फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Damoh News ›   Damoh News: The tigress from Pench is liking Veerangana Rani Durgavati Tiger Reserve

Damoh News: पेंच से आई बाघिन को पसंद आ रहा वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, लगातार कर रही शिकार

Fri, 21 Feb 2025 01:51 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Fri, 21 Feb 2025 01:51 PM IST
सार

पेंच टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन बाघिन लगातार शिकार कर रही है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उसने इस क्षेत्र को अपना स्थायी रहवास बना लिया है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। 

विज्ञापन
Damoh News: The tigress from Pench is liking Veerangana Rani Durgavati Tiger Reserve
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में घूमती बाघिन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह पेंच टाइगर रिजर्व से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन यहां के माहौल में काफी घुलमिल गई है। बाघिन लगातार शिकार कर अपना पेट भर रही है। ऐसा लगने लगा है यह बाघिन भी यहां के जंगल को बहुत ज्यादा आबाद करेगी।

विज्ञापन


बता दें रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ऐसा रिजर्व क्षेत्र है, जहां की जलवायु और प्राकृतिक धरोहर जंगली जानवरों के रहवास का सबसे अच्छा स्थान है। यहां की जलवायु जानवरों के लिए फायदेमंद है। चाहे वह जानवर शाकाहारी हो या फिर मांसाहारी जो भी इस क्षेत्र में पहुंच जाता है वह अपना रहवास ही बना लेता है। यह प्रक्रिया वर्ष 2018 के बाद से लगातार देखते आ रहे हैं। जब यहां के नौरादेही अभ्यारण्य में पहली बार बाघ और बाघिन को लाया गया और छह साल के अंदर यहां 20 से अधिक बाघ हो गए। उनके भोजन की पर्याप्त व्यवस्था इस रिजर्व क्षेत्र में उपलब्ध है।
विज्ञापन


इन्होंने बना लिया रहवास
वर्ष 2018 में बाघिन राधा के दो महीने बाद एक बाघ को लाया गया था। उसको बाड़े में रखा गया था और दो दिन बाद ही उसने बाड़ा तोड़ लिया था, लेकिन वह स्थान छोड़कर नहीं भागा था। कजरी बाघिन जिसको बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लाया गया था उसे डोगरगांव रेंज के खापा नामक स्थान जो ब्यारमा नदी के समीप है वहां छोड़ा गया था। कजरी ने अपना स्थान तीसरे दिन ही छोड़ दिया था। उसके बाद वह कई दिनों तक दमोह जिले की सीमा में घूमती रही। बाद में तेजगढ़ रेंज के जंगली क्षेत्र में उसका रेस्क्यू किया गया और उसको उसके मूल स्थान पर छोड़ा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वीरांगना टाइगर रिजर्व में बनेगा बसेरा
बाघिन कजरी की हरकते देखने से ऐसा लग रहा था यहां बाघिन रुकेगी नहीं, लेकिन उसके बाद वह रुक गई और आज भी उसी रेंज में रुकी हुई है। अभी कुछ दिन पूर्व एक और बाघिन को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया। उसको नौरादेही में छोड़ा जो आज भी उसी क्षेत्र में रुकी हुई है। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि बाघिन अब वीरांगना टाइगर रिजर्व में अपना बसेरा बना लेगी।


यह है खासियत
वीरांगना टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सागर, दमोह, और नरसिंहपुर ज़िलों में फैला है और दमोह के तेंदुखेड़ा ब्लॉक का 80 प्रतिशत हिस्सा इस टाइगर रिजर्व में शामिल हो गया है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का सातवां बाघ टाइगर रिजर्व है। इस टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए बेहद अनुकूल वातावरण है और बेहतरीन रहवास के लिए स्थान है। गर्मियों से राहत पाने के लिए बड़ी-बड़ी नदी हैं, जिसमें बारह माह पानी भरा रहता है। बाघिन राधा, कजरी के बाद पेंच रिर्जव क्षेत्र से लाई गई बाघिन भी नौरादेही के जंगलों में रम गई है और अब वह यहीं रुकेगी, जिसकी उम्मीद विभाग के अधिकारी लगा रहे हैं। नौरादेही के उपवनमंडल अधिकारी प्रतीक दुबे ने बताया एन 6 को पेंच से वीरांगना टाइगर रिजर्व लाये दो सप्ताह होने को हैं। बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और अपने भोजन के लिए वह शिकार कर रही है। उसकी मॉनिटरिंग आईडी कॉलर से लगातार की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed