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Damoh: बंजारे को स्वप्न देकर तालाब के घाट से निकली थी खेरमाई की प्रतिमा, 80 साल पहले कराया था मंदिर का निर्माण
Tue, 08 Oct 2024 07:54 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Tue, 08 Oct 2024 07:54 PM IST
सार
बंजारे के मुखिया को माता ने स्वप्न में कहा कि तालाब के घाट के पास एक पत्थर के नीचे मैं विराजमान हूं, मुझे बाहर निकालाे। जब बंजारे ने घाट पर जाकर वहां रखे एक पत्थर को सीधा किया तो मां काली की दिव्य और भव्य प्रतिमा नीचे विराजमान थी।
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मंदिर में विराजमान प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह जिले के बनवार और बांदकपुर मुख्य सड़क से टिकरी पिपरिया से दो किमी दूर ग्राम हिनौती में प्राचीन खेरमाई का अद्भुत दरबार है। जहां मातारानी की प्रतिमा एक बंजारे को स्वप्न देकर निकली थी। मान्यता है कि माता अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। बुजुर्गों ने बताया कि पहले गांव की बसाहट से दूर खेतों में तालाब के पास माता की प्रतिमा पड़ी हुई थी। वहां बंजारे आकर रहते थे।
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किसी एक बंजारे के संतान नहीं थी। बैलगाड़ी से आकर यहां डेरा डालकर ठहरते थे। एक बार बंजारे के मुखिया को माता ने स्वप्न में कहा कि पहाड़ी के पास तालाब के घाट के पास एक पत्थर के नीचे मैं विराजमान हूं, मुझे बाहर निकालाे। स्वप्न के बाद जब बंजारे ने घाट पर जाकर वहां रखे एक पत्थर को सीधा किया तो मां काली की दिव्य और भव्य प्रतिमा नीचे विराजमान थी। जिन्हें सभी बंजारों ने मिलकर बाहर निकला। इसके बाद मां की प्रतिमा को उठाकर कैमा के पेड़ के नीचे स्थापित कर दिया और पूजन करने लगे।
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मां ने बंजारे की कामना पूर्ण करते हुए उसकी पत्नी की गोद संतान से भर दी। समय बीतता गया बंजारे डेरा लेकर अपने गांव चले गए। मां उसी पेड़ के नीचे बैठी रही, लेकिन बंजारों के जाने के बाद माता की प्रतिमा वीरान क्षेत्र में बैठी रही। कहा जाता है वर्षों तक किसी ने पूजन नहीं किया तो माता का कोप हिनोति गांव के लोगों पर ऐसा टूटा कि गांव में महामारी फैली गई गांव वीरान हो गया। लोग गांव से बाहर चले गए।
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पिपरिया गांव निवासी दर्शन सिंह को स्वप्न दिया। जिसके बाद पिपरिया गांव के ठाकुर परिवार ने वहां जाकर माता का पूजन किया। इसके बाद लोगों ने छोटी सी मड़िया बनवाई। इसी दौरान पंडा पुजारी माता की सेवा करने लगे। जिससे दूर-दूर के ग्रामीण माता के दरबार में आने लगे। लोगों की मन्नत पूरी होने लगी और मां के नित्य चमत्कारों की वजह से हिनोती खेरमाई की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। मां पर अटूट आस्था विश्वास के चलते लोग अपनी मनोकामनाओं को लेकर मां के दरबार में पहुंचने लगे।
80 साल पहले कराया था मंदिर का निर्माण
वीरेंद्र सिंह बताते है पहले माता रानी एक पेड़ के नीचे चबूतरा पर विराजमान थीं। उसके बाद मंदिर का निर्माण करीब 80 साल पहले कराया गया था। इस मंदिर में खेर माता की प्रतिमा स्थापित है। जिसमें खेर माता की मूर्ति बहुत ही दिव्य और भव्य रूप में विराजमान है।
