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Damoh News: 400 फीट ऊंची गजानन पहाड़ी पर लगा तिल गणेश मेला, यहां है भगवान गणेश की मराठाकालीन प्रतिमा
Fri, 17 Jan 2025 07:59 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2025 07:59 PM IST
सार
दमोह के गजानन पहाड़ी स्थित संतोषी माता मंदिर में तिल गणेश मेले का आयोजन हुआ। मराठाकालीन भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं। महिलाओं ने संतान की लंबी उम्र के लिए सकट चौथ का व्रत रखा और विशेष पूजन किया।
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मंदिर में विराजमान प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर के गजानन पहाड़ी संतोषी माता मंदिर परिसर में शुक्रवार को तिल गणेश के अवसर पर तिल गणेश मेला का आयोजन किया गया। 400 फीट ऊंचाई पर यह मंदिर है, जहां भगवान गणेश की मराठाकालीन प्रतिमा विराजमान है। यहां साल में एक दिन के लिए मेला आयोजित होता है, जिसमें पूरे जिले से लोग मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं। जिला प्रशासन के द्वारा यहां सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई थीं।
प्राचीन धरोहरों और संस्कृति से भरे नगर दमोह में शहर के बीचोंबीच यह पहाड़ी है जो आकर्षण का केंद्र है। यहां विराजमान भगवान श्री गणेश की प्रतिमा 500 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है। यहां पर प्रतिवर्ष तिल गणेश के दिन एक दिवसीय मेला भरता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। शहर के मध्य स्थित गजानन टेकरी पर संतोषी माता के मंदिर के साथ मराठा कालीन भगवान श्री गणेश की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि उनके दर्शनों से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
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शुक्रवार को तिल गणेश के अवसर पर व्रत धारण करने वाली महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। मंदिर के महंत राजेश पाठक, दिनेश पाठक के सानिध्य में विधिवत हवन पूजन के साथ 1001 तिली के लड्डुओं का भोग लगाया गया। गजानन पहाड़ी पर प्राचीन गणेश की प्रतिमा स्थापित है। यहां पर साल में तिल गणेश का मेला भरता है। तिल गणेश चतुर्थी पर काली व सफेद तिली के लड्डू का भोग श्री गणेश को लगाया जाता है। इस दिन दूर्वा चढ़ाने का भी विशेष महत्व है। महिलाएं व्रत धारण करती हैं और लड्डुओं से पूजन अर्चन कर विशेष आराधना करती हैं।
शुक्रवार की सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी थीं।
बच्चों ने उठाया मेला का आनंद
तिल गणेश के मेला पर बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए थे। कई प्रकार की दुकानें लगी थीं। मंदिर के व्यवस्थापक दिलीप चौरसिया और मोंटी रैकवार ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए सकट चौथ का व्रत रखती हैं. इस तिथि को संकट चौथ, माघी चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ आदि नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान श्री गणेश का विधि-विधान से पूजन होता है. वहीं चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण होता है।
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प्राचीन धरोहरों और संस्कृति से भरे नगर दमोह में शहर के बीचोंबीच यह पहाड़ी है जो आकर्षण का केंद्र है। यहां विराजमान भगवान श्री गणेश की प्रतिमा 500 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है। यहां पर प्रतिवर्ष तिल गणेश के दिन एक दिवसीय मेला भरता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। शहर के मध्य स्थित गजानन टेकरी पर संतोषी माता के मंदिर के साथ मराठा कालीन भगवान श्री गणेश की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि उनके दर्शनों से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
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शुक्रवार को तिल गणेश के अवसर पर व्रत धारण करने वाली महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। मंदिर के महंत राजेश पाठक, दिनेश पाठक के सानिध्य में विधिवत हवन पूजन के साथ 1001 तिली के लड्डुओं का भोग लगाया गया। गजानन पहाड़ी पर प्राचीन गणेश की प्रतिमा स्थापित है। यहां पर साल में तिल गणेश का मेला भरता है। तिल गणेश चतुर्थी पर काली व सफेद तिली के लड्डू का भोग श्री गणेश को लगाया जाता है। इस दिन दूर्वा चढ़ाने का भी विशेष महत्व है। महिलाएं व्रत धारण करती हैं और लड्डुओं से पूजन अर्चन कर विशेष आराधना करती हैं।
शुक्रवार की सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी थीं।
बच्चों ने उठाया मेला का आनंद
तिल गणेश के मेला पर बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए थे। कई प्रकार की दुकानें लगी थीं। मंदिर के व्यवस्थापक दिलीप चौरसिया और मोंटी रैकवार ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए सकट चौथ का व्रत रखती हैं. इस तिथि को संकट चौथ, माघी चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ आदि नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान श्री गणेश का विधि-विधान से पूजन होता है. वहीं चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण होता है।
