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MP Politics: शिवराज की छवि, दिग्गजों से सामंजस्य, वित्त का इंतजाम हैं CM मोहन की चुनौतियां, कैसे पाएंगे पार?

Fri, 22 Dec 2023 07:42 PM IST
Anand Pawar आनंद पवार
Updated Fri, 22 Dec 2023 07:42 PM IST
सार

प्रदेश में शिवराज की छवि के बीच अपनी एक अलग छवि बनाना, भाजपा के संकल्प पत्र की योजनाओं को जमीन पर लाने के लिए बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच वित्त का प्रबंधन करना प्रमुख हैं। यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।

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MP Politics: Shivraj's image, coordination with veterans, financial arrangements are the challenges of CM Moha
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चार बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें उनके मंत्रिमंडल में दिग्गजों के शामिल होने पर सामंजस्य बैठाना। प्रदेश में शिवराज की छवि के बीच अपनी एक अलग छवि बनाना, भाजपा के संकल्प पत्र की योजनाओं को जमीन पर लाने के लिए बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच वित्त का प्रबंधन करना प्रमुख हैं। 
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दिग्गजों के साथ सामंजस्य 
डॉ. मोहन यादव को कई दिग्गज नेताओं को दरकिनार का मुख्यमंत्री बनाया गया है। ऐसे में उनको दिग्गज नेताओं के साथ ही पूर्व मंत्रियों को भी साध कर चलना होगा। चर्चा है कि यादव कैबिनेट में कई बढ़ दिग्गज मंत्री बन रहे हैं। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, पूर्व सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहें राकेश सिंह जैसे नेता शामिल हैं। इसके अलावा सबसे वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव जैसे नेताओं को यादव के अधीन काम करना पसंद नहीं होगा। इसके संकेत कैलाश विजयवर्गीय ने दे भी दिए हैं। उन्होंने हाल ही में इंदौर में बयान दिया कि वह मोहन यादव से शिक्षा में पीछे रहे गए। उनके इस बयान को राजनीतिक पंडित उनके सीएम की दौड़ में पिछड़ने के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में साफ हैं मुख्यमंत्री को दिग्गज नेताओं के साथ काम करना भी एक चुनौती होगी। 
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शिवराज की छवि से मुकाबला
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से ही सक्रिय हो गए। प्रदेश में उनकी छवि भाई और मामा की है। उन्होंने विधानसभा के परिणाम आने के बाद दिल्ली जाने के बजाए मिशन 29 का शुभारंभ कर दिया। ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने शिवराज की छवि से अलग अपनी छवि बनानी होगी। अभी यादव की पहचान उज्जैन और मालवा निमाड़ तक ही है। उनको पूरे राज्य के नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने के जरिए तलाशने होंगे। 
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सभी नेताओं के गुटों को साधना
मोहन यादव संघ के करीबी हैं। उनको संघ और संगठन दोनों के बीच सामंजस्य बैठाकर चलना होगा। प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक, शिवराज सिंह चौहान-नरेंद्र सिंह तोमर-कैलाश विजयवर्गीय और वीडी शर्मा के करीबियों को साध कर चलना होगा। अभी यह भी देखना होगा कि यादव मंत्रिमंडल में किस नेता के कितने विधायकों को जगह मिलती है। हालांकि, यादव भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर काम करेंगे। फिर भी उनको प्रदेश के नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाकर चलना होगा। 
भाजपा की घोषणाओं को पूरा कराना
प्रदेश की मोहन सरकार 2000 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। प्रदेश की योजनाओं को जारी रखने के लिए यह कर्ज लिया जा रहा है। ऐसे में डॉ. मोहन यादव सरकार के सामने बड़ी चुनौती सरकार की चली आ रही योजनाओं को निर्बाध रूप से संचालित करना है। सरकार के ऊपर मार्च 2023 तक कुल कर्ज 3 लाख 32 हजार करोड़ रुपये हो गया। इसके मार्च 2024 तक 3.85 लाख करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। ऐसे में बढ़ते कर्ज के बीच सरकार की नई योजनाओं को लागू करने के लिए बजट का प्रबंधन करना बड़ी चुनौती होगी।

नेतृत्व क्षमता है तो चुनौती बड़ी नहीं 
वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह का कहना है कि यह सही है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने चुनौती बड़ी है। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर है कि वे किस तरह से इसका सामना करते हैं। यह पहली बार नहीं है कि किसी कम वजनदार नेता को मुख्यमंत्री बनाया गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद शिवराज सिंह चौहान हैं। जब उनको मुख्यमंत्री बनाया था तब उनको भी पहली बार में कोई नहीं जानता था। प्रदेश में बड़े बड़े नेता था। कांग्रेस के शासन में मोती लाल वोरा को मुख्यमंत्री बनाने के समय भी यह स्थिति थी। उस समय भी उनकी कैबिनेट में हैवीवेट नेता थे। डॉ. मोहन यादव में नेतृत्व क्षमता है तो ये चुनौतियां कोई बड़ी बड़ी बात नहीं हैं।


कर्ज का असर योजनाओं पर पड़ेगा : केएस शर्मा
पूर्व चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा का कहना है कि मध्य प्रदेश में कर्ज सीमा से ज्यादा हो चुका है। ऐसी स्थिति में ब्याज चुकाने में दिक्कत होती है। इसका असर गरीबों को मदद करने वाली योजनाओं पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को अब सोच समझ कर अपना खर्च करना होगा। सरकारी इवेंट, उत्सव पर बेतहाशा खर्च रोकना होगा। मुफ्त की रेवड़ी को बढ़ावा देने पर रोक लगानी होगी। मध्य प्रदेश में यह बहुत ज्यादा हो गया है। पैसे की बचत के लिए भ्रष्टाचार और गड़बड़ी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाना चाहिए। राजस्व बढ़ाने के भी इंतजाम किए जाना चाहिए। इसका मतलब टैक्स बढ़ाने से नहीं है। जहां से पैसा वसूल नहीं हो रहा है, उनकी वसूली के लिए कदम उठाने चाहिए। सरकार जन सुविधाएं बढ़ाने के लिए काम करे, लेकिन अनुत्पादक खर्चों को रोके।
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