दिग्विजय ने दी शिवराज सिंह को टेंशन
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने व्यापमं घोटाले मामले में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र को याचिका मानकर स्वीकार कर लिया है। अब 7 जुलाई को इस पर सुनवाई होगी।
वहीं दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनके रिश्तेदार (पत्र में साले साहब उल्लेखित) संजय सिंह मसानी और उनकी पत्नी दीप्ति सिंह को अनुचित तरीके से ठेकेदारी के लाइसेंस और ठेके देकर रातोंरात करोड़पति बनाए जाने के आरोप लगाए हैं।
दिग्विजय सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को संबोधित पत्र लिखा है। पत्र में आरोप लगाए हैं कि 21 मई 2008 को मुख्यमंत्री के साले संजय सिंह मसानी की कंपनी नीलाक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. ने 1 करोड़ 6 लाख रुपए के काम का अनुभव बताते हुए ए-3 कैटेगरी लाइसेंस का आवेदन दिया और उन्हें 50 लाख के सिंगल कार्य का पर्याप्त अनुभव नहीं होने के बाद भी 24 मई 2008 को ही लाइसेंस दे दिया गया।
मुख्यमंत्री के साले पर लगा है आरोप
उसके बाद 26 मई 2008 को 5 करोड़ 6 लाख रुपए के अनुभव के आधार पर उन्हें ए-4 कैटेगरी के लाइसेंस का आवेदन दिया गया।
पांच दिन बाद 2 जून 2008 को ही उन्हें ए-4 कैटेगरी का लाइसेंस मिल गया। जबकि कंपनी की मूल पूंजी 8 लाख रुपए थी। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि वास्तव में कोई काम नहीं किया गया।
दिग्विजय ने आरोप लगाया कि एक साल बाद 18 मई 2010 को 900 लाख रुपए के अनुभव का काम बताया गया और ए-5 कैटेगरी के लाइसेंस का आवेदन किया गया। सीए ने 1500 लाख रुपए का काम नहीं पाए जाने पर आपत्ति लगाई थी, फिर भी लाइसेंस दे दिया गया।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए हैं कि अपने साले की कंपनी को पर्याप्त अनुभव नहीं होने के बाद भी रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस दिए गए। कंपनी ने फर्जी दस्तावेज लगाए। आयकर और प्रोफेशनल टैक्स भी नहीं चुकाया गया है।
दिग्विजय का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने पद का बेजा इस्तेमाल करके अपने साले साहब को करोड़ों के ठेके दिलाए हैं। इसलिए उन्हें अपना वादा पूरा करते हुए राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।
