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इंदौर में करोड़पति भिखारी : एक लत ने पहुंचा दिया ऐसे हालात में, परिजनों ने घर वापसी के लिए रखी यह शर्त
Thu, 04 Mar 2021 07:56 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 04 Mar 2021 07:56 PM IST
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इंदौर में भीख मांगते मिले करोड़पति रमेश यादव
- फोटो : Social Media
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शराब की लत बर्बादी की कगार पर पहुंचा देती है। मध्य प्रदेश के इंदौर का ऐसा मामला सामने आया है, जिसे पढ़-सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। केंद्र की दीनबंधु पुनर्वास योजना के तहत इंदौर में भिखारियों का पुनर्वास किया जा रहा है। इसी दौरान एक एनजीओ की टीम को किला मैदान के समीप देवी मंदिर के बाहर एक बुजुर्ग भीख मिले। जब उनके बारे में पड़ताल की गई तो पता चला कि वह तो करोड़पति हैं, लेकिन शराब की लत के कारण इस हाल में हैं। उनके परिजन उनकी घर वापसी के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उनकी शर्त मानना होगी।
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इन बुजुर्ग भिखारी का नाम है रमेश यादव। वह बीते दो साल से भीख मांगकर पेट भर रहे हैं। उनका मुकाम इंदौर वायर फैक्टरी के समीप कालका माता का मंदिर हुआ करता था। एनजीओ-आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसायटी की टीम ने अब उन्हें पंजाब अरोड़वंशीय धर्मशाला में आयोजित शिविर में रखा है। संस्था की प्रमुख रूपाली जैन ने बताया कि रमेश यादव ने शादी नहीं की है, लेकिन उनके भाई-भतीजे हैं।
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कमरे में चार लाख का इंटीरियर
एनजीओ की टीम जब उनके परिजनों के घर पहुंची तो पता चला कि यादव के नाम पर एक बंगला है। एक भूखंड भी है। उनके कमरे में चार लाख रुपये का तो इंटीरियर डेकोरेशन किया हुआ था। एसी से लेकर अन्य सभी सुख-सुविधा की वस्तुएं थीं। परिजनों ने कहा कि आप इनकी शराब की लत छुड़वा दीजिए हम इन्हें केवल साथ रखेंगे बल्कि पूरा खयाल भी रखेंगे। इसके बाद एनजीओ की टीम ने यादव की काउंसिलिंग की। वह घर पर रहकर काम करने व शराब छोड़ने को तैयार हो गए हैं।
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छूट रही है लत, सेहत भी सुधर रही
एनजीओ के अनुसार भिक्षुक पुनर्वास योजना के तहत शिविर में रहते हुए यादव की सेहत सुधर रही है। पहले वे शिविर में भी कार्यकर्ताओं से शराब मांगते थे, लेकिन अब नहीं मांगते। इस शिविर में अब तक 100 से ज्यादा लोगों को लाया गया है। ये लोग भिक्षावृत्ति करते हैं या बेसहारा सड़कों पर रहते हैं।
फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं कुछ भिक्षुक
रूपाली जैन ने बताया कि हमें ऐसे भिक्षुक भी मिले हैं जो संपन्न घरों के हैं, लेकिन गलत आदतों के कारण उन्हें ठुकरा दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ भिक्षुक तो फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं। पुनर्वास के लिए लाए गए 90 फीसदी लोग नशे के आदी हैं। ये लोग कई तरह के नशा करते रहे हैं। शिविर में वह धीरे-धीरे नशे की लत से बाहर निकल रहे हैं।
