MP: पिता-पुत्र के रिश्तों में मधुरता का संदेश लिए निकलेगी सूर्य देव की सवारी, त्रिवेणी नदी पर होगी पूजा-अर्चना
MP: मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर शनि नवग्रह मंदिर, त्रिवेणी, उज्जैन से सूर्य देव की सवारी निकाली जाएगी। आयोजक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु कृष्णा गुरुजी मिश्रा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सूर्य देव की सवारी मकर राशि में प्रवेश का संदेश लेकर निकलेगी।
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विस्तार
14 जनवरी 2025 को शनि नवग्रह मंदिर त्रिवेणी, उज्जैन से सूर्य देव की सवारी निकाली जाएगी। सूर्य देव को पालकी में विराजमान कर उनके गर्भगृह से त्रिवेणी नदी तक ढोल-ताशों के साथ 108 बटुक ब्राह्मणों द्वारा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए ले जाया जाएगा। त्रिवेणी नदी पर आचमन और पूजा-अर्चना के बाद सूर्य देव को शनि मंदिर के भूमिगत गर्भगृह में विराजित किया जाएगा।
कार्यक्रम की विशेषता
आयोजक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु कृष्णा गुरुजी मिश्रा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सूर्य देव की सवारी मकर राशि में प्रवेश का संदेश लेकर निकलेगी। मकर संक्रांति का खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। सूर्य देव हर माह राशि परिवर्तन करते हैं, लेकिन मकर राशि में उनका प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है।
सूर्य देव (पिता) और शनि देव (पुत्र) के पारस्परिक रिश्ते से समाज को यह संदेश दिया जाएगा कि आपसी मतभेदों के बावजूद रिश्तों में कटुता नहीं आनी चाहिए। सूर्य देव का गुड़ और शनि देव का तिल मिलकर मधुरता और एकता का प्रतीक हैं। यह संदेश दिया जाएगा कि परिवार के सदस्यों के बीच मीठी वाणी और आपसी समझ बनी रहनी चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियां
पालकी यात्रा
सुबह 11.45 बजे शनि त्रिवेणी मंदिर से शुरू होकर सूर्य देव की सवारी त्रिवेणी नदी तक जाएगी। बटुक ब्राह्मण विभिन्न ग्रहों की ध्वजाओं के साथ सवारी में शामिल होंगे।
पिता-पुत्र मिलन और पूजन
कार्यक्रम के दौरान 12.30 बजे दोपहर को बटुक ब्राह्मण पुत्रों के रूप में अपने पिता का पाद पूजन करेंगे।
यज्ञ और मंत्रोच्चार
पिता-पुत्र के रिश्तों में मधुरता लाने के लिए सूर्य और शनि मंत्रों के साथ यज्ञ किया जाएगा।
भोजन प्रसादी
दोपहर 2 बजे कार्यक्रम का समापन होगा, इसके बाद प्रसाद वितरण होगा।
संदेश और महत्व
गुरुजी ने बताया कि मकर संक्रांति केवल दान और उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में मिठास और पारस्परिक समझ बढ़ाने का भी समय है। पिता-पुत्र का यह पर्व संदेश देता है कि धन के साथ-साथ समय का दान भी रिश्तों को संवारने में अहम भूमिका निभाता है।
आयोजन की जानकारी
यह कार्यक्रम कृष्णा गुरुजी सोशल फेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित होगा।
