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Damoh News: दमोह में दुर्गम घाटियों पर बनी सड़कें जर्जर, नजर हटते ही बनता है दुर्घटना का खतरा

Sat, 20 Apr 2024 06:29 PM IST
Damoh bureau दमोह ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2024 06:29 PM IST
सार

दमोह के जबेरा की दुर्गम घाटियों में सड़कों के जर्जर होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासनिक अमला भी सड़क सुधारने के बजाय हादसे का इंतजार करता नजर आ रहा है। 

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In Damoh's Jabera, the roads built on inaccessible valleys have become dilapidated
घाटियों को काटकर इस तरह बनाई गई सड़क

विस्तार

दमोह जिले के जबेरा में दर्जनों सड़क मार्ग ऐसे हैं, जहां दुर्गम घाटियों पर बनी सड़कों पर जगह-जगह डेंजर पाइंट हैं। वाहन चलाते समय जरा भी नजर हटी तो दुर्घटना घट सकती है। इस पर शासन-प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है।

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इन सड़कों में माला पोंड़ी लिंक रोड की तेलन मार्ग घाटी, पटी सुरेखा, भजिया झांदा सहित बंसीपुर से गिदरा की दुर्गम पहाड़ियों को काटकर वर्षों पहले सड़के बनाई गई थी। इन सड़कों की मरम्मत नहीं होने से यह जर्जर हो चुकी हैं। आवागमन के लिए वनांचल में इकलौते मार्ग होने की वजह से खतरों के बीच आवागमन चालू है, लेकिन यह सड़के सुगम और सुरक्षित नहीं हैं। सड़कें तो बन गईं, लेकिन सड़कों में एक जैसी चौड़ाई, सीधी घाटी की चढ़ाई कम कर सुरक्षित व सुगम आवागमन की दृष्टि से इन सड़कों का निर्माण नहीं किया गया। नतीजन दुर्गम घाटियों में इन सड़कों पर घुमावदार अंधे मोड़ों पर सीधी खड़ी दुर्गम घाटी पर सपाट सड़कें कही नहीं दिखाई देती। शासन द्वारा इन घाटियों पर सड़कें बनाकर आवागवन के रास्तों के रुप में विकसित तो कर दिया, लेकिन सड़कों के जरिए इन दूरस्थ पिछड़े गांव का विकास का मार्ग आज भी कठिनाइयों से भरा है। इससे इन सड़क से घाटियों के नीचे बसे गांव के लोग आवागमन तो करते हैं, लेकिन इन सड़कों पर आने जाने में कतराते हैं। इन खतरनाक घाटियों से वाहन चालकों की जरा सी चूक यानि हादसा घटित होने का खतरा हर पल बना रहता है। यहां पर वाहनों का आवागमन पल-पल खतरे से होता है। पटी सुरेखा व भाजिया, झादा घाटी, तेलन मार्ग घाटी की स्तथि ऐसी है। दुर्गंम घाटियों को काटकर बनाए इन मार्गों के उपयोगिता की बात की जाए तो इन मार्गो से जबलपुर- कटनी जिला से जोड़ने वाले कम दूरी के हाइवे से हटकर शार्ट कट बहुउपयोगी मार्ग है। समय की मांग के साथ इन दुर्गंम घाटियों की सीधी चढ़ाई को कम करते हुए सड़क सेफ्टी का ध्यान रखते सुगम बना दिया जाए तो यह मार्ग जिले के सबसे उपयोगी होने के साथ समीपी बसे सैकड़ों गांव के विकास को गतिमान करने वाले मार्ग साबित होंगे।
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तीन बार हुआ सड़क निर्माण
माला पोंड़ी लिंक सड़क का निर्माण तीन बार हो चुका है। दुर्गम घाटी तेलन मार्ग को छोड़कर दोनो साइड सड़क निर्माण कर दिया गया है जिससे सवाल उठता है कि माला पोंड़ी लिंक रोड से दुर्गम घाटी पर सुगम सुरक्षित आवागमन के लिए शासन के द्वारा करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद घाटी को यथास्तिथि में छोड़ने की वजह से इस सड़क की उपयोगिता के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी कह रहे हैं कि इस घाटी की कटाई के लिए वन विभाग से एनओसी सहित घाटी की कटाई और अन्य कार्रवाई अंतिम दौर में हैं।

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