MP News: भारत-नामीबिया के बीच एमओयू साइन, जल्द ही कूनो नेशनल पार्क में नजर आएंगे अफ्रीकी चीते
भारत ने 1952 में विलुप्त घोषित किए जा चुके चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाने के लिए नामीबिया के साथ बुधवार को एक एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
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संसार का सबसे तेज दौड़ने वाला वन्यजीव चीता 70 साल बाद भारत की जमीन पर फिर एक बार लौट रहा है। नामीबिया से 15 अगस्त के पहले 8 चीते भारत लाए जाएंगे। इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अफ्रीकी देश नामीबिया की उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री नेतुम्बो नंदी डेइट्वा के साथ समझौते (एमओयू) पर बुधवार को हस्ताक्षर किए।
पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इन 8 चीतों में चार नर और चार मादा हैं। समझौते के तहत यह चीतों का पहला बैच होगा, यानी आने वाले समय में और चीते लाए जाएंगे। दक्षिण अफ्रीका के साथ भी भारत सरकार बात कर रही है ताकि वहां से भी एक समझौता कर और चीते भारत ला सकें।
चीते आएंगे तो खुले जंगलों में सुधार होगा : भूपेंद्र यादव
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, चीते जैसे प्रमुख वन्यजीव की वापसी से भारत में घास के खुले जंगलों को फिर से संरक्षित किया जा सकेगा। चीते न रहने से यह खास जंगल धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे। इस प्रोजेक्ट से लंबे समय में इको-टूरिज्म बढ़ेगा।
एक दूसरे की मदद करेंगे दोनों देश
समझौते के तहत दोनों देश अपने यहां चीता संरक्षण से जुड़े अनुभव व विशेषज्ञता भी साझा करेंगे। साथ ही भारत तकनीक के उपयोग, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव गणना, निगरानी व अनुमान, पर्यावरण पर प्रभाव के अध्ययन, प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, आदि में नामीबिया को मदद देगा। वन कर्मियों को वन्यजीव प्रबंधन का प्रशिक्षण मिलेगा और तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट चीता : जानिए सबकुछ, एशियाई चीते देश से ऐसे हुए खत्म
- भारत में 7 दशक पहले तक एशियाई चीते हुआ करते थे। आखिरी तीन चीतों का मध्यप्रदेश (अब छत्तीसगढ़ में शामिल) की एक रियासत के पूर्व महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने 1948 में शिकार कर दिया था, 1952 में इन्हें आधिकारिक तौर पर भारत से खत्म घोषित किया गया।
- 1952 में आजाद भारत की पहली वन्यजीव बोर्ड बैठक में चीते के संरक्षण के निर्देश दिए गए, लेकिन उसी वर्ष देश से चीता खत्म होने की घोषणा हुई। 70 के दशक में ईरान के तत्कालीन शाह से एशियाई चीते लाने पर बातचीत हुई, बदले में एशियाई शेर दिए जाने थे, लेकिन समझौता नहीं हुआ।
कूनो-पालपुर बनेगा पहला घर, क्योंकि...
इन 8 चीतों का पहला बैच मध्यप्रदेश के कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। 2010 से 2012 के बीच इसके लिए 10 जंगलों का मूल्यांकन हुआ। इनमें कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) सबसे सही पाया गया। यहां पहले एशियाई शेर बसाए जाने थे, जिसकी तैयारियां हुई थीं, लेकिन योजना बदली गई और इसे चीते के लिए चुना गया। 748 वर्ग किमी में फैले केएनपी में चीतों के लिए भरपूर शिकार है और यहां श्योपुर -शिवपुरी के खुले जंगल हैं। इनमें अभी 21 तथा बाद में यहां 36 चीते बसाए जा सकते हैं।
