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Damoh News: पढ़ाई करना पसंद, फिर भी सैकड़ों छात्राओं ने छोड़ दिया स्कूल, जबरन घर का काम करने को मजबूर

Tue, 10 Dec 2024 04:01 PM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क,अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Tue, 10 Dec 2024 04:01 PM IST
सार

दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में कई गांव ऐसे हैं जहां की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए परिवहन की सुविधाएं नहीं है। अब स्कूल में छात्रावास की जरूरत महसूस की जा रही है। पर छात्रावास नहीं बन रहा है। अब सैकड़ों छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। 

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Damoh Hundreds of girl students have left studies due to lack of girls' hostels
पढ़ाई छोड़ने की जानकारी देती छात्राएं

विस्तार

दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में सैकड़ों छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। अब वो मजबूरी में पूरा दिन घर का काम करती रहती हैं जबकि उनको स्कूल जाना पसंद है। इनमें से कई छात्राएं पढ़ाई में अव्वल रही हैं। छात्राओं की ये मजबूर सिर्फ इसलिए है क्योंकि गांव से स्कूल जाने का साधन नहीं है। स्कूल में छात्रावास भी नहीं है। छात्राएं छात्रावास में रहकर भी पढ़ाई करने को तैयार हैं। 

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बालिकाएं कहती हैं कि  सरकार  भले ही नारा दे कि लड़के और लड़कियों में कोई अंतर नहीं है। लेकिन यहां गांव में जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है। छात्रावास की कमी के कारण हम स्कूल नहीं जा सकते हैं। इसी  कारण  बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। तेंदूखेड़ा तहसील के अलावा धनगौर और हिनोती में बालिका छात्रावास है जबकि स्कूल में पड़ने वाली छात्राएं प्रत्येक गांव में हैं जिनकी संख्या सैकड़ों में है।
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ये है मूल समस्या
तेंदूखेड़ा ब्लाक में 50 गांव ऐसे है जहां पर आवगमन के लिए वाहन नहीं चलते हैं। जबकि इन गांवों में हजारों की आबादी रहती है। गांव वाले बचपन में बेटा और बेटी दोनों को पढ़ाते हैं। पर जैसे ही लड़कियों की उम्र बढ़ती है तो बेटियों का स्कूल जाना बंद करा दिया जाता है। गांव वाले चाहते हैं लड़कियों को स्कूल आना-जाना ना पड़े। सड़कों पर अकेली लड़कियों की साथ कुछ भी हो सकता है। इस वजह से स्कूलों में छात्रावास की मांग की जा रही है। बालिकाओं ने बताया की झलोन, सर्रा, तारादेही, सामनापुर में कोई बालिका छात्रावास नहीं है। गांव से स्कूल की दूरी अधिक है। आने जाने में समस्याएं बनती है इसलिए परिवार के लोगों ने स्कूल बंद करा दिया।
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ये बोले परिजन
ससना गांव निवासी बारेलाल आदिवासी ने बताया कि उनकी बेटी अभी गांव में ही पढ़ाई कर रही है। ससना में स्कूल केवल दसवीं तक है। आगे की पढ़ाई के लिए बेटी को झलोन भेजना पड़ेगा।  गांव से आवागमन की कोई सुविधा नहीं है और झलोन में कोई बालिका छात्रावास नहीं है। जहां बेटी का एडमिशन कराकर वे उसकी पढ़ाई जारी रखवा सके। इसलिए आगे की पढ़ाई करवाना मुश्किल है। गांव में ऐसी कई बालिकाएं है जिन्होंने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी है क्योंकि सुविधाओं का आभाव है।

जंगली जानवरों से भी खतरा
डुकरस्ता समेत कई गांव जंगली क्षेत्र में बसे हुए हैं। इसकी झलोन से लगभग छह किलोमीटर की दूरी है। हाईस्कूल झलोन में है, लेकिन आने जाने में बालिकाओं को जंगली जानवरों का भी डर रहता है।  काफ़ी समस्याएं होती हैं। छात्रावास न होने के कारण इस गांव सी छात्राएं  आठवीं के बाद  स्कूल छोड़कर घर में बैठी है।

यह भी बात आई सामने
कुछ दिन पहले महिला बाल विकास विभाग द्वारा झलोन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें वो छात्राएं भी शामिल हुईं, जो स्कूल छोड़ चुकी हैं।   अधिकारियों ने जब बालिकाओं से शाला त्यागने का कारण पूछा था तो बालिकाओं ने  कहा कि वे आज भी पढ़ाई करना चाहती हैं, लेकिन पारिवारिक स्थिति, गांव से स्कूल की दूरी और छात्रावास का अभाव उनको स्कूल छोड़ने के लिए  मजबूर करता है। 


क्या बोले इलाके के विधायक ?
तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बताया कि धरती अवास जनजाति विभाग योजना शुरू हुई है। इसमें समुदायक भवन, हॉस्टल, सड़क, स्कूल भवन बनाए  जाने हैं। छात्रावास को इस योजना के तहत बनाया जा सकता है। प्रयास यही रहेगा जहां बालिका छात्रावास की कमी है। वहां भी इस योजना से छात्रावास बनाए  जा सके। जबेरा विधायक और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह का कहना है समस्या वाकई गंभीर है। इसको लेकर वे विभाग से पत्राचार करेंगे।

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