव में सर्वे नंबर 1211/1, 1211/2 एवं 1211/3 की कुल 6 बीघा 4 विस्वा जमीन नारायण बिल्डर एंड डेवलपर को बेचने का सौदा किया तो इसके स्वामित्व को लेकर एक वाद दायर किया गया। यशवंत राव राने के परिवार ने इस जमीन को अपना बताते हुए इसका भूस्वामी बताया और सिंधिया परिवार के विक्रय अनुबंधों को अवैद्य बताते हुए की जा रही बिक्री पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी।

राणे ने अपील दायर की
वादी के एडवोकेट आरके सोनी का कहना है कि इस जमीन को लेकर राणे के प्रस्तुत एक वादपत्र 22 फरवरी 2018 को निरस्त कर दिया गया था, जिसे चुनौती देते हुए राणे ने यह अपील दायर की थी। यशवंत राव राणे ने कोर्ट को बताया कि उक्त सर्वे नंबर की 6 बीघा 4 विस्वा जमीन मेरे पिता श्रीकृष्णराव राणे के स्वामित्व की थी। उनके देहांत के बाद जमीन का एकमात्र मालिक मैं हूं। पिता की मृत्यु के वक्त 1952 में नाबालिग था और उसके बाद सिंधिया परिवार ने उनके पुश्तैनी स्वामित्व वाली जमीन अपने नाम करवा ली। इसका गलत तरीके से नामांतरण भी करवा लिया।

यशवंत राव राणे वायुसेना से रिटायर्ड हैं और यह केस लड़ रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मेरे स्वामित्व की उस जमीन का पंजीयन 1970-71 में श्रीमंत मातेश्वरी गजराराजे चेरिटेबल ट्रस्ट के नाम से दर्ज कर दिया गया, जोकि पूरी तरह से गलत था। इतना ही नहीं इसके बाद उक्त भूभाग को ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी मां माधवीराजे और चित्रागंदा सिंह द्वारा नारायणन बिल्डर्स एवं डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 2006 में बेच दिया गया, जिसका उन्हें कोई अधिकार ही नहीं था, जबकि इसके स्वामित्व का विवाद न्यायालय में विचाराधीन था।


एडवोकेट सोनी ने बताया कि द्वादशम सत्र न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश अजय सिंह ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद इस केस में अपना निर्णय सुनाया है। उन्होंने याचिकाकर्ता  यशवंत राव राणे को इस जमीन का स्वामी घोषित कर दिया है। इसी के साथ आदेश दिया है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी माताजी माधवी राजे सिंधिया, उनकी बहन चित्रांगदा राजे और नारायणन बिल्डर्स एवं डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, जमीन का विक्रय नहीं कर सकते हैं। ग्वालियर के जिला कलेक्टर एवं नगर निगम ग्वालियर के कमिश्नर को आदेश का पालन करने के लिए कहा गया है।
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