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MP News: सीएम बोले- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का लाभ संपूर्ण प्रदेश को समान रूप से मिले
Mon, 05 May 2025 08:34 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 05 May 2025 08:34 PM IST
सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध संघ के बीच हुए अनुबंध की समीक्षा की; किसानों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बैठक करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को समत्व भवन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और म.प्र. राज्य सहकारी दुग्ध संघ के बीच हुए अनुबंध के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए एनडीडीबी की विशेषज्ञता का लाभ पूरे प्रदेश को समान रूप से मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सिर्फ सहकारी संस्थाओं तक ही सीमित न रहकर निजी डेयरी संचालकों को भी आवश्यक तकनीकी परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य राज्यों की बेहतरीन नस्ल की गाय-भैंसों को आसानी से लाने और किसानों को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में उत्पादित दूध का वैल्यू एडिशन यहीं हो और फिर डेयरी उत्पाद प्रदेश से बाहर भेजे जाएं। इसके लिए कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिल्क पार्लर की स्थापना और ब्रांड प्रमोशन जैसी गतिविधियों को तेज गति से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एनडीडीबी द्वारा प्रदेश के दुग्ध संघों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का प्रभार अपने नामित अधिकारियों को सौंपा गया है। प्रदेश के दुग्ध सहकारी कवरेज के विस्तार, संकलन, प्रसंस्करण और विपणन हेतु तकनीक-आधारित अधोसंरचना का विकास जारी है। अगले पांच वर्षों में प्रदेश के कम से कम 50% गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों से भी डेयरी टेक्नोलॉजी और पशुपालन से संबंधित कोर्स शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को गौशालाओं से जोड़कर उनका प्रबंधन और उत्पादन दोनों सुधारे जा सकते हैं। बैठक में पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,एनडीडीबी के प्रमुख मिनेश शाह और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। यह योजना राज्य के किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में उत्पादित दूध का वैल्यू एडिशन यहीं हो और फिर डेयरी उत्पाद प्रदेश से बाहर भेजे जाएं। इसके लिए कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिल्क पार्लर की स्थापना और ब्रांड प्रमोशन जैसी गतिविधियों को तेज गति से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एनडीडीबी द्वारा प्रदेश के दुग्ध संघों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का प्रभार अपने नामित अधिकारियों को सौंपा गया है। प्रदेश के दुग्ध सहकारी कवरेज के विस्तार, संकलन, प्रसंस्करण और विपणन हेतु तकनीक-आधारित अधोसंरचना का विकास जारी है। अगले पांच वर्षों में प्रदेश के कम से कम 50% गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
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मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों से भी डेयरी टेक्नोलॉजी और पशुपालन से संबंधित कोर्स शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को गौशालाओं से जोड़कर उनका प्रबंधन और उत्पादन दोनों सुधारे जा सकते हैं। बैठक में पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा,एनडीडीबी के प्रमुख मिनेश शाह और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। यह योजना राज्य के किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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