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Lunar Eclipse: एक साल में सात तक हो सकते हैं ग्रहण, अगले साल भारत में दो बार होगा चंद्रग्रहण
Sun, 06 Nov 2022 06:54 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 06 Nov 2022 06:54 PM IST
सार
सूर्य और चंद्रग्रहण को मिलाकर देखा जाए तो एक कैलेन्डर वर्ष में न्यूनतम चार ग्रहण होते हैं। कुछ वर्षों जैसे 2013, 2018 एवं 2019 में पांच ग्रहण हुए। 2011 एवं 2020 में छः ग्रहण हुए तो 1982 के बाद आगामी 2038 को एक ही साल में सात ग्रहण की घटना होगी।
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सारिका ने ग्रहण के विज्ञान को गीतों के माध्यम से समझाया।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मंगलवार को उदित होते चंद्रमा के साथ आंशिक ग्रहण को देखा जा सकेगा। शाम 6 बजकर 19 पर चंद्रमा आंशिक ग्रहण की स्थिति से बाहर आ जाएगा। खगोलविज्ञान को रुचिकर तरीके से समझाने के लिए नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने गीतों को माध्यम बनाया।
सारिका ने बताया कि पूर्वी आकाश में लालिमा के साथ ग्रहण की स्थिति में उदित होकर चन्द्रमा शाम 6 बजकर 19 पर आंशिक ग्रहण की स्थिति से बाहर आ जाएगा। ग्रहण के साथ उदित होते चंद्रमा की दूरी 3 लाख 90 हजार किमी से कुछ अधिक होगी। इसके बाद उपछाया ग्रहण आरंभ होगा यह उपछाया ग्रहण 7 बजकर 26 मिनिट पर समाप्त हो जाएगा।
सारिका ने बताया कि पांच हजार वर्ष की अवधि में 7718 आंशिक एवं पूर्ण चंद्रग्रहण की घटना की गणना की गई है। इस तरह प्रत्येक वर्ष औसतन 1.5 चंद्रग्रहण की घटना होती है। चंद्रग्रहण की घटना पूर्णिमा को ही होती है । पूर्णिमा का संबंध आमतौर पर किसी जयंती या पर्व से जुड़ा होता है। इसलिए साल में कोई दो पर्व पर चंद्रग्रहण आ जाता है। अगर सूर्य और चंद्रग्रहण को मिलाकर देखा जाये तो एक कैलेन्डर वर्ष में न्यूनतम चार ग्रहण होते हैं। कुछ वर्षों जैसे 2013, 2018 एवं 2019 में पांच ग्रहण हुए। 2011 एवं 2020 में छः ग्रहण हुए तो 1982 के बाद आगामी 2038 को एक ही साल में सात ग्रहण की घटना होगी। इस चंद्रग्रहण के बाद अगले साल 2023 में भारत में चंद्रग्रहण की दो घटनाएं होंगी जिनमें 5 मई को उप छायाग्रहण तथा 28 अक्टूबर को आंशिक चंद्रग्रहण की घटना होगी।
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सारिका ने बताया कि पूर्वी आकाश में लालिमा के साथ ग्रहण की स्थिति में उदित होकर चन्द्रमा शाम 6 बजकर 19 पर आंशिक ग्रहण की स्थिति से बाहर आ जाएगा। ग्रहण के साथ उदित होते चंद्रमा की दूरी 3 लाख 90 हजार किमी से कुछ अधिक होगी। इसके बाद उपछाया ग्रहण आरंभ होगा यह उपछाया ग्रहण 7 बजकर 26 मिनिट पर समाप्त हो जाएगा।
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सारिका ने बताया कि पांच हजार वर्ष की अवधि में 7718 आंशिक एवं पूर्ण चंद्रग्रहण की घटना की गणना की गई है। इस तरह प्रत्येक वर्ष औसतन 1.5 चंद्रग्रहण की घटना होती है। चंद्रग्रहण की घटना पूर्णिमा को ही होती है । पूर्णिमा का संबंध आमतौर पर किसी जयंती या पर्व से जुड़ा होता है। इसलिए साल में कोई दो पर्व पर चंद्रग्रहण आ जाता है। अगर सूर्य और चंद्रग्रहण को मिलाकर देखा जाये तो एक कैलेन्डर वर्ष में न्यूनतम चार ग्रहण होते हैं। कुछ वर्षों जैसे 2013, 2018 एवं 2019 में पांच ग्रहण हुए। 2011 एवं 2020 में छः ग्रहण हुए तो 1982 के बाद आगामी 2038 को एक ही साल में सात ग्रहण की घटना होगी। इस चंद्रग्रहण के बाद अगले साल 2023 में भारत में चंद्रग्रहण की दो घटनाएं होंगी जिनमें 5 मई को उप छायाग्रहण तथा 28 अक्टूबर को आंशिक चंद्रग्रहण की घटना होगी।
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