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MP News: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ीं मंत्री शाह के साथ भाजपा की मुश्किलें,अब फैसले की बारी दिल्ली की
Mon, 19 May 2025 07:14 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 19 May 2025 07:14 PM IST
सार
कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई उनकी विवादित टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए न सिर्फ उनकी माफी को खारिज कर दिया है, बल्कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश भी दिए हैं। अब इस पूरे मामले को लेकर निर्णय दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है।
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विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह पर कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने न सिर्फ शाह की माफी को खारिज कर दिया है, बल्कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। एसआईटी को 28 मई तक पहली रिपोर्ट दाखिल करनी है। इस फैसले के बाद विजय शाह पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों और पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने भी उन्हें हटाने की मांग की है। हालांकि, भाजपा फिलहाल रक्षात्मक रुख अपनाए हुए है और पूरे मामले को न्यायालय पर छोड़ रही है। विजय शाह इस विवाद के बाद से सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब इस पूरे मामले को लेकर निर्णय दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन ने कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। वे कह रहे हैं कि कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा। भाजपा की पुरानी रणनीति रही है कि वह विपक्ष के दबाव में आकर अपने मंत्रियों से इस्तीफा नहीं लेती। यही कारण है कि विजय शाह को लेकर पार्टी नेतृत्व असमंजस में है। एक ओर जहां उनके बयान को लेकर देशभर में नाराजगी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी आदिवासी समुदाय के वोट बैंक को लेकर भी सतर्क है।
मध्य प्रदेश में करीब 22% आदिवासी आबादी है और विजय शाह इस वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे हरसूद सीट से आठ बार विधायक रह चुके हैं और गोंड समाज से आते हैं, जिससे उनका सामाजिक प्रभाव भी है। यह पहला मौका नहीं है जब विजय शाह विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वे कई बार विवादास्पद बयानों और घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। 2013 में एक बयान के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बावजूद इसके, वे हर बार पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में सफल रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, अब इस पूरे मामले को लेकर निर्णय दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन ने कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। वे कह रहे हैं कि कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा। भाजपा की पुरानी रणनीति रही है कि वह विपक्ष के दबाव में आकर अपने मंत्रियों से इस्तीफा नहीं लेती। यही कारण है कि विजय शाह को लेकर पार्टी नेतृत्व असमंजस में है। एक ओर जहां उनके बयान को लेकर देशभर में नाराजगी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी आदिवासी समुदाय के वोट बैंक को लेकर भी सतर्क है।
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मध्य प्रदेश में करीब 22% आदिवासी आबादी है और विजय शाह इस वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे हरसूद सीट से आठ बार विधायक रह चुके हैं और गोंड समाज से आते हैं, जिससे उनका सामाजिक प्रभाव भी है। यह पहला मौका नहीं है जब विजय शाह विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वे कई बार विवादास्पद बयानों और घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। 2013 में एक बयान के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बावजूद इसके, वे हर बार पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने में सफल रहे हैं।
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