Damoh: महुआ का उत्पादन बढ़ाने और जंगल को आग से बचाने ग्रामीणों को बांटे निशुल्क नेट, 175 परिवारों को प्रशिक्षण
दमोह में दो दिवसीय प्रशिक्षण में जंगलों को सुरक्षित रखने और जैविक सामग्री को किस तरह से उपयोग में लेना चाहिए इसके बारे में बताया। जैविक सम्पदा से लोगों को क्या-क्या लाभ हो सकते हैं इसके संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई थी।
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दमोह जिले के वनांचल क्षेत्र में आदिवासी परिवार महुआ बीनकर ही अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे ही ग्रामीणों को समृद्ध बनाने और जंगल को आग से बचाने भोपाल के एनजीओ ने 175 परिवारों को ग्रीन नेट का वितरण किया है। ताकि महुआ जमीन पर न गिरे और लोगों को अधिक संख्या में महुआ मिल सके। तेंदूखेड़ा ब्लॉक के बगदरी गांव में एनजीओ ने महिला, पुरुषों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया। इनमें पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की ज्यादा उपस्तिथि रही। महुआ नीचे गिराने के लिए ग्रामीण पेड़ के नीचे आग लगा देते हैं। जिससे जंगल को नुकसान होता है। नेट बंधने से महुआ उसी में गिरेंगे।
प्रशिक्षण देने वाली संस्था भोपाल की है और वह तेंदूखेड़ा ब्लॉक के पांच गांव जिनमें तीपनी, बगदरी गुटरिया, डुकरस्ता, गुबरा में काम कर रही है। इन गांव के आदिवासी महिला, पुरुषों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह संस्था कार्य कर रही है। मंगलवार और बुधवार को यह प्रशिक्षण हुआ। इस दौरान रिटायर्ड डिप्टी रेंजर गणेश श्रीवास्तव भी मौजूद थे। प्रशिक्षण लेने के बाद ग्रामीणों ने सामग्री का उपयोग शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया निशुल्क सामग्री से उनको लाभ हो रहा है साथ ही जंगल की सुरक्षा व्यवस्था भी अच्छी बन रही है।
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175 परिवारों को मिली सामग्री
बगदरी गांव में यह प्रशिक्षण 25 और 26 मार्च को दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। दो दिवसीय प्रशिक्षण में जंगलों को सुरक्षित रखने और जैविक सामग्री को किस तरह से उपयोग में लेना चाहिए इसके बारे में बताया। जैविक सम्पदा से लोगों को क्या-क्या लाभ हो सकते हैं इसके संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई थी। प्रशिक्षण के बाद पांच गांव के 175 परिवारों को नेट देते हुए बताया कि जंगल की पैदावार जमीन पर गिरकर खराब हो जाती है उसको बचाया जा सकता है।
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नेट लगाने से हुआ फायदा
सोसाइटी फॉर रिसोर्स प्लानिंग डेवलपेमेंट एंड रिसर्च भोपाल द्वारा प्रशिक्षण देकर नेट का निशुल्क वितरण किया। जिन लोगों को यह सामग्री वितरण की गई थी वह गरीब है और मजदूरी करके परिवार का भरन पोषण करते हैं। इन दिनों ये लोग महुआ बीन रहे हैं। ग्रामीणों ने संस्था से मिली नेट को महुआ पेड़ के चारों ओर लगा दिया है। इससे पेड़ से गिरने वाले महुआ उसी नेट पर गिर रहे हैं इसमें महुआ भी ज्यादा मिल रहे हैं।
ग्रामीण मोहन आदिवासी निवासी तीपनी, गिरन आदिवासी डुकरस्ता, रज्जू आदिवासी बगदरी, खुज्जी आदिवासी गुटरिया, रुक्मणि गौड़ गुबरा ने बताया संस्था ने पहले हम लोगों को प्रशिक्षण दिया। उसके बाद निशुल्क नेट दिए। जिनको हम लोगों ने जमीन के बीच लगाकर पेड़ से गिरने वाले महुओ को नेट पर गिराया है। पहले की भांति ज्यादा उपज एकत्रित हुई, क्योंकि नेट के अभाव में काफी महुआ जमीन पर गिरकर खराब हो जाते थे, लेकिन नेट पर गिरने से वह सभी सुरक्षित है।
संस्था के ब्लॉक समन्वय गनेश श्रीवास्तव ने बताया सोसाइटी फॉर रिसोर्स प्लानिंग डेवलमेंट एंड रिसर्च संस्था भोपाल द्वारा दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में इस संस्था ने पांच गांव में कार्य शुरू किया है। इससे गांव के लोगों को अनेक तरह से लाभ होंगे और जंगल भी सुरक्षित रहेंगे। 175 ग्रामीणों को नेट वितरण किए थे उनका ग्रामीणों ने उपयोग किया है जिससे उनको लाभ होगा।
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