दमोह: खेत से सड़क पर आया विशाल मगरमच्छ, रस्सियों की पकड़ से छूटा तो मची अफरा-तफरी; दो घायल
दमोह के नोहटा क्षेत्र के हिनौती खेत सिंह गांव में करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ खेत से निकलकर सड़क किनारे पहुंच गया। वन विभाग की टीम ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित पकड़ा। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मगरमच्छ को सिंगौरगढ़ जलाशय में छोड़ दिया गया। रेस्क्यू के दौरान दो लोग घायल हुए।
विस्तार
नोहटा थाना क्षेत्र के ग्राम हिनौती खेत सिंह में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब खेतों से निकलकर करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ सड़क किनारे पहुंच गया। नाले के पास मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही जिला वन मंडल अधिकारी ईश्वर जरांडे के निर्देशन में परिक्षेत्र सागोनी के नोहटा बीट से वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।
खेत से निकलकर सड़क तक पहुंचा मगरमच्छ
स्थानीय लोगों के मुताबिक मगरमच्छ सबसे पहले खेत में दिखाई दिया था। खेत मालिक अज्जू खान ने इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी। इसी दौरान मगरमच्छ खेत की पत्थरों की खखरी से निकलकर सड़क की ओर पहुंच गया। सड़क किनारे मगरमच्छ दिखाई देने से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। लोगों ने वन विभाग और पुलिस को इसकी सूचना दी। मगरमच्छ सड़क के आसपास घूम रहा था, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों में भी भय का माहौल रहा। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा और रेस्क्यू की तैयारी शुरू की।
ये भी पढ़ें- भोपाल में थाने के अंदर वकील से मारपीट पर एक्शन: टीआई समेत दो आरक्षक निलंबित, आधी रात जमकर हुआ था हंगामा
रस्सियों की पकड़ से छूटकर भागा
वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से मगरमच्छ को रस्सियों के जरिए नियंत्रित करने का प्रयास किया। रेस्क्यू के दौरान मगरमच्छ अचानक रस्सियों की पकड़ से छूट गया। इसके बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मगरमच्छ को दोबारा पकड़ने के प्रयास में ग्रामीण अज्जू पिता केदार खान और फॉरेस्ट चौकीदार अट्ठी सिंह की उंगलियों में चोट लग गई। दोनों को उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उपचार के बाद रेस्क्यू अभियान फिर जारी रखा गया।
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद काबू आया
वन विभाग की टीम ने काफी सावधानी के साथ मगरमच्छ को दोबारा घेरा और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद मगरमच्छ को रस्सियों से नियंत्रित कर वन विभाग के वाहन में रखा गया। वन विभाग के अनुसार मगरमच्छ की लंबाई करीब छह फीट है और उसकी उम्र लगभग ढाई से तीन वर्ष बताई जा रही है। रेस्क्यू के बाद उसे सीधे प्राकृतिक जलस्रोत में छोड़ने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
पशु चिकित्सक ने किया स्वास्थ्य परीक्षण
मगरमच्छ को परिक्षेत्र सहायक आवास नोहटा लाया गया, जहां पशु चिकित्सक डॉ. डीएस लोधी ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पाए जाने पर उसे जलाशय में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सिंगौरगढ़ जलाशय में छोड़ा गया
नोहटा डिप्टी रेंजर रसीद कुरैशी ने बताया कि पिपरिया नंदलाल और हिनौती खेत सिंह गांव के बीच खेतों में मगरमच्छ पहुंचने की सूचना ग्रामीणों से मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मगरमच्छ को रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के सिंगौरगढ़ जलाशय में सुरक्षित छोड़ दिया गया। रेस्क्यू के दौरान घायल हुए ग्रामीण और फॉरेस्ट चौकीदार का स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया गया। मगरमच्छ के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रेस्क्यू के दौरान मुख्य रूप से अर्जुन सिंह, रशीद कुरैशी, दीपक अहिरवार, नोहटा बीट सुरक्षा श्रमिक अट्ठी सिंह, प्रेम सिंह, रघुवीर गौंड, प्रमोद गौंड, रामशंकर, गुलाब रैकवार, वकील ठाकुर, कल्याण वंशक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

खेत में मगरमच्छ।

मगरमच्छ का रेस्क्यू कर उसे जलाशय में छोड़ दिया गया।

खेत से होते हुए मगरमच्छ सड़क तक पहुंच गया था।
