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मध्यप्रदेश: राजभवन पहुंचे इमरती-दंडोतिया के इस्तीफे, 73 दिन बाद फिर मंत्री बनेंगे सिलावट-राजपूत
Sat, 02 Jan 2021 02:52 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: कुमार संभव
Updated Sat, 02 Jan 2021 02:52 PM IST
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को अपने मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार करेंगे। इसके तहत 3 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसमें गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट का मंत्री बनना तय है। इस बीच इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया के इस्तीफे राजभवन पहुंच चुके हैं।
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दोबारा मंत्री बनेंगे इमरती-दंडोतिया
जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के दूसरे कैबिनेट विस्तार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसके तहत गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट राजभवन में शपथ लेंगे। बता दें कि कमलनाथ सरकार के तख्तापलट के बाद 21 अप्रैल 2020 को राजपूत और सिलावट शिवराज सरकार में मंत्री बने थे। हालांकि, छह महीने बाद हुए उपचुनाव के दौरान इन दोनों ने इस्तीफा दे दिया था।
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जस के तस रहेंगे दोनों के विभाग
बताया जा रहा है कि 3 जनवरी को शपथ लेने के बाद राजपूत और सिलावट को उनके विभाग वापस मिल जाएंगे। दरअसल, पहले जब ये दोनों मंत्री बने थे, तब सिलावट के पास जल संसाधन और राजपूत के पास राजस्व व परिवहन विभाग था।
विभाग को लेकर हुई थी खींचतान
बता दें कि 10 नवंबर को हुए उपचुनाव में सिलावट और राजपूत को जीत मिल गई थी। इन दोनों ने चुनाव जीतने के 15 दिन बाद ही मंत्री पद की शपथ लेने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त परिवहन विभाग बदलने को लेकर खींचतान होने लगी थी। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमा यह विभाग छोड़ने को तैयार नहीं था, जबकि भाजपा इसे बदलना चाहती थी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब कोई खींचतान नहीं है। वहीं, मंत्री रहे तीन नेताओं के चुनाव हारने और इस्तीफे के बाद अब महिला एवं बाल विकास विभाग व पीएचई भी खाली हो गए हैं।
राजभवन पहुंचा इमरती-दंडोतिया का इस्तीफा
इस बीच इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया का मंत्री पद से इस्तीफा राजभवन पहुंच गया। दोनों ने अपने इस्तीफे मुख्यमंत्री सचिवालय भेजे थे, लेकिन उन्हें वहां रोककर रखा गया था। इस दौरान इमरती देवी कैबिनेट की बैठकों में शामिल होती रहीं। बता दें कि उपचुनाव हारने के बाद भी इमरती और दंडोतिया 51 दिन तक मंत्री बने रहे।
