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24 बच्चों की मौत की जवाबदेही का सवाल: जांच के बीच अधिकारी की बहाली पर पटवारी ने घेरा, पूछा- जिम्मेदार कौन?

Sat, 26 Sep 2026 06:15 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 26 Sep 2026 06:15 PM IST
सार

छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में 24 बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जांच के बीच तत्कालीन औषधि निरीक्षक की बहाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से जिम्मेदारी तय करने, विभागीय जांच की स्थिति बताने और दवा निगरानी व्यवस्था की खामियों पर जवाब मांगा है।

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Question of accountability for the deaths of 24 children: Patwari targets authorities over an official's reins
पीसीसीसी चीफ जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छिंदवाड़ा के चर्चित कफ सिरप मामले में 24 बच्चों की मौत के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं होने को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने आरोप लगाया कि जिस मामले में बच्चों की मौत के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी, उसी प्रकरण में विभागीय जांच पूरी होने से पहले एक अधिकारी को बहाल कर दूसरे जिले में पदस्थ कर दिया गया। मध्य प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर 2025 से राज्य में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत दर्ज हुई थी। पटवारी ने 23 सितंबर 2026 के प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हुई थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि जांच का निष्कर्ष आने से पहले ही उन्हें निलंबन से बहाल कर गुना में पदस्थ कर दिया गया।
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पटवारी का सवाल- जांच पूरी होने से पहले बहाली क्यों?
पटवारी ने सरकार से पूछा कि जब अधिकारी का जवाब प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं पाया गया और विभागीय जांच चल रही थी, तो बहाली की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या 24 बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामले में जांच पूरी होने से पहले अधिकारी को दूसरी जगह पदस्थ करना उचित था। उनका आरोप है कि इस मामले में केवल सिरप बनाने वाली कंपनी या दवा विक्रेताओं की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस निगरानी तंत्र की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिसके रहते संदिग्ध दवा बाजार तक पहुंची।
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कोल्ड्रिफ पर पहले ही लग चुका है प्रतिबंध
छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने अक्टूबर 2025 में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री और वितरण रोकने की एडवाइजरी जारी की थी। इसमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सर्दी-खांसी की दवाएं देने को लेकर भी केंद्र की एडवाइजरी का पालन करने को कहा गया था। मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रही है। सितंबर 2026 में जबलपुर हाईकोर्ट ने कफ सिरप मामले के एक दवा विक्रेता को जमानत दी थी, जबकि दूसरे आरोपी की याचिका सुनवाई के दौरान वापस लिए जाने पर निरस्त हुई।
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कांग्रेस ने औषधि निगरानी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
पटवारी ने दावा किया कि प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का नेटवर्क सामने आया है। उन्होंने फर्जी फर्मों, ड्रग लाइसेंस और दवा की अवैध बिक्री की जांच को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर अवैध नेटवर्क चल रहा था तो औषधि प्रशासन और निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दवा निरीक्षकों के रिक्त पदों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया।


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निलंबन के बाद आखिर कार्रवाई कहां पहुंची?
पटवारी ने कहा कि त्रासदी के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन कार्रवाइयों का अंतिम परिणाम क्या हुआ, विभागीय जांच कहां तक पहुंची और अब तक किसकी जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने सरकार से सात सवालों पर जवाब मांगा है कि संदिग्ध दवा बाजार तक कैसे पहुंची, समय पर नमूने क्यों नहीं लिए गए, विभागीय जांच का अंतिम परिणाम क्या है, जांच लंबित रहते अधिकारी की बहाली क्यों हुई, अवैध कफ सिरप नेटवर्क पर निगरानी क्यों नहीं हुई, औषधि निरीक्षकों के रिक्त पद कब भरे जाएंगे और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक संसाधन कब मिलेंगे। पटवारी ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, उनके लिए यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा नहीं है। उन्होंने सरकार से पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।


 
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