फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Vyapam PMT scam: CBI court sentenced 10 convicts to 3 years rigorous imprisonment, also imposed a fine of Rs 1

व्यापमं पीएमटी घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने 10 दोषियों को सुनाई 3 साल की कैद, 16 हजार जुर्माना भी लगाया

Sat, 17 May 2025 08:32 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश Published by: आनंद पवार Updated Sat, 17 May 2025 08:32 AM IST
सार

भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत ने व्यापमं पीएमटी घोटाले से जुड़े एक अहम मामले में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। वर्ष 2009 की गांधी मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में फर्जीवाड़े के जरिए दाखिला दिलाने के आरोप में अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन साल की कठोर कैद और कुल 16,000 रुपए का जुर्माना देने की सजा सुनाई है। 

विज्ञापन
Vyapam PMT scam: CBI court sentenced 10 convicts to 3 years rigorous imprisonment, also imposed a fine of Rs 1
जेल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को बहुचर्चित व्यापमं पीएमटी (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 दोषियों को तीन-तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने इन सभी दोषियों पर कुल 16,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में वर्ष 2009 की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वरों की मदद से एडमिशन दिलाने का षड्यंत्र रचा गया था। 
विज्ञापन


इनमें चार  उम्मीदवार विकास सिंह, कपिल पारटे, दिलीप चौहान, प्रवीण कुमार थे, जिन्होंने मेडिकल प्रवेश के लिए सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा दी थी। पांच सॉल्वर नागेन्द्र कुमार, दिनेश शर्मा, संजीव पांडे, राकेश शर्मा, दीपक ठाकुर ऐसे थे, जिन्होंने असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी, जबकि एक बिचौलिया सत्येन्द्र सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
विज्ञापन


विशेष सीबीआई न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) की अदालत ने सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए खतरनाक है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस मामले की जांच पहले एसटीएफ के पास थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था।  
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed