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Damoh: एक माह से अंधेरे में डूबा गांव, फसल सूखने से किसान परेशान, बोले- 15 किमी दूर जाकर पिसा रहे हैं गेहूं

Mon, 08 Jan 2024 07:42 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 08 Jan 2024 07:42 PM IST
सार

दमोह के हटा ब्लॉक में खराब ट्रांसफार्मर ले गए बिजली कर्मचारी। एक माह बाद भी नया लेकर लौटे नहीं। एक माह से पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ है।

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Villagers upset due to no electricity in Damoh's Hata block for a month
दमोह हटा ब्लॉक के ग्रामीण। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

दमोह के हटा ब्लॉक की घोघरा पंचायत के कारीबरा गांव में एक महीने से लाइट नहीं है, जिसके कारण आधा सैकड़ा परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। आलम ये है कि मोबाइल बंद पड़े हुए हैं। ग्रामीण पेट भरने के लिए 15 किमी दूर से गेहूं पिसाकर ला रहे हैं।

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आज के समय में बिजली आम आदमी की मुख्य जरूरत बन गई है। इसके बिना रहना संभव नहीं है। बिजली के बिना रोजमर्रा के सारे काम रुक जाते हैं, क्योंकि आज घर के लगभग काम बिजली से ही पूरे हो पाते हैं। वहीं, दमोह के हटा ब्लॉक के लोग पिछले एक महीने से बिना बिजली के परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
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हटा ब्लॉक के बिजली वितरण केंद्र मडियादो अंर्तगत आने वाले कई गांव में बिजली समस्या बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि पर्याप्त लाइट न मिलने के कारण उनकी फसलें सूख गईं। क्षेत्र के चौरईया, अमझिर आदि गांव में बिजली समस्या बनी हुई है। सोमवार को कारीबरा गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने बिजली कार्यालय मडियादो पहुंचकर लाइट दो के नारे लगाए और हंगामा किया। 
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आदिवासी बाहुल्य गांव के लोगों का कहना है कि उनके द्वारा समय से नियम अनुसार टीसी भी कटा ली है, लेकिन लाइट नहीं मिल रही। बिजली कार्यालय के लगातार चक्कर लगा रहे, लेकिन कोई सुनाई नहीं हो रही है। 

दरअसल कारीवरा गांव में 25 केवी का ट्रांसफार्मर रखा था जो एक माह पहले खराब हो गया। लाइनमैन ने ट्रांसफार्मर नया रखने की बात कही थी और खराब ट्रांसफार्मर ले गए थे। एक माह से गांव में ट्रांसफार्मर नहीं है, जिसके कारण लाइट नहीं है। समय पर बिजली न मिलने के कारण फसलें सूख चुकी हैं। भागीरथ आदिवासी ने कहा कि उनके गांव में ट्रांसफार्मर रखा जाए, ताकि गांव का अंधेरा दूर हो और फसलों की सिचाई के लिए लाइट मिल सके। 


गांव में एक माह से लाइट न होने कारण ग्रामीण मोबाइल चार्ज नहीं कर पा रहे हैं। गेहूं पिसाई के लिए 15 किमी दूर चलकर मडियादो पहुंच रहे हैं। बबलू आदिवासी ने बताया कि कारीबरा गांव बफरक्षेत्र के जंगल में बसा गांव है, जहां जंगली हिंसक जानवर हैं। अंधेरे में डूबे गांव में कभी भी यह जानवर आ सकते हैं और अप्रिय घटना घट सकती है। वहीं कनिष्ठ अभियंता मडियादो महेंद्र राय ने बताया कि कारीवरा गांव के लिए मंगलवार तक ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

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