सुषमा को जीत के लिए अपनाने होंगे ये पांच सूत्र
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भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज विदिशा से दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां से चार बार लोकसभा चुनाव जीता है। लेकिन क्या उनकी लड़ाई इतनी आसान या एकतरफा है? क्या वह दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मणसिंह को हरा पाएंगी?
सुषमा स्वराज राष्ट्रीय स्तर की नेता भले ही हों, विदिशा में चुनाव जीतने के लिए उन्हें पांच सूत्र अपने पक्ष में लाने होंगे। वह राष्ट्रीय हैसियत के बाद भी इन पांच सूत्रों को हल किए बिना चुनाव नहीं जीत सकतीं। उनकी जीत में पांच नेता अहम भूमिका अदा करने वाले हैं।
'जहां भी जाएं नरेंद्र मोदी का जिक्र है'
देश के बाकी हिस्सों की तरह ही विदिशा संसदीय क्षेत्र में भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखने वाले समर्थकों की बड़ी संख्या है।
सुषमा स्वराज भले ही अपने भाषणों में नरेंद्र मोदी का जिक्र करने से बचती हों, लेकिन भाजपा के कार्यकर्ता भी कहते हैं कि यह वोट अप्रत्यक्ष रूप से नरेंद्र मोदी को है।
भाजपा को वोट देते आ रहे रायसेन के नितिन कांकर का कहना है कि आप जहां भी जाएं नरेंद्र मोदी का जिक्र है। सारे लोग भाजपा को वोट नहीं दें, तब भी नरेंद्र मोदी की भारी लोकप्रियता है।
जीत के लिए चाहिए शिवराज का समर्थन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा सीट 4 बार जीती है। विदिशा विधानसभा उन्होंने केवल 11 हजार मतों के अंतर से जीती, लेकिन यदि उनके अलावा कोई और वहां से चुनाव लड़ता तो भाजपा यह चुनाव हार जाती।
शिवराज सिंह चौहान ने बुदनी विधानसभा का चुनाव बड़े अंतर से जीता था। बुदनी क्षेत्र में शिवराज सिंह चौहान किरार पटेलों के सबसे बड़े नेता हैं।
सुषमा की जीत में बुदनी प्रमुख भूमिका अदा करने वाला है। स्वराज को विदिशा से चुनाव जीतने के लिए शिवराज सिंह चौहान का पूरा समर्थन चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि विदिशा विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री की पत्नी साधना सिंह को टिकट नहीं मिलने में सुषमा स्वराज की राय का बड़ा महत्व था। दूसरी सीटों पर भी शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता निर्विवाद है।
उमा भारती की लोधी समाज में खासी पकड़
झांसी से चुनाव लड़ रही उमा भारती की लोधी समाज में खासी पकड़ है। उनके बाद प्रहलाद पटेल प्रदेश में लोधियों के दूसरे बड़े नेता हैं।
विदिशा संसदीय क्षेत्र में लोधी मतदाताओं की संख्या करीब एक लाख है। यह भाजपा के पक्ष में मतदान करने वाला मतदाता ही है।
उमा भारती को सुषमा स्वराज के विरोधी कैंप का माना जाता है। उमा भारती लोधी बहुल क्षेत्रों में कई बार स्पिन डाल देती हैं। उनका इशारा भी विपरीत असर डाल सकता है।
सुरेंद्र पटवा की मदद जरूरी
पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा ने एक सभा में सुषमा स्वराज को उप प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता दिया था।
वह भोजपुर विधानसभा से सुरेश पचौरी के खिलाफ 20,000 की बड़ी लीड के साथ जीते थे। यदि वह सुधीर गुप्ता की मदद करने मंदसौर चले जाते हैं तो सुषमा स्वराज को उनकी मदद नहीं मिल पाएगी।
मंदसौर से उम्मीदवार सुधीर गुप्ता को टिकट दिलाने में सुरेंद्र पटवा की अहम भूमिका रही है।
राघवजी पार्टी से खासे नाराज
पूर्व वित्तमंत्री राघवजी पार्टी से खासे नाराज हैं। वह विदिशा से सांसद रहे हैं। विदिशा विधानसभा के अलावा कई क्षेत्रों में उनकी अच्छी पैठ रही है।
विदिशा से लगी हुई विधानसभा में कांग्रेस के टिकट पर निशंक जैन ने चुनाव जीता है। सुषमा स्वराज को जैन मतों और विदिशा के स्थानीय मतदाताओं के एक वर्ग को अपने साथ लाने के लिए राघवजी को राजी करना होगा।
