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उज्जैन में कचरे से निकला सोना: गलती से कचरे के साथ वाहन में चली गई सोने की अंगुठियां, मशक्कत के बाद मिली
Tue, 10 May 2022 04:14 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Tue, 10 May 2022 04:14 PM IST
सार
क्या आपने कभी ये सुना है कि कचरे के ढेर से सोना निकला हो। उज्जैन में यह हुआ है। यहां एक परिवार ने गलती से कचरे के साथ कचरा वाहन में सोने की अंगुठियां डाल दी। बाद में कचरा वाहन ढूंढा। ट्रांसफर स्टेशन पर कचरे के ढेर में खोजबीन की, तब अंगुठियां मिली।
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कचरे के ढेर में अंगुठियां तलाशते परिजन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
अगर आप भी कचरा वाहन में कचरा डालते हैं और सावधानी नहीं रखते तो यह खबर आपके लिए है। उज्जैन में एक परिवार के साथ ऐसा ही हुआ जब कचरा वाहन में कचरे के साथ सोने की अंगुठियां भी डाल दी। जब पता चला तो होश उड़ गए। बाद में कचरे के ढेर से घंटों की मशक्कत के बाद अंगुठियां मिली तब परिवार ने राहत की सांस ली।
दरअसल शहर के सांदीपनी नगर में रहने वाले सेंगर परिवार के साथ यह घटना घटी। यहां रहने वाले वीवीएस सेंगर के छोटे भाई की कुछ दिन पहले शादी थी। घर में मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था। रविवार रात को सेंगर की बहन सीमा चौहान खाना बनाने की तैयारी कर रहीं थीं। आटा गूथने के लिए उन्होंने अपने हाथ में पहनी सोने की तीन अंगुठियां उतारकर पानी से भरे लोटे में डाल दी। खाना बनाने के बाद उन्हें ध्यान नहीं रहा और लोटे का पानी वॉश बेसिन में डाल दिया। अगले दिन सुबह कचरा वाहन घर के सामने आया। चूंकि कचरा डालने की जल्दी रहती है इस कारण बेसिन साफ कर वहां रखी कचरा सामग्री वाहन में डाल दी। इसमें दो अंगुठियां भी चली गई। थोड़ी देर बाद बेसिन में एक अंगुठी दिखी तो सीमा से बात की। उसने बताया कि एक नहीं तीन अंगुठियां थी। घरवालों को समझने में देर नहीं लगी कि बाकी की दो अंगुठियां कचरा वाहन में चली गई है। इसके बाद सब घबरा गए क्योंकि कचरा वाहन भी जा चुका था और कचरे के ढेर के बीच छोटी सी अंगुठियां तलाशाना असंभव जैसा ही था, लेकिन परिजन ने हिम्मत नहीं हारी। कचरा वाहन की तलाश शुरू की। आधे घंटे बाद कचरा वाहन मिला। हालांकि जब वाहन में देखा तो पाया कि उसमें ढेर सारा कचरा जमा हो गया है। सेंगर ने वाहन चालक को पूरी घटना बताई और सहयोग मांगा। वाहन चालक ने भी ईमानदारी का परिचय देते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर उक्त वाहन का कचरा अलग से खाली करवाने की बात कही।
डेढ़ घंटे की तलाश के बाद मिली अंगुठियां
एमआर-5 ट्रांसफर स्टेशन पर वाहन ले जाया गया और वहां जसवंतसिंह को घटना की जानकारी दी। उन्होंने उक्त वाहन का पूरा कचरा अलग स्थान पर खाली करवाया। इसके बाद सेंगर परिवार के आधा दर्जन से अधिक सदस्य कचरे में अंगुठियों को तलाशते रहे। कर्मचारियों की मदद से करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों अंगुठियां मिल गईं। इसके बाद सबने राहत की सांस ली। सेंगर ने बताया कि वे लोग उम्मीद छोड़ चुके थे लेकिन कचरा कलेक्शन वाहन पर मौजूद कर्मचारी व ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के ट्रांसफर स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों ने काफी सहयोग किया। कर्मचारियों ने बिना किसी स्वार्थ के कचरे में बारीकी से खोजबीन की जिसका का नतीजा रहा कि दोनों अंगूठियां मिल गई। दोनो अंगूठियों की कीमत लगभग 40 हजार है। बताया कि रात में सभी ने तरबूज खाया था। घर में छोले भटूरे बने थे। नारियल पानी भी पीया था। सुबह कचरे में नारियल, तरबूज के छिलके और छोले भटूरे भी फेंके थे, इसी को आधार बनाकर कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर ग्लोबल टीम के सदस्यों ने परिजनों के साथ गाड़ी के कचरे में खोजबीन की। इससे अंगुठियों को ढूंढने में आसानी हुई।
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दरअसल शहर के सांदीपनी नगर में रहने वाले सेंगर परिवार के साथ यह घटना घटी। यहां रहने वाले वीवीएस सेंगर के छोटे भाई की कुछ दिन पहले शादी थी। घर में मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था। रविवार रात को सेंगर की बहन सीमा चौहान खाना बनाने की तैयारी कर रहीं थीं। आटा गूथने के लिए उन्होंने अपने हाथ में पहनी सोने की तीन अंगुठियां उतारकर पानी से भरे लोटे में डाल दी। खाना बनाने के बाद उन्हें ध्यान नहीं रहा और लोटे का पानी वॉश बेसिन में डाल दिया। अगले दिन सुबह कचरा वाहन घर के सामने आया। चूंकि कचरा डालने की जल्दी रहती है इस कारण बेसिन साफ कर वहां रखी कचरा सामग्री वाहन में डाल दी। इसमें दो अंगुठियां भी चली गई। थोड़ी देर बाद बेसिन में एक अंगुठी दिखी तो सीमा से बात की। उसने बताया कि एक नहीं तीन अंगुठियां थी। घरवालों को समझने में देर नहीं लगी कि बाकी की दो अंगुठियां कचरा वाहन में चली गई है। इसके बाद सब घबरा गए क्योंकि कचरा वाहन भी जा चुका था और कचरे के ढेर के बीच छोटी सी अंगुठियां तलाशाना असंभव जैसा ही था, लेकिन परिजन ने हिम्मत नहीं हारी। कचरा वाहन की तलाश शुरू की। आधे घंटे बाद कचरा वाहन मिला। हालांकि जब वाहन में देखा तो पाया कि उसमें ढेर सारा कचरा जमा हो गया है। सेंगर ने वाहन चालक को पूरी घटना बताई और सहयोग मांगा। वाहन चालक ने भी ईमानदारी का परिचय देते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर उक्त वाहन का कचरा अलग से खाली करवाने की बात कही।
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डेढ़ घंटे की तलाश के बाद मिली अंगुठियां
एमआर-5 ट्रांसफर स्टेशन पर वाहन ले जाया गया और वहां जसवंतसिंह को घटना की जानकारी दी। उन्होंने उक्त वाहन का पूरा कचरा अलग स्थान पर खाली करवाया। इसके बाद सेंगर परिवार के आधा दर्जन से अधिक सदस्य कचरे में अंगुठियों को तलाशते रहे। कर्मचारियों की मदद से करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों अंगुठियां मिल गईं। इसके बाद सबने राहत की सांस ली। सेंगर ने बताया कि वे लोग उम्मीद छोड़ चुके थे लेकिन कचरा कलेक्शन वाहन पर मौजूद कर्मचारी व ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के ट्रांसफर स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों ने काफी सहयोग किया। कर्मचारियों ने बिना किसी स्वार्थ के कचरे में बारीकी से खोजबीन की जिसका का नतीजा रहा कि दोनों अंगूठियां मिल गई। दोनो अंगूठियों की कीमत लगभग 40 हजार है। बताया कि रात में सभी ने तरबूज खाया था। घर में छोले भटूरे बने थे। नारियल पानी भी पीया था। सुबह कचरे में नारियल, तरबूज के छिलके और छोले भटूरे भी फेंके थे, इसी को आधार बनाकर कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर ग्लोबल टीम के सदस्यों ने परिजनों के साथ गाड़ी के कचरे में खोजबीन की। इससे अंगुठियों को ढूंढने में आसानी हुई।
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