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एमपी में मानसून की रफ्तार थमी: भारी बारिश से राहत, 37 जिलों में कोटा अभी तक अधूरा, सामान्य से 6% कम पानी गिरा
Tue, 15 Sep 2026 07:18 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 15 Sep 2026 07:18 AM IST
सार
मानसून के करीब 15 दिन बाकी हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक सामान्य से 6% कम बारिश हुई है। 37 जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। पूर्वी मध्य प्रदेश बेहतर स्थिति में है, जबकि पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में 2 से 49% तक कमी बनी हुई है। 15 सितंबर से बारिश की रफ्तार घटने का अनुमान है।
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में करीब 15 दिन बाकी हैं, लेकिन प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक 6% बारिश कम है। सबसे बड़ा अंतर पश्चिमी मध्य प्रदेश में बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बारिश सामान्य से कम है। प्रदेश के 37 जिलों में अभी बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। इसके उलट भोपाल, ग्वालियर समेत 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। पिछले चार दिनों से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर चल रहा था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश हुई, लेकिन मंगलवार से मानसूनी तंत्र कमजोर होने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर रह सकता है।
अगले चार दिन भारी बारिश से राहत
अगले चार दिनों में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 15 सितंबर से बारिश की तीव्रता और क्षेत्रीय विस्तार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है।
पूर्वी एमपी ने संभाला आंकड़ा, पश्चिमी हिस्सा अब भी पीछे
इस सीजन में पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में बारिश का प्रदर्शन बेहतर रहा है। निवाड़ी में सामान्य से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। मऊगंज में अब तक सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके विपरीत इंदौर संभाग का आलीराजपुर सबसे पिछड़े जिलों में है। यहां अब तक करीब 16 इंच बारिश ही हुई है और सामान्य कोटे की आधी बारिश भी पूरी नहीं हुई है।
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पश्चिमी एमपी में 2 से 49% तक कमी
पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में 2% से 49% तक कमी दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से में भी बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी समेत कई जिलों में बारिश सामान्य से कम है। इन जिलों में कमी 2% से 25% तक है।
23 जिले सामान्य से आगे
प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
यह भी पढ़ें-गणेश चतुर्थी-हरतालिका तीज पर धूम, शुभ मुहूर्त में घरों और पंडालों में विराजे बप्पा,शिव मंदिरों में भीड़
जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
मानसून की शुरुआत में जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से कमी कम हुई। जुलाई-अगस्त में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक भी आया। अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में सक्रिय हुए सिस्टम से कई जिलों में अच्छी बारिश हुई और प्रदेश का आंकड़ा सुधरा, लेकिन अब भी प्रदेश सामान्य से पीछे है।
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अगले चार दिन भारी बारिश से राहत
अगले चार दिनों में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 15 सितंबर से बारिश की तीव्रता और क्षेत्रीय विस्तार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है।
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पूर्वी एमपी ने संभाला आंकड़ा, पश्चिमी हिस्सा अब भी पीछे
इस सीजन में पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में बारिश का प्रदर्शन बेहतर रहा है। निवाड़ी में सामान्य से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। मऊगंज में अब तक सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके विपरीत इंदौर संभाग का आलीराजपुर सबसे पिछड़े जिलों में है। यहां अब तक करीब 16 इंच बारिश ही हुई है और सामान्य कोटे की आधी बारिश भी पूरी नहीं हुई है।
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पश्चिमी एमपी में 2 से 49% तक कमी
पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में 2% से 49% तक कमी दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से में भी बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी समेत कई जिलों में बारिश सामान्य से कम है। इन जिलों में कमी 2% से 25% तक है।
23 जिले सामान्य से आगे
प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
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जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
मानसून की शुरुआत में जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से कमी कम हुई। जुलाई-अगस्त में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक भी आया। अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में सक्रिय हुए सिस्टम से कई जिलों में अच्छी बारिश हुई और प्रदेश का आंकड़ा सुधरा, लेकिन अब भी प्रदेश सामान्य से पीछे है।
