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आज कैसा रहेगा एमपी का मौसम?: पांच जिलों में आंधी का अलर्ट, अगले सप्ताह बारिश के आसार,पहली बार पारा 14 डिग्री
Fri, 23 Oct 2026 07:16 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 23 Oct 2026 07:16 AM IST
सार
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी आंधी-बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी हिस्से में सात दिन से मौसम बदला हुआ है। शुक्रवार को आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है। 24 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद महीने के आखिरी सप्ताह में फिर बारिश के आसार हैं।
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम सामान्य नहीं हो रहा है। कहीं तेज धूप निकल रही है तो कहीं आंधी और बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले सात दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। अब अगले कुछ दिनों में रात की ठंड बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार, रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। वहीं, शुक्रवार को इंदौर संभाग के पांच जिलों में आंधी चलने का अलर्ट जारी किया गया है। आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। गुरुवार को इंदौर, धार समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर, भोपाल में दिनभर तेज धूप रही, लेकिन शाम होते-होते बादल छा गए। इससे साफ है कि मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश में स्थानीय मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं।
आखिरी सप्ताह में बारिश के आसार
मौसम विभाग के मुताबिक, 24 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर दो से तीन दिन बाद मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। इसके प्रभाव से खासकर उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बारिश के साथ तापमान में गिरावट भी देखने को मिल सकती है। फिलहाल साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी और बारिश हो रही है। मौसम में बदलाव के चलते दिन और रात के तापमान के बीच अंतर भी महसूस किया जा रहा है। दिन में धूप निकलने से गर्मी बनी हुई है, जबकि रात में पारा नीचे आने से ठंडक बढ़ रही है।
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पहली बार 14 डिग्री से नीचे पहुंचा न्यूनतम तापमान
प्रदेश में रात की ठंड ने अब असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस सीजन में पहली बार किसी स्थान पर न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में रात का तापमान 13.4 डिग्री रहा। अमरकंटक में 14.5, रीवा में 15, उमरिया में 15.4 और शहडोल के कल्याणपुर में 15.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। दिन के तापमान में भी कुछ स्थानों पर गिरावट आई है। इंदौर और टीकमगढ़ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से नीचे पहुंच गया। आने वाले दिनों में रात का पारा और गिरने की संभावना है। ऐसे में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सुबह और रात के समय ठंड का अहसास बढ़ सकता है।
मानसून लौट चुका, फिर भी क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से तीन अक्टूबर को ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का सिलसिला थमा नहीं है। इसकी वजह मानसून के बाद सक्रिय होने वाली दूसरी मौसमी प्रणालियां हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल, तेज हवा और बारिश की स्थिति बना सकते हैं।मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस साल के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने से तेज धूप निकली, लेकिन रात में ठंडक के साथ कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।
सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी
इस साल मानसून के चार महीनों में मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई। जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई। कुल बारिश सामान्य के मुकाबले 95.9 प्रतिशत रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल आंकड़ा सामान्य से अधिक रहा, हालांकि इन संभागों के कुछ जिलों में भी बारिश की कमी बनी रही। पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, देवास, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। कुछ जिलों में यह कमी काफी अधिक रही।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में मौसम कैसा रहेगा?: अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी नहीं थमेगी बारिश, आज इन जिलों में अलर्ट
जून की कमी से पिछड़ा पूरे सीजन का आंकड़ा
प्रदेश में मानसून के दौरान कुल बारिश का आंकड़ा कम रहने की प्रमुख वजह जून में कम वर्षा होना रहा। इस महीने सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून की गतिविधियां दो बार कमजोर पड़ीं। कई दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश की स्थिति सुधरी, फिर भी जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। इसी वजह से चार महीने के पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत नीचे रह गया।
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आखिरी सप्ताह में बारिश के आसार
मौसम विभाग के मुताबिक, 24 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसका असर दो से तीन दिन बाद मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। इसके प्रभाव से खासकर उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बारिश के साथ तापमान में गिरावट भी देखने को मिल सकती है। फिलहाल साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी और बारिश हो रही है। मौसम में बदलाव के चलते दिन और रात के तापमान के बीच अंतर भी महसूस किया जा रहा है। दिन में धूप निकलने से गर्मी बनी हुई है, जबकि रात में पारा नीचे आने से ठंडक बढ़ रही है।
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पहली बार 14 डिग्री से नीचे पहुंचा न्यूनतम तापमान
प्रदेश में रात की ठंड ने अब असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस सीजन में पहली बार किसी स्थान पर न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में रात का तापमान 13.4 डिग्री रहा। अमरकंटक में 14.5, रीवा में 15, उमरिया में 15.4 और शहडोल के कल्याणपुर में 15.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। दिन के तापमान में भी कुछ स्थानों पर गिरावट आई है। इंदौर और टीकमगढ़ में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से नीचे पहुंच गया। आने वाले दिनों में रात का पारा और गिरने की संभावना है। ऐसे में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सुबह और रात के समय ठंड का अहसास बढ़ सकता है।
मानसून लौट चुका, फिर भी क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से तीन अक्टूबर को ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का सिलसिला थमा नहीं है। इसकी वजह मानसून के बाद सक्रिय होने वाली दूसरी मौसमी प्रणालियां हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादल, तेज हवा और बारिश की स्थिति बना सकते हैं।मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस साल के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने से तेज धूप निकली, लेकिन रात में ठंडक के साथ कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।
सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी
इस साल मानसून के चार महीनों में मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई। जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई। कुल बारिश सामान्य के मुकाबले 95.9 प्रतिशत रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल आंकड़ा सामान्य से अधिक रहा, हालांकि इन संभागों के कुछ जिलों में भी बारिश की कमी बनी रही। पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, देवास, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। कुछ जिलों में यह कमी काफी अधिक रही।
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जून की कमी से पिछड़ा पूरे सीजन का आंकड़ा
प्रदेश में मानसून के दौरान कुल बारिश का आंकड़ा कम रहने की प्रमुख वजह जून में कम वर्षा होना रहा। इस महीने सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद मानसून की गतिविधियां दो बार कमजोर पड़ीं। कई दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश की स्थिति सुधरी, फिर भी जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। इसी वजह से चार महीने के पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत नीचे रह गया।
