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घर बैठे सीखेंगे आयुर्वेद: दुनिया में कहीं भी मिलेगा प्रमाणपत्र, बनेगा नेशनल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट, ऑनलाइन कोर्स

Mon, 05 Oct 2026 02:46 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 05 Oct 2026 02:46 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित नेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड मॉडल से आयुर्वेद का प्रशिक्षण दिया जाएगा। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थी, शोधार्थी और आम लोग भी पाठ्यक्रम कर सकेंगे। विशेषज्ञों के व्याख्यान रिकॉर्ड करने के लिए डिजिटल स्टूडियो, सर्वर और पॉडकास्ट की सुविधा विकसित करने की योजना है।

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Learn Ayurveda from the comfort of your home: Get certified anywhere in the world, a national training institu
पं. खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद संस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्य प्रदेश में आयुर्वेद की पढ़ाई और प्रशिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पं. खुशीलाल शासकीय आयुर्वेद संस्थान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग इन आयुर्वेदा बनाने की योजना तैयार की जा रही है। प्रस्तावित संस्थान में आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सकों, शिक्षकों, मेडिकल ऑफिसर्स, नर्सिंग स्टाफ, स्नातक विद्यार्थियों, इंटर्न, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। खास बात यह होगी कि प्रशिक्षण के लिए हर बार संस्थान पहुंचना जरूरी नहीं होगा। ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड तीनों माध्यमों से पाठ्यक्रम चलाने की तैयारी है। देश ही नहीं, दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग ऑनलाइन पंजीयन कर प्रशिक्षण ले सकेंगे और पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र भी जारी किया जा सकेगा।
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डॉक्टरों को नई तकनीक और उपचार पद्धतियों से अपडेट करने पर जोर
इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे पंडित खुशी लाल आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. नयन राम ने बताया कि प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य केवल आयुर्वेद की पारंपरिक जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें समय के साथ उपचार और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों को भी शामिल किया जाएगा। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा सकेगी, जिनसे उनका रोजाना सामना जरूरी नहीं होता। एंडोस्कोपी, कोलपोस्कोपी, क्रायोसर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों और उपचार में हो रहे नवाचारों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को समय-समय पर अपनी जानकारी अपडेट करने का अवसर मिलेगा।
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योग से पंचकर्म और महिला स्वास्थ्य तक होंगे पाठ्यक्रम
डॉ. नयन राम ने बताया कि प्रशिक्षण के दायरे में आयुर्वेद से जुड़े कई अलग-अलग विषय शामिल करने की योजना है। इसमें योग, गर्भावस्था, पंचकर्म, शल्य चिकित्सा, महिला स्वास्थ्य और मर्म चिकित्सा जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। संस्थान से जुड़े कॉलेज में मर्म चिकित्सा का केंद्र भी स्थापित किया गया है। इसके अलावा आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, गैर सरकारी संगठनों से जुड़े लोगों और दूसरे विशेषज्ञों के लिए भी उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकेंगे।
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विशेषज्ञों के लेक्चर होंगे रिकॉर्ड, बनेगा डिजिटल स्टूडियो
डॉ. नयन राम ने बताया कि इस योजना का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल कंटेंट तैयार करना है। इसके लिए संस्थान में रिकॉर्डिंग और संपादन की सुविधा वाला स्टूडियो विकसित करने की योजना है। देशभर के विषय विशेषज्ञों को बुलाकर उनके व्याख्यान रिकॉर्ड किए जा सकेंगे। इन व्याख्यानों को लंबे पाठ्यक्रम के तौर पर सुरक्षित रखने के साथ ही छोटे वीडियो, रील और पॉडकास्ट के रूप में भी तैयार किया जा सकेगा। इसके लिए सर्वर और पॉडकास्ट स्टूडियो विकसित करने की भी योजना है।

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30-40 लोगों के समूह को ऑनलाइन कराया जा सकेगा पूरा कोर्स
प्रस्तावित व्यवस्था में केवल रिकॉर्ड किए हुए वीडियो देखने तक प्रशिक्षण सीमित नहीं रहेगा। किसी विषय पर पूरा पाठ्यक्रम करने वाले करीब 30 से 40 लोगों का समूह बनाया जा सकेगा। उन्हें वेब के माध्यम से ऑनलाइन जोड़ा जाएगा और विशेषज्ञों के जरिए प्रशिक्षण कराया जाएगा। पाठ्यक्रम के दौरान पूर्व परीक्षा और बाद की परीक्षा का प्रावधान रखा जा सकता है। प्रशिक्षण पूरा करने और परीक्षा में निर्धारित मानक पूरा करने के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।


मरीज भी सीख सकेंगे आयुर्वेद की बुनियादी बातें
इस संस्थान का प्रशिक्षण केवल स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। आम लोग और मरीज भी आयुर्वेद के मूल सिद्धांत और बुनियादी जानकारी वाले पाठ्यक्रम कर सकेंगे। हालांकि मरीजों या आम लोगों के लिए हर पाठ्यक्रम में प्रमाणपत्र जरूरी नहीं होगा, लेकिन ऐसे पाठ्यक्रमों में परीक्षा पास करने पर प्रमाणपत्र देने का विकल्प भी रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद को समझने और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना होगा।

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देश-विदेश तक पहुंचेगा आयुर्वेद का प्रशिक्षण
डॉ. नयन राम ने बताया कि प्रस्तावित संस्थान की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप होगा। ऑनलाइन पंजीयन के बाद प्रशिक्षणार्थी अपने स्थान से ही सर्वर के माध्यम से पाठ्यक्रम की सामग्री देख सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन जारी किया जा सकेगा। इस तरह मध्य प्रदेश में प्रस्तावित यह संस्थान आयुर्वेद की शिक्षा को कक्षा और परिसर से निकालकर डिजिटल मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक पहल बन सकता है। इससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए लगातार ज्ञानवर्धन का रास्ता खुलेगा, वहीं आम लोगों को भी आयुर्वेद की प्रमाणिक बुनियादी जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।

 
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